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Panipat: यमुना एक बार फिर खतरे के निशान पर, लोगों की नींद गायब, ठिकरी पहरा लगा निगरानी कर रहे ग्रामीण

Sun, 23 Jul 2023 09:43 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत/ बापौली (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत/ बापौली (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Sun, 23 Jul 2023 09:43 PM IST
सार

ग्रामीण ठिकरी पहरा लगा यमुना की निगरानी कर रहे हैं। सिंचाई विभाग की टीमें व ग्रामीण तटबंधों पर गश्त कर रहे हैं। खतरा अब भी बरकार है। हिमाचल प्रदेश में बादल फटने के बाद यमुना का जलस्तर बढ़ा है। प्रशासन ने पानीपत में हाई अलर्ट जारी किया है। 

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Water level of Yamuna in Panipat once again on danger mark, increased concern of people
बढ़ते जल स्तर का जायजा लेते नायब तहसीलदार कैलास चंद्र, व पटवारियों की टीम। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा पानी शनिवार रात करीब दो बजे पानीपत में पहुंचने से यमुना एक बार फिर उफान पर आ गई। यह सीजन में दूसरी बार है कि यमुना खतरे के निशान पर पहुंच गई। इससे चिंतित ग्रामीणों की नींद गायब हो गई है। प्रशासनिक अधिकारी और ग्रामीण रातभर पहरा देते रहे। यमुना रविवार को दोपहर बाद कुछ शांत हुई।

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इसके बाद अधिकारियों व लोगों ने राहत की कुछ सांसे ली। इन सबके बीच यमुना अब 231.13 मीटर पर बह रही है। ये खतरे के निशान से मात्र चार इंच नीचे है। प्रशासन की टीम यमुना पर लगातार गश्त कर रही हैं। यमुना तटीय क्षेत्रों में हाई अलर्ट जारी है। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश न होने व दोबारा और अतिरिक्त पानी न छोड़ने पर यमुना का जलस्तर सोमवार को कुछ कम हो सकता है।
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पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के बाद हथिनीकुंड बैराज से शनिवार को यमुना नदी में अधिकतम 2.51 लाख क्यूसेक पानी प्रवाहित किया था। यह पानी शनिवार देर रात को तेज होने लगा था और रात करीब दो बजे पूरे उफान पर पहुंच गया था। यमुना का पानी एक बार खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया।
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प्रशासन व स्थानीय लोगों को रातभर नींद नहीं आई। तामशाबाद व नवादार आर के पास पहले टूटे तटबंध पर सबसे ज्यादा नजर रही। यहां अधिकारी लगातार बैठे रहे। केंद्रीय जल बोर्ड के अनुसार यमुना का खतरे का निशान 231.50 मीटर पर है। यह अब 231.13 मीटर पर बह रही है।

यमुना से सटे गांव में तटबंध की रात को निगरानी करते ग्रामीण।
रविवार सुबह आठ बजे हथिनीकुंड बैराज से यमुना नदी में 1,42,603 क्यूसेक पानी प्रवाहित किया गया है। शाम चार बजे 45568 हजार क्यूसेक पानी प्रवाहित किया गया है। यमुना अब पिछली बार से करीब तीन फुट नीचे पानी बह रहा है।

11 जुलाई को टूट गए थे तटबंध
यमुना में 11 जुलाई को हथिनीकुंड बैराज से 3.2 लाख क्यूसिक पानी छोड़ा गया था। इस कारण यमुना उफान पर आ गई थी। तामशाबाद व नवादा आर के पास तटबंध टूट गए थे। हजारों एकड़ फसल बाढ़ से बर्बाद हो गई थी। दो लोगों की बाढ़ से मौत भी हो गई थी। छह गांवों का एक दूसरे से संपर्क टूट गया था।

बुखार और आई फ्लू से ग्रस्त मरीज मिले
बाढ़ ग्रस्त गांव नवादा-पार, जलालपुर द्वितीय, तामशाबाद, सनौली खुर्द, नवादा पार, झांबा, गढ़ी बेसिक, पत्थरगढ़ व राणा माजरा में मरीजों की जांच कर स्वास्थ्य विभाग की टीमें दवा दे रही हैं। जिन लोगों को बुखार है उनकी स्लाइड तैयार कर जांच के लिए सिविल अस्पताल भेजी जा रही है। अब तक 200 से अधिक लोगों में चमड़ी रोग, 100 से अधिक बुखार से ग्रस्त व 200 से अधिक आई फ्लू से ग्रस्त मिल चुके हैं।
 
प्रशासन ने ठिकरी पहरे के दिए निर्देश
एसडीएम समालखा अमित कुमार, नायब तहसीलदार कैलाश चंद्रर, कानूनगो नरेश कुमार, राजेश कुमार व पटवारी सुरेद्र ने रविवार को यमुना का जायजा लिया। एसडीएम अमित कुमार ने बताया कि यमुना किनारे के सभी गांवों में ठिकरी पहरा लगाया गया है और चौकीदारों के माध्यम से मुनादी करवाई गई है। यमुना के आसपास के गांवों के ग्रामीण रातभर तटबंध पर मौजूद रहकर निगरानी करेंगे। वहीं गांव सनौली खुर्द के सरपंच संजय त्यागी, पत्थरगढ़ के सरपंच सालिम अहमद, गढ़ी बेसिक के सरपंच रफाकत हसन, नवादा आर के सरपंच जोगिंद्र ने बताया कि उन्होंने अपने गांवों में ठिकरी पहरा लगाया है और ग्रामीण सारी रात यमुना तटबंध पर रहकर निगरानी रखेंगे।

 
तटबंध की तरफ बढ़ रहा है पानी
गांव तामशाबाद के पास यमुना का पानी जमीन का कटाव करते हुए तटबंध की तरफ बढ़ रहा है। दो दिनों से शनिवार, रविवार शाम को ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग की जेसीबी की मदद से पेड़ काटकर तटबंध को मजबूत किया जा रहा है। ग्रामीणों को डर है कि यदि यहां से तटबंध टूटा गया तो 1978 वाली बाढ़ के हालात बन जाएंगे।

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