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31 जून तक शिफ्ट होगी पुरानी मिल, हुडा को जमीन समेत बेचेंगे मशीन
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पानीपत। गांव डाहर स्थित नई शुगर मिल चालू हो चुकी है, इसलिए गोहाना रोड स्थित पुरानी मिल को बंद कर दिया गया है। अब इस पुरानी को शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है। 31 जून तक नेशनल फेडरेशन की टीम मिल की जमीन और मशीनरी का आकलन करेगी और इसे एचएसवीपी को बेच देगी। पुरानी मिल से सिर्फ दफ्तर और कागजात ही नई मिल में जाएंगे। वहीं, मिल के स्टॉक में रखे शीरे और चीनी को मिल प्रबंधन ने प्राथमिकता से बेचना शुरू कर दिया है ताकि शिफ्ट होने से पहले स्टॉक को खाली किया जा सके।
वहीं, पुरानी मिल की करीब 70 एकड़ जमीन में एचएसवीपी की ओर से प्लाटिंग की जाएगी या शहर की गुणवत्ता सुधार के लिए यहां जंगल बनाया जाएगा, यह अभी तय नहीं है। शहरवासी चाहते हैं कि इस जमीन पर जंगल बने ताकि शहर की वायु गुणवत्ता में सुधार हो सके। वहीं, सरकार चाहती है कि इस जमीन पर एचएसवीपी की ओर से प्लाटिंग की जाए ताकि राजस्व बढ़े। इस जमीन पर जंगल बनाने के लिए शहरवासियों ने सरकार को अपने सुझाव देने शुरू कर दिए हैं। शहरवासी चाहते हैं कि यहां जंगल बने। ताकि शहर की प्रदूषित हवा से लोगों को राहत मिले।
पुुरानी शुगर मिल करीब 50 वर्ष पुरानी है। इस मिल में वर्षों पुराने पेड़-पौधे लगे हैं। इन पेड़ों पर सैकड़ों जीव जंतु रहते हैं। यहां मोर भी हैं, जो कई बार बारिश के मौसम में नाचते तक देखे जा सकते हैं। अगर यहां हुडा की ओर से प्लाटिंग की जाती है तो इन पक्षियों को अपना ठिकाना छोड़ना होगा। जो फिर कभी नहीं दिखेंगे।
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नई शुगर मिल के उद्घाटन के समय सीएम मनोहर लाल ने घोषण की थी कि इस जमीन में से करीब 35 एकड़ में एचएसवीपी की ओर से प्लाटिंग की जाएगी। बाकी 35 एकड़ जमीन पर पार्क बनाएं जाएंगे। शुगर मिल शिफ्ट होने के बाद इस जमीन को एचएसवीपी को देगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई शुरू होगी।
हमारा काम शिफ्टिंग का, फैसला सरकार का : एमडी
शुगर मिल एमडी नवदीप सिंह बताते हैं कि उनका काम केवल शुगर मिल शिफ्ट करने तक का है। इसके बाद इस जमीन पर प्लाटिंग होगी या एचएसवीपी की ओर से सेक्टर काटे जाएंगे, यह फैसला सरकार करेगी।
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वहीं, पुरानी मिल की करीब 70 एकड़ जमीन में एचएसवीपी की ओर से प्लाटिंग की जाएगी या शहर की गुणवत्ता सुधार के लिए यहां जंगल बनाया जाएगा, यह अभी तय नहीं है। शहरवासी चाहते हैं कि इस जमीन पर जंगल बने ताकि शहर की वायु गुणवत्ता में सुधार हो सके। वहीं, सरकार चाहती है कि इस जमीन पर एचएसवीपी की ओर से प्लाटिंग की जाए ताकि राजस्व बढ़े। इस जमीन पर जंगल बनाने के लिए शहरवासियों ने सरकार को अपने सुझाव देने शुरू कर दिए हैं। शहरवासी चाहते हैं कि यहां जंगल बने। ताकि शहर की प्रदूषित हवा से लोगों को राहत मिले।
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पुुरानी शुगर मिल करीब 50 वर्ष पुरानी है। इस मिल में वर्षों पुराने पेड़-पौधे लगे हैं। इन पेड़ों पर सैकड़ों जीव जंतु रहते हैं। यहां मोर भी हैं, जो कई बार बारिश के मौसम में नाचते तक देखे जा सकते हैं। अगर यहां हुडा की ओर से प्लाटिंग की जाती है तो इन पक्षियों को अपना ठिकाना छोड़ना होगा। जो फिर कभी नहीं दिखेंगे।
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नई शुगर मिल के उद्घाटन के समय सीएम मनोहर लाल ने घोषण की थी कि इस जमीन में से करीब 35 एकड़ में एचएसवीपी की ओर से प्लाटिंग की जाएगी। बाकी 35 एकड़ जमीन पर पार्क बनाएं जाएंगे। शुगर मिल शिफ्ट होने के बाद इस जमीन को एचएसवीपी को देगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई शुरू होगी।
हमारा काम शिफ्टिंग का, फैसला सरकार का : एमडी
शुगर मिल एमडी नवदीप सिंह बताते हैं कि उनका काम केवल शुगर मिल शिफ्ट करने तक का है। इसके बाद इस जमीन पर प्लाटिंग होगी या एचएसवीपी की ओर से सेक्टर काटे जाएंगे, यह फैसला सरकार करेगी।