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Panipat News: पच्चीस फीसदी गर्भवती हाई रिस्क प्रैग्नेंसी के दायरे में, स्वास्थ्य विभाग चिंतित
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पानीपत। प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा अभियान के तहत सोमवार को जिले में भर के स्वास्थ्य केंद्रों पर लगे जांच शिविर की रिपोर्ट से स्वास्थ्य विभाग चिंतित है। गर्भवतियों का स्वास्थ्य बेहद खराब मिल रहा है। तमाम अभियान चलाने के बाद भी इसका सकारात्मक परिणाम नहीं आ रहा है। सोमवार को 15 स्वास्थ्य केंद्रों पर 19 डॉक्टरों ने 690 गर्भवतियों की जांच की। इनमें से 25 प्रतिशत यानि 172 गर्भवती हाई रिस्क डिलीवरी के दायरे में मिली है।
इन गर्भवतियों में बीपी, शुगर, एनीमिया समेत तमाम गंभीर दिक्कतें हैं। इन सभी को इलाज के लिए जिला नागरिक अस्पताल में रेफर किया गया है। इनका यहां पर डॉ. शशिलता, डॉ. मनी व डॉ. लिपिका इलाज करेंगी। शाम को सिविल सर्जन को अभियान की रिपोर्ट सौंप दी गई है। सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने रिपोर्ट देख डॉक्टरों को जननी सुरक्षित माह के तहत गंभीरता से काम करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। शिविर में गर्भवतियों को सरकारी अस्पताल की सेवाओं के बारे में भी जानकारी दी गई है।
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10 में से तीन बच्चे कम वजन के हो रहे पैदा
गर्भवती महिला अपने खान पान पर ध्यान नहीं दे रही हैं। इसलिए नवजात कम वजन के साथ पैदा हो रहे हैं। खान पान की कमी के कारण गर्भवती एनिमिया की भी शिकार हो रही हैं। हर दस डिलीवरी में औसतन तीन बच्चों का वजन 2200 ग्राम से कम मिल रहा है, जबकि औसतन जन्म लेने वाले बच्चे का जन्म 2400 ग्राम तक होना चाहिए। जिले की 60 प्रतिशत से अधिक गर्भवतियों में रक्त की कमी है। 20 प्रतिशत गर्भवतियों का वजन तो आठ ग्राम से भी कम है।
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सरकारी अस्पतालों में मिलती हैं ये सुविधाएं
1. सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में डिलिवरी कराने पर सरकार की ओर से गरीब परिवारों को 1500 रुपये की सहायता मिलती है।
2. जन्म के 42 दिन बाद तक नवजात व 30 दिन तक महिला को अस्पताल आने जाने के लिए फ्री एंबुलेंस की सुविधा है।
3. किसी भी आपातकाल की स्थिति में जच्चा की केयर के लिए गायनोकॉलॉजिस्ट व बच्चे के लिए बाल रोग विशेषज्ञ उपलब्ध हैं।
वर्जन :
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. शशि गर्ग ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग हर माह की नौ तारीख को मातृत्व शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा अभियान के तहत जांच शिविर लगाता है। महिलाओं को उनके स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जाता है। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य जच्चा बच्चा को बचाना व सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की सेवाएं बताना है।
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इन गर्भवतियों में बीपी, शुगर, एनीमिया समेत तमाम गंभीर दिक्कतें हैं। इन सभी को इलाज के लिए जिला नागरिक अस्पताल में रेफर किया गया है। इनका यहां पर डॉ. शशिलता, डॉ. मनी व डॉ. लिपिका इलाज करेंगी। शाम को सिविल सर्जन को अभियान की रिपोर्ट सौंप दी गई है। सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने रिपोर्ट देख डॉक्टरों को जननी सुरक्षित माह के तहत गंभीरता से काम करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। शिविर में गर्भवतियों को सरकारी अस्पताल की सेवाओं के बारे में भी जानकारी दी गई है।
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10 में से तीन बच्चे कम वजन के हो रहे पैदा
गर्भवती महिला अपने खान पान पर ध्यान नहीं दे रही हैं। इसलिए नवजात कम वजन के साथ पैदा हो रहे हैं। खान पान की कमी के कारण गर्भवती एनिमिया की भी शिकार हो रही हैं। हर दस डिलीवरी में औसतन तीन बच्चों का वजन 2200 ग्राम से कम मिल रहा है, जबकि औसतन जन्म लेने वाले बच्चे का जन्म 2400 ग्राम तक होना चाहिए। जिले की 60 प्रतिशत से अधिक गर्भवतियों में रक्त की कमी है। 20 प्रतिशत गर्भवतियों का वजन तो आठ ग्राम से भी कम है।
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सरकारी अस्पतालों में मिलती हैं ये सुविधाएं
1. सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में डिलिवरी कराने पर सरकार की ओर से गरीब परिवारों को 1500 रुपये की सहायता मिलती है।
2. जन्म के 42 दिन बाद तक नवजात व 30 दिन तक महिला को अस्पताल आने जाने के लिए फ्री एंबुलेंस की सुविधा है।
3. किसी भी आपातकाल की स्थिति में जच्चा की केयर के लिए गायनोकॉलॉजिस्ट व बच्चे के लिए बाल रोग विशेषज्ञ उपलब्ध हैं।
वर्जन :
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. शशि गर्ग ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग हर माह की नौ तारीख को मातृत्व शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा अभियान के तहत जांच शिविर लगाता है। महिलाओं को उनके स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जाता है। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य जच्चा बच्चा को बचाना व सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की सेवाएं बताना है।