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Panipat News: घर पहुंचने की छटपटाहट में जोखिम उठा रहे ग्रामीण

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 03 Aug 2023 02:07 AM IST
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Villagers are taking risk in hurry to reach home
ट्यूब के सहारे घर जाते लोग।  - फोटो : panipat
सनौली। यमुना का जलस्तर घटने के 20 दिन बाद टापू पर बसे रहीमपुर खेड़ी गांव के लोग जान जोखिम में डालकर ट्यूब के सहारे नदी पार कर घर लौटने लगे हैं। गांव चारों ओर पानी से घिरा है। रहीमपुर खेड़ी गांव में लगभग 40 परिवार रहते हैं। इनमें से करीब 20 परिवार यमुना में ज्यादा पानी आने से पहले ही मिर्जापुर गांव आ गए थे और लगभग इतने ही परिवारों को नदी में ज्यादा पानी आने पर जिला प्रशासन ने नाव से बाहर निकाला था।
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रहीमपुर खेड़ी गांव के राजपाल, प्रेम, दिनेश, महाबीर, जनेश्वर, बलवान व सुरेश ने बताया कि उनका घरेलू सामान गांव में ही रह गया था। घरों में 20 दिन पहले बाढ़ आने से सामान खराब हो चुका है। प्रशासन ने उन्हें बाहर निकालकर तटबंध के बाहर मिर्जापुर गांव में छोड़ दिया था, लेकिन प्रशासन की तरफ से अब तक राशन आदि की कोई मदद नहीं मिली। मिर्जापुर गांव में अपने अन्य परिवारों के लोगों के सहारे रहते थे। उनके घरों में 20 दिनों तक रह रहे थे। टापू पर बसे गांव के पास उनकी 1100 बीघे जमीन है। उनकी फसल बर्बाद हो चुकी है। इससे पहले भी कई बार उनकी फसलें बाढ़ में खराब हुई हैं। उन्हें आज तक मुआवजा नहीं मिला। प्र‎शासन उनके गांव को यमुना के बांध के अंदर होने की बात कहकर मुआवजा नहीं देता है।
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गोयला कलां के सरपंच अनिल का कहना है कि रहीमपुर खेड़ी के लोगों की हरसंभव मदद की जा रही है। रहीमपुर खेड़ी यमुना के टापू में बसा है। इस गांव का करीब 1100 बीघा का रकबा है। किसानों की करीब 90 ‎प्र‎तिशत फसलें पानी में डूबने से खराब हो चुकी हैं। अब यमुना का जलस्तर कुछ कम होने पर किसान अपने घरों की ओर ट्यूब के सहारे लौटने लगे हैं। हालांकि अब भी गांव के चारों ओर बाढ़ का पानी बह रहा है।
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रहीमपुर खेड़ी गांव की फसल खराब होने पर बापौली के नायब तहसीलदार कैलाश चंद्र ने कहा कि यह गांव यमुना तटबंध के अंदर है और तटबंध के अंदर फसल खराब होने पर मुआवजे का प्रावधान नहीं है। लोगों से अपील है कि अपनी जान जोखिम में न डालें।
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