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Panipat News: अंग खोने पर गुमनाम थे, आज नाम के साथ शोहरत पाने की उड़ान
Tue, 11 Apr 2023 01:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Tue, 11 Apr 2023 01:48 AM IST
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पानीपत। मुसीबत से तू ज्यादा डर या खौफ ना रख, तू जीतेगा जरूर एक दिन बस तू आज हौंसला रख...। एक कविता की ये लाइनें सोमवार को जीवंत होती नजर आईं। जब कृत्रिम अंग मिले तो हर किसी के चेहरे पर खुशी अलग थी और उनके मन में वहीं उड़ान भरने का लालसा थी।
यह नजारा सोमवार को अंसल स्थित जैन स्थानक में देखने को मिला। यहां जैन समाज और भारत विकास परिषद के सहयोग से प्रदेशभर के 147 लोगों को कृत्रिम अंग दिए गए।
इसके गवाह खुद प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल और जैन समाज के महापुरुष सत्यप्रकाश मुनि, नवीन मुनि, श्रीपाल मुनि और भास्कर अजित मुनी सहित ठाणे-सात बने। मुख्यमंत्री ने पांच विकलांगों को अपने हाथों से ट्राईसाइकिल और दूसरे कृत्रिम अंग दिए। मुख्यमंत्री ने समाज और भारत विकास परिषद के प्रयासों की सराहना की और समाज के दूसरे लोगों को भी इनसे प्रेरणा लेने की बात कही।
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हिसार में बनाए कृत्रिम अंग-
भारत विकास परिषद की विवेकानंद शाखा हिसार में कृत्रिम अंग बनाए गए। यहां लाला देवी चंद्र ग्रोवर केंद्र में कृत्रिम अंग निशुल्क बनाए जाते हैं। 147 लोगों को पूरा पांव, आधा पांव, हाथ और क्लीपर दिए गए। केंद्र के इंचार्ज खुशीराम गोयल ने बताया कि हिसार में केंद्र 1999 से काम कर रहा है। अब तक करीब 19 हजार लोगों को कृत्रिम अंग दिए जा चुके हैं। पूरे देश से लोग यहां आकर अपने कृत्रिम अंग बनवाते हैं। इसके अलावा पटना और चंडीगढ़ सहित 13 केंद्र हैं। सफेद मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया जाता है। बाजार में पूरा पैर 25 और आधा पैर 18 हजार रुपये में लगाता है।
गुरु सुदर्शन के जीवन पर डाला प्रकाश -
विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री सुरेंद्र जैन ने गुरु सुदर्शन के जीवन पर प्रकाश डालकर उनकी नीतियां अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि चाणक्य, स्वामी दयानंद, स्वामी विवेकानंद जैसे महान व्यक्तित्व के धनी संतों ने पूरे विश्व को एक मार्गदर्शन किया। उसी कड़ी में सुदर्शन महाराज ने संत मार्ग पर अंगुली पकड़कर चलने के लिए प्रेरित किया। भ्रष्टाचार खत्म करने और आत्मशुद्धि को अपनाने पर बल दिया। जैन ने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल भी संत प्रवृत्ति के धनी हैं। वे आध्यात्म के रास्ते पर चलकर सेवा और संस्कार के साथ गरीब व्यक्तियों की सहायता कर रहे हैं।
हौसलों की उड़ान, उन्हीं की जुबानी
मैं अब दिव्यांग नहीं, मुकाम करेंगे हासिल
पटना, बिहार के संट्टू ने बताया कि वह लंबे समय से पानीपत रहते हैं। गीता कॉलोनी में काम करते थे। 15-16 साल पहले एक हादसे में उनके दोनों पैर कट गए थे। वह अब काम नहीं कर पा रहे थे। जीटी रोड पर लोगों से मांगकर अपना गुजर कर रहा था। दोनों पैर मिल गए हैं। वह फिर से काम कर सम्मान के साथ जीएगा।
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अब सम्मान के साथ जीकर दिखाऊंगा
फतेहाबाद के कूला गांव के दयानंद ने बताया कि वह दो साल पहले सीढि़यों से नीचे गिर गया था। डॉक्टर ने प्लास्टर किया और उसके दबाव में नश ब्लॉक हो गई। इसके चलते उसका पैर काटना पड़ा था। उसके दो बच्चे हैं। वह उन्हें समाज में सम्मान के साथ देखना चाहता था। उसने कृत्रिम अंग लगवाने का फैसला लिया और कंप्यूटर सीखा। वह अब सामान्य व्यक्ति की तरह सम्मान के साथ जीकर दिखाएगा।
ट्रेन से गिरकर कट गया था पैर
ईदगाह रोड पानीपत निवासी सुरेश पहलवान ने बताया कि वह 66 वर्ष के हैं। वह बचपन में परिवार के सदस्यों के साथ ट्रेन में जा रहे थे। असंध रोड फ्लाईओवर के समीप ट्रेन से गिर गए, जिसमें पैर कट गया। उनके दो बच्चे हैं। लोगों को देखकर अपने जीने का उद्देश्य बदलने का फैसला किया। कृत्रिम अंग लगवाने के बाद अब अपना छोटा मोटा काम करने का प्रयास रहेगा।
पानीपत। मुसीबत से तू ज्यादा डर या खौफ ना रख, तू जीतेगा जरूर एक दिन बस तू आज हौंसला रख...। एक कविता की ये लाइनें सोमवार को जीवंत होती नजर आईं। जब कृत्रिम अंग मिले तो हर किसी के चेहरे पर खुशी अलग थी और उनके मन में वहीं उड़ान भरने का लालसा थी।
यह नजारा सोमवार को अंसल स्थित जैन स्थानक में देखने को मिला। यहां जैन समाज और भारत विकास परिषद के सहयोग से प्रदेशभर के 147 लोगों को कृत्रिम अंग दिए गए।
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इसके गवाह खुद प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल और जैन समाज के महापुरुष सत्यप्रकाश मुनि, नवीन मुनि, श्रीपाल मुनि और भास्कर अजित मुनी सहित ठाणे-सात बने। मुख्यमंत्री ने पांच विकलांगों को अपने हाथों से ट्राईसाइकिल और दूसरे कृत्रिम अंग दिए। मुख्यमंत्री ने समाज और भारत विकास परिषद के प्रयासों की सराहना की और समाज के दूसरे लोगों को भी इनसे प्रेरणा लेने की बात कही।
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हिसार में बनाए कृत्रिम अंग-
भारत विकास परिषद की विवेकानंद शाखा हिसार में कृत्रिम अंग बनाए गए। यहां लाला देवी चंद्र ग्रोवर केंद्र में कृत्रिम अंग निशुल्क बनाए जाते हैं। 147 लोगों को पूरा पांव, आधा पांव, हाथ और क्लीपर दिए गए। केंद्र के इंचार्ज खुशीराम गोयल ने बताया कि हिसार में केंद्र 1999 से काम कर रहा है। अब तक करीब 19 हजार लोगों को कृत्रिम अंग दिए जा चुके हैं। पूरे देश से लोग यहां आकर अपने कृत्रिम अंग बनवाते हैं। इसके अलावा पटना और चंडीगढ़ सहित 13 केंद्र हैं। सफेद मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया जाता है। बाजार में पूरा पैर 25 और आधा पैर 18 हजार रुपये में लगाता है।
गुरु सुदर्शन के जीवन पर डाला प्रकाश -
विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री सुरेंद्र जैन ने गुरु सुदर्शन के जीवन पर प्रकाश डालकर उनकी नीतियां अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि चाणक्य, स्वामी दयानंद, स्वामी विवेकानंद जैसे महान व्यक्तित्व के धनी संतों ने पूरे विश्व को एक मार्गदर्शन किया। उसी कड़ी में सुदर्शन महाराज ने संत मार्ग पर अंगुली पकड़कर चलने के लिए प्रेरित किया। भ्रष्टाचार खत्म करने और आत्मशुद्धि को अपनाने पर बल दिया। जैन ने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल भी संत प्रवृत्ति के धनी हैं। वे आध्यात्म के रास्ते पर चलकर सेवा और संस्कार के साथ गरीब व्यक्तियों की सहायता कर रहे हैं।
हौसलों की उड़ान, उन्हीं की जुबानी
मैं अब दिव्यांग नहीं, मुकाम करेंगे हासिल
पटना, बिहार के संट्टू ने बताया कि वह लंबे समय से पानीपत रहते हैं। गीता कॉलोनी में काम करते थे। 15-16 साल पहले एक हादसे में उनके दोनों पैर कट गए थे। वह अब काम नहीं कर पा रहे थे। जीटी रोड पर लोगों से मांगकर अपना गुजर कर रहा था। दोनों पैर मिल गए हैं। वह फिर से काम कर सम्मान के साथ जीएगा।
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अब सम्मान के साथ जीकर दिखाऊंगा
फतेहाबाद के कूला गांव के दयानंद ने बताया कि वह दो साल पहले सीढि़यों से नीचे गिर गया था। डॉक्टर ने प्लास्टर किया और उसके दबाव में नश ब्लॉक हो गई। इसके चलते उसका पैर काटना पड़ा था। उसके दो बच्चे हैं। वह उन्हें समाज में सम्मान के साथ देखना चाहता था। उसने कृत्रिम अंग लगवाने का फैसला लिया और कंप्यूटर सीखा। वह अब सामान्य व्यक्ति की तरह सम्मान के साथ जीकर दिखाएगा।
ट्रेन से गिरकर कट गया था पैर
ईदगाह रोड पानीपत निवासी सुरेश पहलवान ने बताया कि वह 66 वर्ष के हैं। वह बचपन में परिवार के सदस्यों के साथ ट्रेन में जा रहे थे। असंध रोड फ्लाईओवर के समीप ट्रेन से गिर गए, जिसमें पैर कट गया। उनके दो बच्चे हैं। लोगों को देखकर अपने जीने का उद्देश्य बदलने का फैसला किया। कृत्रिम अंग लगवाने के बाद अब अपना छोटा मोटा काम करने का प्रयास रहेगा।