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Panipat News: रेलवे स्टेशन पर कोच व वैगन केयर सेंटर की सीमित क्षमता के कारण ट्रेनों का वॉशिंग कार्य बंद
Thu, 29 Jan 2026 01:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Thu, 29 Jan 2026 01:51 AM IST
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पानीपत। रेलवे स्टेशन पर स्थित कोच व वैगन केयर सेंटर की सीमित क्षमता अब रेलवे संचालन और यात्रियों की सुविधाओं पर सीधा असर डालने लगी है। वर्तमान में इस केयर सेंटर की क्षमता सिर्फ 13 कोच की ट्रेनों की वॉशिंग तक सीमित है जबकि मौजूदा समय में अधिकतर मेल, एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनें 20 से 23 कोच की हो चुकी हैं। ऐसे में ट्रेनों की वॉशिंग न हो पाने के कारण साफ-सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
स्टेशन से होकर गुजरने वाली अधिकतर ट्रेनें वर्ष 2013 तक 12 से 13 कोच की होती थीं, उस समय कोच व वैगन केयर सेंटर की मौजूदा क्षमता पर्याप्त मानी जाती थी और नियमित रूप से ट्रेनों का वॉशिंग कार्य किया जाता था लेकिन यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी के साथ-साथ ट्रेनों में कोचों की संख्या भी लगातार बढ़ाई गई, इसके बावजूद वॉशिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार नहीं किया गया। यात्री योगेश और संजीव ने बताया कि ट्रेनों की नियमित सफाई होना बहुत जरूरी है। ट्रेनों की यदि नियमित सफाई नहीं होगी तो इससे गंदगी आर बीमारी बढ़ने का डर रहता है। कुछ ट्रेनों का हाल देखकर तो बैठने का भी मन नहीं करता इसीलिए ट्रेनों में साफ-सफाई रखना जरूरी है। सीडीओ रमेश शर्मा ने बताया कि वॉशिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को समय के साथ अपग्रेड नहीं गया है। 2013 के बाद रेलवे संचालन में काफी बदलाव आया है। ट्रेनों की लंबाई बढ़ी है, यात्रियों की संख्या भी कई गुना हो चुकी है लेकिन उसी अनुपात में केयर सेंटर की क्षमता नहीं बढ़ पाई।
यार्ड में खड़ी होने वाली ट्रेनों की सिर्फ साफ-सफाई का कार्य होता है। यहां वॉशिंग नहीं की जाती है। कई वर्षों पहले तो कम कोच वाली ट्रेनों की वॉशिंग का कार्य होता था। स्टेशन से ट्रेनें बनकर नहीं जाती हैं इसीलिए यहां ट्रेनों की वॉशिंग का काम नहीं होता। स्टेशन पर ट्रेनों का ठहराव का समय भी दो से पांच मिनट का होता है।
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-मुकेश, सीएमआई।
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स्टेशन से होकर गुजरने वाली अधिकतर ट्रेनें वर्ष 2013 तक 12 से 13 कोच की होती थीं, उस समय कोच व वैगन केयर सेंटर की मौजूदा क्षमता पर्याप्त मानी जाती थी और नियमित रूप से ट्रेनों का वॉशिंग कार्य किया जाता था लेकिन यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी के साथ-साथ ट्रेनों में कोचों की संख्या भी लगातार बढ़ाई गई, इसके बावजूद वॉशिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार नहीं किया गया। यात्री योगेश और संजीव ने बताया कि ट्रेनों की नियमित सफाई होना बहुत जरूरी है। ट्रेनों की यदि नियमित सफाई नहीं होगी तो इससे गंदगी आर बीमारी बढ़ने का डर रहता है। कुछ ट्रेनों का हाल देखकर तो बैठने का भी मन नहीं करता इसीलिए ट्रेनों में साफ-सफाई रखना जरूरी है। सीडीओ रमेश शर्मा ने बताया कि वॉशिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को समय के साथ अपग्रेड नहीं गया है। 2013 के बाद रेलवे संचालन में काफी बदलाव आया है। ट्रेनों की लंबाई बढ़ी है, यात्रियों की संख्या भी कई गुना हो चुकी है लेकिन उसी अनुपात में केयर सेंटर की क्षमता नहीं बढ़ पाई।
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यार्ड में खड़ी होने वाली ट्रेनों की सिर्फ साफ-सफाई का कार्य होता है। यहां वॉशिंग नहीं की जाती है। कई वर्षों पहले तो कम कोच वाली ट्रेनों की वॉशिंग का कार्य होता था। स्टेशन से ट्रेनें बनकर नहीं जाती हैं इसीलिए यहां ट्रेनों की वॉशिंग का काम नहीं होता। स्टेशन पर ट्रेनों का ठहराव का समय भी दो से पांच मिनट का होता है।
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-मुकेश, सीएमआई।