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Panipat News: मौसम साफ, फिर भी प्रदूषण का बढ़ा ग्राफ, एक्यूआई 222 पर पहुंचा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 21 Oct 2026 01:48 AM IST
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Weather is clear, yet pollution levels have risen; AQI reaches 222.
दिनभर चली हवा के साथ आसमान रहा साफ। संवाद
पिछले साल इसी अवधि में 150 से 165 के बीच था स्तर, पराली जलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। मौसम साफ होने के बावजूद पानीपत में वायु प्रदूषण बढ़ने लगा है। मंगलवार को शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 222 दर्ज किया गया, जो खराब श्रेणी में आता है। प्रदूषण बढ़ने से सांस संबंधी परेशानी वाले मरीजों, बुजुर्गों और बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। सुबह-शाम सैर करने वालों को भी प्रदूषण के स्तर को ध्यान में रखने की सलाह दी गई है।

मंगलवार को अधिकतम तापमान 31 और न्यूनतम 18 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा। उत्तर-पश्चिम दिशा से हल्की हवाएं चल रही हैं, लेकिन प्रदूषण का स्तर अधिक होने के कारण हवा की शुद्धता लगातार प्रभावित हो रही है।
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पिछले साल से अधिक प्रदूषण

पिछले वर्ष इस अवधि में पराली जलाने के मामलों और मौसमी बदलावों के चलते एनसीआर क्षेत्र के साथ पानीपत में भी हवा संवेदनशील थी। पिछले साल अक्तूबर के इन दिनों में औसत एक्यूआई 150 से 165 के दायरे में दर्ज किया गया था। इस बार यह आंकड़ा बढ़कर 200 के पार (222) पहुंच गया है। यह संकेत देता है कि त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही प्रदूषण का ग्राफ पिछले साल के मुकाबले ऊपर चला गया है।
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पराली जलाने पर कार्रवाई की चेतावनी

उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने किसानों से फसल अवशेषों को जलाने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पराली जलाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। किसानों को पराली से जैविक खाद बनाने, बायोमास ऊर्जा उत्पादन और बेल्स बनाकर उद्योगों को बेचने जैसे विकल्प अपनाने की सलाह दी गई है।


सेहत और मिट्टी पर पड़ता है असर

प्रदूषित हवा से सांस संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। वहीं, पराली जलाने से मिट्टी के उपयोगी सूक्ष्मजीव नष्ट होते हैं और उसकी उर्वरता प्रभावित होती है। ऐसे में फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन पर्यावरण और मिट्टी की सेहत दोनों के लिए जरूरी है।
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