{"_id":"618c1e7abbe144420f36ce9e","slug":"topped-in-block-level-competition-without-coach-panipat-news-knl891861122","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिना कोच के खंड स्तरीय प्रतियोगिता में बने अव्वल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिना कोच के खंड स्तरीय प्रतियोगिता में बने अव्वल
विज्ञापन
पानीपत। रुद्रा
- फोटो : Panipat
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पानीपत। गांव सुताना के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले रितिक ने दूसरे के फोन में भाला फेंकने का वीडियो देखकर खेल सीखा और बिना कोच के खंड स्तरीय स्कूली खेल प्रतियोगिता में 46 मीटर भाला फेंककर स्वर्ण पदक जीतकर अपनी पहचान बनाई है। रितिक ने बताया कि उसके घर में किसी के पास भी स्मार्टफोन नहीं है, वह पड़ोसियों और अपने दोस्तों से मिलने पर कुछ देर के लिए फोन मांगकर भाला फेंकने का तरीका सीखा था। फिर शाम को मैदान में जाकर उसी तरह से भाला फेंककर अभ्यास करता था।
टूटे भाले से तीन महीने से कर रहा था अभ्यास
रितिक रोजाना टूटे हुए भाले से अभ्यास करता है। रितिक ने बताया कि एक साल पहले वह अपना पहला जैवलिन 800 रुपये का लेकर आया था, जो अभ्यास करते हुए टूट गया था। जिसके बाद से पिछले तीन महीने से रितिक टूटे हुए भाले से ही अभ्यास कर रहा था। रितिक ने बताया कि उसके पास पैसे नहीं है कि वह नया भाला लेकर अभ्यास कर सके। उन्होंने बताया कि 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की तैयारियों के साथ ही खेल का अभ्यास किया। पैसे न होने के कारण वह रोज चार किलोमीटर दूर पैदल ही स्कूल जाता है। लौटने पर पर अभ्यास करता है। खेल की तैयारी करने के लिए पढ़ाई का एक घंटा भी कम किया था।
आठ महीने पहले ही सीखा डिस्कस थ्रो, 35 मीटर दूर फेंककर जीता स्वर्ण
गांव ऊझा के रहने वाले रुद्र ने 35 मीटर डिस्कस थ्रो करके खंड स्तरीय स्कूली खेल प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उसके पिता संदीप ने बताया आठ महीने पहले ही उसने डिस्कस थ्रो सीखना शुरू किया था। ताऊ का लड़का प्रिंस ही रूद्र का कोच है। वह रोजाना पांच घंटे अभ्यास कराता है, जिसकी बदौलत रुद्र ने अपने पहले डिस्कस थ्रो मुकाबले में ही 35 मीटर दूर डिस्क फेंककर पदक हासिल किया। रुद्र ने 8 महीने पहले जब पहली बार डिस्कस थ्रो किया था, तब वह सिर्फ 18 मीटर दूर ही फेंक सका था। रुद्र का चचेरा भाई और उसका कोच प्रिंस डिस्कस थ्रो में नेशनल रिकॉर्ड होल्डर है।
विज्ञापन
विज्ञापन
टूटे भाले से तीन महीने से कर रहा था अभ्यास
रितिक रोजाना टूटे हुए भाले से अभ्यास करता है। रितिक ने बताया कि एक साल पहले वह अपना पहला जैवलिन 800 रुपये का लेकर आया था, जो अभ्यास करते हुए टूट गया था। जिसके बाद से पिछले तीन महीने से रितिक टूटे हुए भाले से ही अभ्यास कर रहा था। रितिक ने बताया कि उसके पास पैसे नहीं है कि वह नया भाला लेकर अभ्यास कर सके। उन्होंने बताया कि 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की तैयारियों के साथ ही खेल का अभ्यास किया। पैसे न होने के कारण वह रोज चार किलोमीटर दूर पैदल ही स्कूल जाता है। लौटने पर पर अभ्यास करता है। खेल की तैयारी करने के लिए पढ़ाई का एक घंटा भी कम किया था।
विज्ञापन
आठ महीने पहले ही सीखा डिस्कस थ्रो, 35 मीटर दूर फेंककर जीता स्वर्ण
गांव ऊझा के रहने वाले रुद्र ने 35 मीटर डिस्कस थ्रो करके खंड स्तरीय स्कूली खेल प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उसके पिता संदीप ने बताया आठ महीने पहले ही उसने डिस्कस थ्रो सीखना शुरू किया था। ताऊ का लड़का प्रिंस ही रूद्र का कोच है। वह रोजाना पांच घंटे अभ्यास कराता है, जिसकी बदौलत रुद्र ने अपने पहले डिस्कस थ्रो मुकाबले में ही 35 मीटर दूर डिस्क फेंककर पदक हासिल किया। रुद्र ने 8 महीने पहले जब पहली बार डिस्कस थ्रो किया था, तब वह सिर्फ 18 मीटर दूर ही फेंक सका था। रुद्र का चचेरा भाई और उसका कोच प्रिंस डिस्कस थ्रो में नेशनल रिकॉर्ड होल्डर है।

पानीपत। रितिक।- फोटो : Panipat
विज्ञापन