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Panipat News: 25 साल पहले जगदीश के बिना हाथ लगाए 18 घंटे तक कान हिलाने का रिकॉर्ड बरकरार
Sun, 28 Jun 2026 02:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Sun, 28 Jun 2026 02:26 AM IST
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रिकॉर्ड दिखाते जगदीश मलिक। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
समालखा-पानीपत। कहते हैं कि हुनर अनोखा हो और उसे निरंतर अभ्यास से तराशा जाए तो वह इतिहास रच देता है। समालखा के जगदीश मलिक ने भी अपने इसी असाधारण हुनर के दम पर एक अनोखी पहचान बनाई है। उन्होंने बिना हाथ लगाए दोनों कानों को लगातार हिलाकर बनाए गए अपने रिकॉर्ड के 25 वर्ष पूरे होने पर सिल्वर जुबली मनाई।
जगदीश मलिक ने बताया कि 25 जून 2001 को समालखा की अनाज मंडी स्थित एसडीएम कार्यालय में उन्होंने यह कीर्तिमान स्थापित किया था। उस समय तत्कालीन एसडीएम बिजेंद्र सिंह की मौजूदगी में उन्होंने लगातार 18 घंटे तक बिना हाथ लगाए अपने दोनों कान हिलाकर सभी को हैरत में डाल दिया था। इस उपलब्धि ने उन्हें देशभर में अलग पहचान दिलाई और उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया।
उन्होंने बताया कि इस उपलब्धि के पीछे वर्षों की निरंतर मेहनत, अनुशासन और नियमित ध्यान (मेडिटेशन) का बड़ा योगदान रहा है। उनका कहना है कि इस तरह के रिकॉर्ड के लिए गहरी एकाग्रता और आत्मनियंत्रण आवश्यक है।
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31 देशों के संगठन से मिली मानद डॉक्टरेट
जगदीश मलिक ने बताया कि उनके इस रिकॉर्ड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है। 31 देशों से जुड़े एक संगठन ने उन्हें 25 दिसंबर 2025 को दिल्ली के सिरी फोर्ट ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया था। उन्होंने कहा कि उनका यह सफर अभी जारी है और वे भविष्य में इससे भी बड़ा नया कीर्तिमान स्थापित करने की तैयारी में जुटे हैं।
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समालखा-पानीपत। कहते हैं कि हुनर अनोखा हो और उसे निरंतर अभ्यास से तराशा जाए तो वह इतिहास रच देता है। समालखा के जगदीश मलिक ने भी अपने इसी असाधारण हुनर के दम पर एक अनोखी पहचान बनाई है। उन्होंने बिना हाथ लगाए दोनों कानों को लगातार हिलाकर बनाए गए अपने रिकॉर्ड के 25 वर्ष पूरे होने पर सिल्वर जुबली मनाई।
जगदीश मलिक ने बताया कि 25 जून 2001 को समालखा की अनाज मंडी स्थित एसडीएम कार्यालय में उन्होंने यह कीर्तिमान स्थापित किया था। उस समय तत्कालीन एसडीएम बिजेंद्र सिंह की मौजूदगी में उन्होंने लगातार 18 घंटे तक बिना हाथ लगाए अपने दोनों कान हिलाकर सभी को हैरत में डाल दिया था। इस उपलब्धि ने उन्हें देशभर में अलग पहचान दिलाई और उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया।
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उन्होंने बताया कि इस उपलब्धि के पीछे वर्षों की निरंतर मेहनत, अनुशासन और नियमित ध्यान (मेडिटेशन) का बड़ा योगदान रहा है। उनका कहना है कि इस तरह के रिकॉर्ड के लिए गहरी एकाग्रता और आत्मनियंत्रण आवश्यक है।
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31 देशों के संगठन से मिली मानद डॉक्टरेट
जगदीश मलिक ने बताया कि उनके इस रिकॉर्ड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है। 31 देशों से जुड़े एक संगठन ने उन्हें 25 दिसंबर 2025 को दिल्ली के सिरी फोर्ट ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया था। उन्होंने कहा कि उनका यह सफर अभी जारी है और वे भविष्य में इससे भी बड़ा नया कीर्तिमान स्थापित करने की तैयारी में जुटे हैं।