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Panipat News: यमुना में पानी खतरा बिंदु से आया नीचे, कटाव होने का खतरा बढ़ा
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सनौली क्षेत्र खेतों में जमा रेत। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
सनौली। यमुना का पानी शुक्रवार को चेतावनी स्तर 231.00 मीटर पर आ गया। जबकि वीरवार को यमुना में पानी खतरे के निशान 231.50 मीटर से 10 सेमी नीचे 231.40 मीटर पर बह रहा था। अब गांव नवादा-आर व खोजकीपुर में तटबंध के अंदर भूमि का कटाव हो रहा है। नवादा-आर गांव में कटाव तक जाने के लिए रास्ता नहीं मिलने पर खतरा बढ़ता जा रहा है। खोजकीपुर गांव में कटाव बंद किया जा रहा है। इसके साथ दो सितंबर को गांव पत्थरगढ़, नवादा-आर व नवादा पार के पास तटबंध में रिसाव होने के स्थान को मजबूत किया जा रहा है।
हथिनीकुंड बैराज से पानी कम होने पर यमुना का जलस्तर कम होने लगा है। शुक्रवार को यमुना में पानी खतरे के निशान से नीचे आ गया। यह अब चेतावनी के निशान 231.00 मीटर पर बह रहा है। सिंचाई विभाग की टीम पत्थरगढ़, नवादा-आर व नवादा पार के पास तटबंध में रिसाव के स्थान को मजबूत करने पहुंची। यहां दलदल मिली। अधिकारियों ने जेसीबी की मदद से दलदल को हटा कर सूखी मिट्टी डाली। इसके साथ मिट्टी के कट्टे लगाए गए। जेई मोहित बेलदार व मजदूरों के साथ तटबंध मजबूत करने में लगे रहे। वहीं किसानों का कहना है कि यदि यमुना में पानी दोबारा से ज्यादा आता है तो तटबंध को खतरा हो सकता है। सिंचाई विभाग के एसडीओ सतीश कुमार ने बताया कि यमुना में पानी कम हो गया है और अब किसी प्रकार की कोई भी दिक्कत नहीं है। जहां पर तटबंध में रिसाव हो गया था, वहां पर कुछ दलदल वाली मिट्टी मिली थी। तटबंध को पूरी तरह से मजबूत कर दिया गया है।
विशेष गिरदावरी कराने और मुआवजे की मांग
किसान राजपाल, सुनील, बलवान, विनोद व प्रमोद का कहना है कि यमुना का पानी कई दिनों तक फसलों में भरने से फसल खराब होने का खतरा बढ़ गया है। सरकार व प्रशासन को विशेष गिरदावरी करनी चाहिए। इसके साथ फसल का पूरा मुआवजा दिया जाए। यमुना के ओवरफ्लो होने से रामड़ा आर, रिशपुर व सनौली खुर्द के करीब 300 एकड़ में पानी भर गया था। खेतों में एक से डेढ़ फीट तक रेत जमा हो गयाहै। वहीं यमुना तटबंध के अंदर भी करीब 15 हजार एकड़ फसल में पानी भरा हुआ है। यहां तीन से चार फीट तक रेत जमा मिल सकता है।
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सनौली। यमुना का पानी शुक्रवार को चेतावनी स्तर 231.00 मीटर पर आ गया। जबकि वीरवार को यमुना में पानी खतरे के निशान 231.50 मीटर से 10 सेमी नीचे 231.40 मीटर पर बह रहा था। अब गांव नवादा-आर व खोजकीपुर में तटबंध के अंदर भूमि का कटाव हो रहा है। नवादा-आर गांव में कटाव तक जाने के लिए रास्ता नहीं मिलने पर खतरा बढ़ता जा रहा है। खोजकीपुर गांव में कटाव बंद किया जा रहा है। इसके साथ दो सितंबर को गांव पत्थरगढ़, नवादा-आर व नवादा पार के पास तटबंध में रिसाव होने के स्थान को मजबूत किया जा रहा है।
हथिनीकुंड बैराज से पानी कम होने पर यमुना का जलस्तर कम होने लगा है। शुक्रवार को यमुना में पानी खतरे के निशान से नीचे आ गया। यह अब चेतावनी के निशान 231.00 मीटर पर बह रहा है। सिंचाई विभाग की टीम पत्थरगढ़, नवादा-आर व नवादा पार के पास तटबंध में रिसाव के स्थान को मजबूत करने पहुंची। यहां दलदल मिली। अधिकारियों ने जेसीबी की मदद से दलदल को हटा कर सूखी मिट्टी डाली। इसके साथ मिट्टी के कट्टे लगाए गए। जेई मोहित बेलदार व मजदूरों के साथ तटबंध मजबूत करने में लगे रहे। वहीं किसानों का कहना है कि यदि यमुना में पानी दोबारा से ज्यादा आता है तो तटबंध को खतरा हो सकता है। सिंचाई विभाग के एसडीओ सतीश कुमार ने बताया कि यमुना में पानी कम हो गया है और अब किसी प्रकार की कोई भी दिक्कत नहीं है। जहां पर तटबंध में रिसाव हो गया था, वहां पर कुछ दलदल वाली मिट्टी मिली थी। तटबंध को पूरी तरह से मजबूत कर दिया गया है।
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विशेष गिरदावरी कराने और मुआवजे की मांग
किसान राजपाल, सुनील, बलवान, विनोद व प्रमोद का कहना है कि यमुना का पानी कई दिनों तक फसलों में भरने से फसल खराब होने का खतरा बढ़ गया है। सरकार व प्रशासन को विशेष गिरदावरी करनी चाहिए। इसके साथ फसल का पूरा मुआवजा दिया जाए। यमुना के ओवरफ्लो होने से रामड़ा आर, रिशपुर व सनौली खुर्द के करीब 300 एकड़ में पानी भर गया था। खेतों में एक से डेढ़ फीट तक रेत जमा हो गयाहै। वहीं यमुना तटबंध के अंदर भी करीब 15 हजार एकड़ फसल में पानी भरा हुआ है। यहां तीन से चार फीट तक रेत जमा मिल सकता है।
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सनौली क्षेत्र खेतों में जमा रेत। संवाद

सनौली क्षेत्र खेतों में जमा रेत। संवाद