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330 रुपये किलोग्राम पहुंचा रुई का रेट, निर्यात प्रभावित
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पानीपत। पिछले छह माह में रुई के दाम 120 रुपये से बढ़कर 330 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गये हैं। इस कारण धागा (यार्न) भी बहुत महंगा हो गया है, जिसका सीधा असर कपड़ा उद्योगों पर पड़ रहा है। ऐसे में टेक्सटाइल नगरी को विदेशों से मिलने वाले आर्डर कैंसल हो रहे हैं और करोड़ों का नुकसान हो रहा है। पानीपत के निर्यात में इस साल 40 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है।
वर्ष 2021 में पानीपत से धागा निर्यात 20 हजार करोड़ तक पहुंच गया था, जबकि इस साल 12 हजार करोड़ पर ही अटक सकता है। धागे के बढ़े दामों से जिले के उद्योग को सीधा आठ हजार करोड़ का नुकसान हो रहा है। यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध तथा दामों में हुई बेतहाशा वृद्धि के कारण यूरोपियन देशों के खरीदार माल को पांच-छह माह बाद भेजने के लिए ई-मेल कर रहे हैं। इससे स्थानीय निर्यातक काफी परेशान हैं। विदित हो कि वर्ष 2020 में इटली को पछाड़कर पानीपत रंगीन धागे के उत्पादन में पहले स्थान पर पहुंचा था। रोज 20 लाख किलोग्राम धागे के उत्पादन में भी 20 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई है। पिछले वर्ष नवंबर में रुई के दाम 120 रुपये किलोग्राम थे, जो छह महीने बाद 330 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुका है।
कपास के दामों में रिकॉर्ड तेजी है, इसलिए बढ़े दाम : ललित
इस वर्ष रुई के दामों में रिकॉर्ड तोड़ तेजी देखी जा रही है। पहली बार रुई के दाम 330 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गए हैं। रुई महंगी होने से कॉटन यार्न महंगा पड़ रहा है। आए दिन कॉटन यार्न के दाम में बढ़ोतरी हो रही है। कॉटन यार्न के दाम तेज होने से टेक्सटाइल निर्यात प्रभावित हो रहा है। आने वाले चार-पांच महीनों में क्या स्थिति बनती है, इस पर निर्यातकों की नजर लगी है।
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- ललित गोयल, प्रधान, एक्सपोर्टर एसोसिएशन
यार्न के भाव लगातार बढ़ रहे हैं : प्रीतम
रुई के दाम बहुत अधिक बढ़ गए हैं, इसलिए धागा भी बहुत महंगा हो गया है। इसका सीधा असर निर्यात पर पड़ा है। खरीदार माल मंगवाने में भी आनाकानी कर रहे हैं। पिछले साल निर्यात काफी बढ़ा था, जबकि इस बार कमी दर्ज की गई है। अब पुराने ऑर्डर की डिलीवरी के बाद ही नए ऑर्डर मिलेंगे।
- प्रीतम सचदेवा, प्रधान, पानीपत इंडस्ट्रियल एसोसिएशन
चीन का बहिष्कार करने से पानीपत के उद्योग को मिला था लाभ
पिछले पांच साल में निर्यात आठ हजार करोड़ रुपये बढ़ गया था। कोरोना में अमेरिका और यूरोपीय देशों ने चीन का बहिष्कार कर दिया था। ऐसे में चीन को मिलने वाले ऑर्डर पानीपत के उद्यमियों को मिले थे। इससे पानीपत का निर्यात 2021 में 20 हजार करोड़ तक पहुंच गया था, जबकि 2018 में पानीपत का निर्यात 12 हजार करोड़ का था।
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वर्ष 2021 में पानीपत से धागा निर्यात 20 हजार करोड़ तक पहुंच गया था, जबकि इस साल 12 हजार करोड़ पर ही अटक सकता है। धागे के बढ़े दामों से जिले के उद्योग को सीधा आठ हजार करोड़ का नुकसान हो रहा है। यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध तथा दामों में हुई बेतहाशा वृद्धि के कारण यूरोपियन देशों के खरीदार माल को पांच-छह माह बाद भेजने के लिए ई-मेल कर रहे हैं। इससे स्थानीय निर्यातक काफी परेशान हैं। विदित हो कि वर्ष 2020 में इटली को पछाड़कर पानीपत रंगीन धागे के उत्पादन में पहले स्थान पर पहुंचा था। रोज 20 लाख किलोग्राम धागे के उत्पादन में भी 20 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई है। पिछले वर्ष नवंबर में रुई के दाम 120 रुपये किलोग्राम थे, जो छह महीने बाद 330 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुका है।
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कपास के दामों में रिकॉर्ड तेजी है, इसलिए बढ़े दाम : ललित
इस वर्ष रुई के दामों में रिकॉर्ड तोड़ तेजी देखी जा रही है। पहली बार रुई के दाम 330 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गए हैं। रुई महंगी होने से कॉटन यार्न महंगा पड़ रहा है। आए दिन कॉटन यार्न के दाम में बढ़ोतरी हो रही है। कॉटन यार्न के दाम तेज होने से टेक्सटाइल निर्यात प्रभावित हो रहा है। आने वाले चार-पांच महीनों में क्या स्थिति बनती है, इस पर निर्यातकों की नजर लगी है।
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- ललित गोयल, प्रधान, एक्सपोर्टर एसोसिएशन
यार्न के भाव लगातार बढ़ रहे हैं : प्रीतम
रुई के दाम बहुत अधिक बढ़ गए हैं, इसलिए धागा भी बहुत महंगा हो गया है। इसका सीधा असर निर्यात पर पड़ा है। खरीदार माल मंगवाने में भी आनाकानी कर रहे हैं। पिछले साल निर्यात काफी बढ़ा था, जबकि इस बार कमी दर्ज की गई है। अब पुराने ऑर्डर की डिलीवरी के बाद ही नए ऑर्डर मिलेंगे।
- प्रीतम सचदेवा, प्रधान, पानीपत इंडस्ट्रियल एसोसिएशन
चीन का बहिष्कार करने से पानीपत के उद्योग को मिला था लाभ
पिछले पांच साल में निर्यात आठ हजार करोड़ रुपये बढ़ गया था। कोरोना में अमेरिका और यूरोपीय देशों ने चीन का बहिष्कार कर दिया था। ऐसे में चीन को मिलने वाले ऑर्डर पानीपत के उद्यमियों को मिले थे। इससे पानीपत का निर्यात 2021 में 20 हजार करोड़ तक पहुंच गया था, जबकि 2018 में पानीपत का निर्यात 12 हजार करोड़ का था।