{"_id":"687eb0f3f793e57fa80e2038","slug":"the-life-of-a-saint-is-synonymous-with-the-contemporary-arun-chandra-panipat-news-c-244-1-pnp1007-140679-2025-07-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"साधु का जीवन स्वयं सामयिक का पर्याय : अरुण चंद्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
साधु का जीवन स्वयं सामयिक का पर्याय : अरुण चंद्र
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। अग्रवाल मंडी स्थित जैन स्थानक में सुदर्शन लाल महाराज के शिष्य अरुण चंद्र महाराज चातुर्मास पर सानंद विराजमान हैं। सोमवार को महाराज ने प्रवचन में सामयिक आत्मा की प्रयोगशाला के बारे में बताया। अरुण मुनि महाराज ने बताया कि भगवान महावीर की साधना का मूल संदेश अंतर्मुखी आराधना है। शरीर को सशक्त बनाना आवश्यक है लेकिन आत्मा को सशक्त बनाना उससे कहीं अधिक जरूरी है। ऐसा समय जब आत्मा बाहर नहीं भीतर की और यात्रा करती है। सामायिक केवल एक परंपरा नहीं बल्कि संयम, समता और साधना का संगम है। यह आत्मा को जाग्रत करने वाली आध्यात्मिक प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं 42 वर्षों से सामयिक की कमाई कर रहे हैं।
साधु का जीवन स्वयं सामयिक का पर्याय है। सामयिक वह शक्ति है जो विचारों को निर्मल बनाती हैं और जीवन को संतुलित करती है। सामयिक संयम का प्रारंभ है, समता का अभ्यास है, अंतरात्मा की पुकार है। सामयिक की 48 मिनट की साधना में कोई बाहरी पूजा नहीं बल्कि भीतर के देव का साक्षात्कार होता है। बैंक बैलेंस होना कोई गारंटी नहीं है कि जीवन शांत होगा लेकिन जिनके पास धर्म रूपी सामयिक का बैलेंस है वे कभी भी मानसिक अशांति का शिकार नहीं होते। प्रवचन के अंत में उन्होंने भावविभोर करते हुए कहा कि तू कर सामयिक से प्रीत, तेरे दिन बीत जाते हैं। इधर राजाखेड़ी गांव स्थित जैन स्थानक में श्रेयांश मुनि ने प्रवचन किए।
विज्ञापन
पानीपत। अग्रवाल मंडी स्थित जैन स्थानक में सुदर्शन लाल महाराज के शिष्य अरुण चंद्र महाराज चातुर्मास पर सानंद विराजमान हैं। सोमवार को महाराज ने प्रवचन में सामयिक आत्मा की प्रयोगशाला के बारे में बताया। अरुण मुनि महाराज ने बताया कि भगवान महावीर की साधना का मूल संदेश अंतर्मुखी आराधना है। शरीर को सशक्त बनाना आवश्यक है लेकिन आत्मा को सशक्त बनाना उससे कहीं अधिक जरूरी है। ऐसा समय जब आत्मा बाहर नहीं भीतर की और यात्रा करती है। सामायिक केवल एक परंपरा नहीं बल्कि संयम, समता और साधना का संगम है। यह आत्मा को जाग्रत करने वाली आध्यात्मिक प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं 42 वर्षों से सामयिक की कमाई कर रहे हैं।
साधु का जीवन स्वयं सामयिक का पर्याय है। सामयिक वह शक्ति है जो विचारों को निर्मल बनाती हैं और जीवन को संतुलित करती है। सामयिक संयम का प्रारंभ है, समता का अभ्यास है, अंतरात्मा की पुकार है। सामयिक की 48 मिनट की साधना में कोई बाहरी पूजा नहीं बल्कि भीतर के देव का साक्षात्कार होता है। बैंक बैलेंस होना कोई गारंटी नहीं है कि जीवन शांत होगा लेकिन जिनके पास धर्म रूपी सामयिक का बैलेंस है वे कभी भी मानसिक अशांति का शिकार नहीं होते। प्रवचन के अंत में उन्होंने भावविभोर करते हुए कहा कि तू कर सामयिक से प्रीत, तेरे दिन बीत जाते हैं। इधर राजाखेड़ी गांव स्थित जैन स्थानक में श्रेयांश मुनि ने प्रवचन किए।
विज्ञापन