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किसानों में जागरुकता से पराली जलाने में आई कमी
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कृषि विज्ञान केंद्र ऊझा में कृषि विज्ञान केंद्र पानीपत का 28वां स्थापना दिवस मनाया गया, इस मौके कि?
- फोटो : Panipat
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पानीपत। कृषि विज्ञान केंद्र ऊझा में कृषि विज्ञान केंद्र पानीपत का 28वां स्थापना दिवस मनाया गया। इस अवसर पर पानीपत जिले के विभिन्न गावों के 125 किसानों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम का मुख्य शीर्षक जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान रहा। इस मौके पर केंद्र के वरिष्ठ संयोजक डॉ. राजबीर गर्ग ने बताया कि किसानों में जागरुकता के चलते पराली जलाने के मामलों में गिरावट दर्ज की गई है।
उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र की मुख्य गतिविधियों पर चर्चा करते हुए बताया कि केंद्र सरकार ने फसल अवशेष प्रबंधन पर वर्ष 2012-13 में ही कार्य करना शुरू कर दिया था। इसके परिणाम स्वरूप पराली जलाने के मामले कम हुए हैं। इसके अतिरिक्त कृषि विज्ञान केंद्र महिला उत्थान के लिए भी सराहनीय कार्य रहा है। डॉ. गर्ग ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र समय-समय पर किसानों की आवश्यकता अनुसार फसल अवशेष प्रबंधन, खरपतवार नियंत्रण, कीडे़ व बीमारियों की रोकथाम व फसलों में एकीकृत पोषण प्रबंधन इत्यादि शोध कार्य भी करता रहा है।
आर्थिक सशक्तीकरण में आगे आई महिलाएं
डॉ. गर्ग ने बताया कि हर वर्ष केंद्र की ओर से महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा डेयरी फार्मिंग, मशरूम उत्पादन, फल व सब्जी परीक्षण, मधुमक्खी पालन, वर्मी कंपोस्ट इत्यादि विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कुछ महिलाओं ने इन कार्यों को आगे बढ़ाया है और अपनी आजीविका के साधनों में वृद्धि की है।
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बीज उत्पादन में भी अग्रणी भूमिका
कृषि विज्ञान केंद्र की बीज उत्पादन में भी अग्रणी भूमिका रही है। केंद्र की स्थापना से लेकर अब तक तक धान व गेहूं का लगभग 10000 क्विंटल बीज उत्पादन कर चुका है। इस अवसर पर डॉ. सतपाल सिंह ने सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, मेरा पानी मेरी विरासत, मेरी फसल मेरा ब्योरा आदि स्कीमों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा काफी कम
डॉ. सतपाल ने बताया कि हमारी मिट्टी में इस समय जैविक कार्बन की मात्रा काफी कम है जिसके कारण मृदा के स्वास्थ्य व उत्पादन क्षमता में गिरावट आई है। यह समय की मांग है कि हम मिट्टी में फसल अवशेषों को जलाने की बजाए उसका प्रबंधन करें। मिट्टी की जांच के आधार पर ही पोषक तत्वों का प्रयोग करें। कार्यक्रम के अंत में उन्होने सभी किसानों का कार्यक्रम में भाग लेने के लिए धन्यवाद किया।
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उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र की मुख्य गतिविधियों पर चर्चा करते हुए बताया कि केंद्र सरकार ने फसल अवशेष प्रबंधन पर वर्ष 2012-13 में ही कार्य करना शुरू कर दिया था। इसके परिणाम स्वरूप पराली जलाने के मामले कम हुए हैं। इसके अतिरिक्त कृषि विज्ञान केंद्र महिला उत्थान के लिए भी सराहनीय कार्य रहा है। डॉ. गर्ग ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र समय-समय पर किसानों की आवश्यकता अनुसार फसल अवशेष प्रबंधन, खरपतवार नियंत्रण, कीडे़ व बीमारियों की रोकथाम व फसलों में एकीकृत पोषण प्रबंधन इत्यादि शोध कार्य भी करता रहा है।
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आर्थिक सशक्तीकरण में आगे आई महिलाएं
डॉ. गर्ग ने बताया कि हर वर्ष केंद्र की ओर से महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा डेयरी फार्मिंग, मशरूम उत्पादन, फल व सब्जी परीक्षण, मधुमक्खी पालन, वर्मी कंपोस्ट इत्यादि विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कुछ महिलाओं ने इन कार्यों को आगे बढ़ाया है और अपनी आजीविका के साधनों में वृद्धि की है।
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बीज उत्पादन में भी अग्रणी भूमिका
कृषि विज्ञान केंद्र की बीज उत्पादन में भी अग्रणी भूमिका रही है। केंद्र की स्थापना से लेकर अब तक तक धान व गेहूं का लगभग 10000 क्विंटल बीज उत्पादन कर चुका है। इस अवसर पर डॉ. सतपाल सिंह ने सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, मेरा पानी मेरी विरासत, मेरी फसल मेरा ब्योरा आदि स्कीमों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा काफी कम
डॉ. सतपाल ने बताया कि हमारी मिट्टी में इस समय जैविक कार्बन की मात्रा काफी कम है जिसके कारण मृदा के स्वास्थ्य व उत्पादन क्षमता में गिरावट आई है। यह समय की मांग है कि हम मिट्टी में फसल अवशेषों को जलाने की बजाए उसका प्रबंधन करें। मिट्टी की जांच के आधार पर ही पोषक तत्वों का प्रयोग करें। कार्यक्रम के अंत में उन्होने सभी किसानों का कार्यक्रम में भाग लेने के लिए धन्यवाद किया।
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कृषि विज्ञान केंद्र ऊझा में कृषि विज्ञान केंद्र पानीपत का 28वां स्थापना दिवस मनाया गया, इस मौके पर - फोटो : Panipat