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Panipat News: वापस आया तो शादी भी हो जाएगी, पहले देश सेवा जरूरी...

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 21 Jul 2025 06:02 AM IST
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When I come back, I will get married, but serving the country is important first...
इसराना। कारगिल में तनाव लगातार बढ़ रहा था। किसी भी समय जंग की शुरूआत होने की घोषणा हो सकती थी। बांध गांव के अमरदीप भी अपनी कंपनी के साथ कारगिल ऑपरेशन के लिए रवाना हो चुके थे। उधर, गांव में उनके रिश्ते की बात भी चल रही थी। एक दिन बड़े भाई महीपाल ने रिश्ते के लिए हां कहने से पहले अमरदीप की राय लेने के लिए फोन किया, तो अमरदीप ने शादी से इंकार कर दिया।
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उन्होंने भाई से बस इतना ही कहा अभी देश सेवा जरूरी है, वापस लौटकर आऊंगा तो जहां चाहे शादी कर देना। आठ मई 1999 को द्रास सेक्टर में अमरदीप देश की सेवा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान देकर अमर हो गए। उनके बलिदान होने पर आज भी परिवार को गर्व है। लेकिन, छोटे भाई को दुल्हा बनते देखने का सपना पूरा न होने का मलाल भी है।
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बांध गांव के किसान प्रेम सिंह के घर में पांच अप्रैल 1974 को बेटे ने जन्म लिया। जिसका नाम अमरदीप रखा गया। उनके बड़े भाई महीपाल ने बताया कि अमरदीप को बचपन से ही सेना में भर्ती होने का जुनून था। अपने इसी जुनून के चलते मात्र 20 साल की उम्र में 22 फरवरी 1995 को अमरदीप सेना में भर्ती हो गए। उन्हें 16 ग्रेडनियर में तैनाती मिली। कारगिल युद्ध के समय बलिदानी अमरदीप की कंपनी के साथ द्रास सेक्टर में मोर्चे पर थी। जहां पर दुश्मन सेना का सामना करते हुए वे आठ मई 1999 को बलिदान हो गए। उनके पार्थिव शरीर को लेकर 13 मई 1999 को सेना के जवान बांध गांव पहुंचे थे। उस समय आस-पास के ग्रामीणों की भीड़ उनके अंतिम दर्शन करने के लिए गांव में पहुंच गई थी। सैनिक सम्मान के साथ उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया। बड़े भाई महीपाल सिंह ने बताया कि सरकार द्वारा परिजनों को पेट्रोल पंप दिया गया था। गांव के राजकीय स्कूल का नाम बलिदानी अमरदीप के नाम पर रखा गया है।
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गांव में स्मारक नहीं बनने का मलाल

बड़े भाई महीपाल का कहना है कि गांव में उनके नाम पर स्मारक बनने की घोषणा हुई थी। लेकिन, आज तक बलिदानी के नाम पर गांव में स्मारक नहीं बन पाया। स्मारक के लिए पंचायत द्वारा कोई स्थान उपलब्ध नहीं करा सकी।


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