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पुस्तकों का कोई विकल्प नहीं : डॉ. अनुपम
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। एसडी पीजी कॉलेज में विश्व पुस्तक दिवस पर सेमिनार का ऑनलाइन आयोजन किया गया। अंग्रेजी साहित्य के महान नाटककार एवं कवि विलियम शेक्सपियर को याद किया गया। प्राचार्य डॉ. अनुपम अरोड़ा ने कहा कि बेशक आज इंटरनेट, ई-बुक ने पठन-पाठन के क्षेत्र में क्रांति ला दी है। फिर भी पुस्तकों का कोई विकल्प नहीं है।
उन्होंने कहा कि एक अच्छी किताब हमारे जीवन का सर्वोत्तम मित्र है और यह मित्र आज भी है और सदा के लिए भी हमारे साथ रहेगा। विश्व पुस्तक और कॉपीराइट दिवस पुस्तक पढ़ने की आदत को बढ़ाने के महत्वपूर्ण उद्देश्य से भी प्रेरित है। युवाओं को किताबों का महत्व समझना चाहिए। मोबाइल में केवल इंटरनेट होने पर ही पढ़ सकते हैं, जबकि किताब को किसी भी समय खोलकर पढ़ सकते हैं।
किताब पढ़ते समय व्यक्ति पर किसी प्रकार के दुष्प्रभाव नहीं पड़ते, जबकि लंबे समय तक मोबाइल का प्रयोग करने से आंखों में दर्द होने के साथ व्यक्ति मानसिक रूप से भी परेशान होने लगता है। वह एक स्टेज पर आकर इन सबको छोड़ देता है। ऐसे में युवाओं को अपनी आदत में कुछ बदलाव करना चाहिए। अंग्रेजी विभाग की अध्यक्ष प्रो. अन्नू आहूजा समन्वयक रही। इसमें 250 विद्यार्थी शामिल हुए। इस अवसर पर अन्नू आहूजा, डॉ. मोनिका खुराना, डॉ. एसके वर्मा, डॉ. संतोष कुमारी, डॉ. मोनिका खुराना, प्रो. वीरेंद्र गिल, प्रो. डेनसन डी पॉल, प्रो. सन्नी भुक्कर, प्रो. मानवी, प्रो. दीप्ति शर्मा, प्रो. मणि, प्रो. प्रीति महला, प्रो. सुरभि आदि मौजूद रही।
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पानीपत। एसडी पीजी कॉलेज में विश्व पुस्तक दिवस पर सेमिनार का ऑनलाइन आयोजन किया गया। अंग्रेजी साहित्य के महान नाटककार एवं कवि विलियम शेक्सपियर को याद किया गया। प्राचार्य डॉ. अनुपम अरोड़ा ने कहा कि बेशक आज इंटरनेट, ई-बुक ने पठन-पाठन के क्षेत्र में क्रांति ला दी है। फिर भी पुस्तकों का कोई विकल्प नहीं है।
उन्होंने कहा कि एक अच्छी किताब हमारे जीवन का सर्वोत्तम मित्र है और यह मित्र आज भी है और सदा के लिए भी हमारे साथ रहेगा। विश्व पुस्तक और कॉपीराइट दिवस पुस्तक पढ़ने की आदत को बढ़ाने के महत्वपूर्ण उद्देश्य से भी प्रेरित है। युवाओं को किताबों का महत्व समझना चाहिए। मोबाइल में केवल इंटरनेट होने पर ही पढ़ सकते हैं, जबकि किताब को किसी भी समय खोलकर पढ़ सकते हैं।
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किताब पढ़ते समय व्यक्ति पर किसी प्रकार के दुष्प्रभाव नहीं पड़ते, जबकि लंबे समय तक मोबाइल का प्रयोग करने से आंखों में दर्द होने के साथ व्यक्ति मानसिक रूप से भी परेशान होने लगता है। वह एक स्टेज पर आकर इन सबको छोड़ देता है। ऐसे में युवाओं को अपनी आदत में कुछ बदलाव करना चाहिए। अंग्रेजी विभाग की अध्यक्ष प्रो. अन्नू आहूजा समन्वयक रही। इसमें 250 विद्यार्थी शामिल हुए। इस अवसर पर अन्नू आहूजा, डॉ. मोनिका खुराना, डॉ. एसके वर्मा, डॉ. संतोष कुमारी, डॉ. मोनिका खुराना, प्रो. वीरेंद्र गिल, प्रो. डेनसन डी पॉल, प्रो. सन्नी भुक्कर, प्रो. मानवी, प्रो. दीप्ति शर्मा, प्रो. मणि, प्रो. प्रीति महला, प्रो. सुरभि आदि मौजूद रही।
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