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Panipat News: बचपन में चोर-पुलिस के खेल से देशसेवा जज्बा पैदा हुआ, एसएसबी के पहले प्रयास में लेफ्टिनेंट बने

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 14 Sep 2023 02:18 AM IST
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The spirit of service to the country was born from the game of thief and police in childhood, became lieutenant in the first attempt of SSB.
पानीपत। शहीद मेजर आशीष धौंचक बचपन में अपने दोस्तों के साथ चोर पुलिस का खेल खेलते थे। वे हर बार पुलिस का अभिनय करते थे। इसी बीच उनके मन में देशसेवा का जज्बा पैदा हुआ। उन्होंने 2013 में पहले ही प्रयास में एसएसबी की परीक्षा पास की और लेफ्टिनेंट बने।
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आशीष की अब तक की सर्विस बठिंडा, मेरठ और जम्मू कश्मीर में रही है। उनका दो साल पहले ही मेरठ से जम्मू कश्मीर तबादला हुआ था। आशीष धौंचक को 23 अक्तूबर को अपने जन्मदिन पर टीडीआई में नए घर में प्रवेश करना था।
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ग्रामीणों ने बताया कि शहीद मेजर आशीष धौंचक के पिता लालचंद पानीपत स्थित नेशनल फर्टिलाइजर लिमिटेड में नौकरी करते थे। वे मूलरूप से शहर से सटे गांव बिंझौल के निवासी हैं। लालचंद परिवार समेत गांव में ही रहते थे। शहीद मेजर आशीष धौंचक और उनकी तीनों बहनें गांव में ही रहती थीं। लालचंद ने बच्चों की शिक्षा को देखते हुए एनएफएल में क्वार्टर ले लिया। उनकी शिक्षा गांव और शहर के स्कूल में हुई। 2013 में आशीष धौंचक लेफ्टिनेंट बने तो परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। लालचंद ने दो साल पहले सेवानिवृत्ति के बाद सेक्टर-7 में किराये पर रहना शुरू कर दिया। वे यहां तीसरी मंजिल पर रहते हैं। इस बीच उन्होंने टीडीआई में अपना प्लॉट ले लिया और यहां मकान बनाना शुरू कर दिया। परिजनों ने बताया कि मकान बनकर तैयार है। मेजर आशीष धौंचक को 23 अक्तूबर को जन्मदिन पर परिवार के सदस्य गृह प्रवेश की तैयारी में थे। उन्हें अक्तूबर में छुट्टी आना था। मां कमला देवी, पत्नी ज्योति और तीनों बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
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परिजनों ने बताया कि शहीद मेहर आशीष धौंचक का दो साल पहले मेरठ से जम्मू कश्मीर तबादला हुआ था। तब उनकी पत्नी ज्योति और चार साल की बेटी वामिका उनके साथ ही रहते थे। उन्होंने देश सेवा के रास्ते में परिवार का मोह न आने देने की सोच के साथ पत्नी ज्योति और बेटी वामिका को अपने माता-पिता के पास सेक्टर-7 में छोड़ गए थे। वे पिछले दिनों छुट्टी पर आए थे तो वामिका का शहर के एक बड़े स्कूल में दाखिला कराया था। वे समय लगते ही अपने माता-पिता, पत्नी और बेटी से फोन पर बात करते थे। वे उनसे मकान के निर्माण को लेकर अधिकतर चर्चा करते थे।
परिजनों ने बताया कि शहीद मेजर आशीष धौंचक पढ़ाई के साथ खेलों में भी अव्वल थे। वह स्कूल समय में बैडमिंटन के अच्छे खिलाड़ी थे। उनको घर बाहर की साफ सफाई पसंद थी। उन्होंने अपने किराये के मकान में दीवारों पर फोटो तक नहीं लगा रखी थी। वे सादा जीवन जीते थे। टीडीआई में भी अपने सपनों का मकान बनाने में लगे थे।
पानीपत के मेजर आशीष धौंचक के जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में शहीद होने की सूचना मिली है। प्रशासन शहीद के परिवार के साथ है। उनका राजकीय सम्मान के साथ संस्कार किया जाएगा।


- डॉ. वीरेंद्र कुमार दहिया, उपायुक्त।
मेजर आशीष धौंचक जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों के साथ लड़ते हुए शहीद हुए हैं। एक फौजी और पुलिस का जवान देशसेवा के लिए अपनी कुर्बानी देने के लिए हर समय तैयार रहता है। हमें शहीद मेजर आशीष धौंचक व उनके परिवार पर गर्व है।
- अजीत सिंह शेखावत, एसपी।
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