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Panipat News: चुलकाना धाम में गूंजा कर्म और धर्म का संदेश
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चुलकाना धाम में आयोजित कथा में प्रवचन करते स्वामी रामदास हितैषी। संवाद
- फोटो : samvad
संवाद न्यूज एजेंसी
समालखा। चुलकाना धाम स्थित श्री श्याम बाबा मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत गीता सार कथा के दूसरे दिन कथावाचक स्वामी रामदास हितैषी ने श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण के गीता उपदेश समझाते हुए कर्म और धर्म का संदेश दिया।
कथावाचक स्वामी रामदास हितैषी ने कहा कि कुरुक्षेत्र की पावन भूमि पर ज्योतिसर वह स्थान है, जहां युद्ध शुरू होने से पहले भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था।
उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने पांडव कुल के दो योद्धाओं को अपने विराट स्वरूप के दर्शन कराए थे। अर्जुन को ज्योतिसर में युद्ध से ठीक पहले और वीर बर्बरीक को चुलकाना धाम की पावन धरती पर शीश दान से पूर्व विराट स्वरूप के दर्शन कराए गए। कथा के दौरान स्वामी श्रीरामदास हितैषी ने चुलकाना धाम की सतयुगी महिमा का भी विस्तार से वर्णन किया।
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उन्होंने श्री चुनकट ऋषि महाराज के तपोबल व चकवा बैन सूर्यवंशी राजा की शक्ति का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि राजा अपनी 72 अक्षौहिणी सेना और राजधानी तक गंवा बैठे, लेकिन एक ऋषि के तपोबल के सामने कुछ समय तक भी टिक नहीं सके। उन्होंने चुलकाना धाम की पौराणिक मान्यताओं से जुड़े प्रसंगों को श्रद्धालुओं के समक्ष रखा।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा था कि संसार में सब कुछ उनके अधीन है। इसलिए मनुष्य को अपने धर्म और कर्तव्य पर ध्यान केंद्रित करते हुए कर्म करना चाहिए। धर्मयुद्ध आवश्यक है तो उससे पीछे नहीं हटना चाहिए। परिणाम का निर्णय मनुष्य के हाथ में नहीं है, इसलिए उसे अपने कर्तव्य का पालन पूरी निष्ठा से करना चाहिए।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि कलानौर की विधायक शकुंतला खटक रहीं। उन्होंने चुलकाना धाम में विराजमान भगवान श्री श्याम बाबा के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। सरपंच सतीश छोक्कर ने विधायक को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।
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समालखा। चुलकाना धाम स्थित श्री श्याम बाबा मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत गीता सार कथा के दूसरे दिन कथावाचक स्वामी रामदास हितैषी ने श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण के गीता उपदेश समझाते हुए कर्म और धर्म का संदेश दिया।
कथावाचक स्वामी रामदास हितैषी ने कहा कि कुरुक्षेत्र की पावन भूमि पर ज्योतिसर वह स्थान है, जहां युद्ध शुरू होने से पहले भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था।
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उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने पांडव कुल के दो योद्धाओं को अपने विराट स्वरूप के दर्शन कराए थे। अर्जुन को ज्योतिसर में युद्ध से ठीक पहले और वीर बर्बरीक को चुलकाना धाम की पावन धरती पर शीश दान से पूर्व विराट स्वरूप के दर्शन कराए गए। कथा के दौरान स्वामी श्रीरामदास हितैषी ने चुलकाना धाम की सतयुगी महिमा का भी विस्तार से वर्णन किया।
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उन्होंने श्री चुनकट ऋषि महाराज के तपोबल व चकवा बैन सूर्यवंशी राजा की शक्ति का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि राजा अपनी 72 अक्षौहिणी सेना और राजधानी तक गंवा बैठे, लेकिन एक ऋषि के तपोबल के सामने कुछ समय तक भी टिक नहीं सके। उन्होंने चुलकाना धाम की पौराणिक मान्यताओं से जुड़े प्रसंगों को श्रद्धालुओं के समक्ष रखा।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा था कि संसार में सब कुछ उनके अधीन है। इसलिए मनुष्य को अपने धर्म और कर्तव्य पर ध्यान केंद्रित करते हुए कर्म करना चाहिए। धर्मयुद्ध आवश्यक है तो उससे पीछे नहीं हटना चाहिए। परिणाम का निर्णय मनुष्य के हाथ में नहीं है, इसलिए उसे अपने कर्तव्य का पालन पूरी निष्ठा से करना चाहिए।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि कलानौर की विधायक शकुंतला खटक रहीं। उन्होंने चुलकाना धाम में विराजमान भगवान श्री श्याम बाबा के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। सरपंच सतीश छोक्कर ने विधायक को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।

चुलकाना धाम में आयोजित कथा में प्रवचन करते स्वामी रामदास हितैषी। संवाद- फोटो : samvad