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बार एसोसिएशन चुनाव में अब तक नहीं बनी महिला प्रधान
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पानीपत। पानीपत जिला बार एसोसिएशन में चुनाव की शुरुआत 1928 में हुई थी लेकिन 93 साल बीत जाने के बाद भी जिला बार एसोसिएशन के प्रधान पद पर एक भी महिला अधिवक्ता ने नामांकन नहीं किया। प्रधान पद का वर्चस्व पुरुष वकीलों के पास ही रहा है। इस साल भी पांच पदों में एक भी पद के लिए किसी भी महिला अधिवक्ता का चेहरा सामने नहीं आया। अबकी पांच पदों पर 15 अधिवक्ता चुनाव लड़ने जा रहे हैं।
बार एसोसिएशन में पहले के मुकाबले जिला बार की सदस्यता बढ़ रही है। वर्तमान में कुल 1984 मतदाता है, जिनमें 250 से अधिक मत महिला अधिवक्ताओं के हैं। नारी शक्ति की सफलता की बात करें तो वर्ष 1998 में आशा शर्मा और वर्ष 2004 में अधिवक्ता नीलम खन्ना ने उप प्रधान पद के लिए नामांकन भरा था और जीत भी हासिल की थी। इसके अलावा वर्ष 2018 में अधिवक्ता मीनू कमल सह-सचिव बनी थीं।
ज्वाला प्रसाद गोयल, कुंदनलाल शर्मा और जय भगवान रहे दिग्गज नेता
जिला बार एसोसिएशन में वर्ष 1928 में अधिवक्ता खान ताहवर अली हैदर पहले प्रधान चुने गए। वर्ष 1929, 38 और 48 में अधिवक्ता शुगन चंद रोशन एसोसिएशन प्रधान बने। अधिवक्ता रतनलाल जैन वर्ष 1930, 43 में प्रधान चुने गए। वर्ष 1935 में प्रधान के रूप में चुने गए अधिवक्ता ज्वाला प्रसाद गोयल ने अलग-अलग सत्र में आठ बार एसोसिएशन की जीत हासिल की और रिकॉर्ड दर्ज बनाया। वहीं वर्ष 1932 में प्रधान चुने गए अधिवक्ता जयभगवान जैन और वर्ष 1934 में प्रधान बने कुंदनलाल शर्मा ने अलग-अलग सत्र में छह-छह बार जीत हासिल की। इनके अलावा अधिवक्ता बाबूराम गोपाल, धर्म सिंह अग्रवाल, और उम्मेद सिंह अहलावत चार बार प्रधान के रूप में चुने गए। रमेशचंद बेकस और रणधीर घनघस भी तीन बार प्रधान बने। इसी क्रम में तीन बार जीत हासिल कर शेर सिंह खर्ब हैट्रिक लगा चुके हैं।
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एडवोकेट पद्मा रानी ने बताया कि पानीपत जिला बार एसोसिएशन के सदस्यों में महिला अधिवक्ताओं की संख्या काफी कम है। ऐसे में हर बार पुरुष नामांकन के लिए आगे आते हैं। उन्होंने मांग की कि जिला बार कोई ऐसा प्लान तैयार करे, जिसमें महिला अधिवक्ताओं के लिए प्रधान पद के लिए हर दूसरे या तीसरे साल और बाकी चार पदों पर अलग-अलग साल में सीटें आरक्षित रखी जाए।
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बार एसोसिएशन में पहले के मुकाबले जिला बार की सदस्यता बढ़ रही है। वर्तमान में कुल 1984 मतदाता है, जिनमें 250 से अधिक मत महिला अधिवक्ताओं के हैं। नारी शक्ति की सफलता की बात करें तो वर्ष 1998 में आशा शर्मा और वर्ष 2004 में अधिवक्ता नीलम खन्ना ने उप प्रधान पद के लिए नामांकन भरा था और जीत भी हासिल की थी। इसके अलावा वर्ष 2018 में अधिवक्ता मीनू कमल सह-सचिव बनी थीं।
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ज्वाला प्रसाद गोयल, कुंदनलाल शर्मा और जय भगवान रहे दिग्गज नेता
जिला बार एसोसिएशन में वर्ष 1928 में अधिवक्ता खान ताहवर अली हैदर पहले प्रधान चुने गए। वर्ष 1929, 38 और 48 में अधिवक्ता शुगन चंद रोशन एसोसिएशन प्रधान बने। अधिवक्ता रतनलाल जैन वर्ष 1930, 43 में प्रधान चुने गए। वर्ष 1935 में प्रधान के रूप में चुने गए अधिवक्ता ज्वाला प्रसाद गोयल ने अलग-अलग सत्र में आठ बार एसोसिएशन की जीत हासिल की और रिकॉर्ड दर्ज बनाया। वहीं वर्ष 1932 में प्रधान चुने गए अधिवक्ता जयभगवान जैन और वर्ष 1934 में प्रधान बने कुंदनलाल शर्मा ने अलग-अलग सत्र में छह-छह बार जीत हासिल की। इनके अलावा अधिवक्ता बाबूराम गोपाल, धर्म सिंह अग्रवाल, और उम्मेद सिंह अहलावत चार बार प्रधान के रूप में चुने गए। रमेशचंद बेकस और रणधीर घनघस भी तीन बार प्रधान बने। इसी क्रम में तीन बार जीत हासिल कर शेर सिंह खर्ब हैट्रिक लगा चुके हैं।
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एडवोकेट पद्मा रानी ने बताया कि पानीपत जिला बार एसोसिएशन के सदस्यों में महिला अधिवक्ताओं की संख्या काफी कम है। ऐसे में हर बार पुरुष नामांकन के लिए आगे आते हैं। उन्होंने मांग की कि जिला बार कोई ऐसा प्लान तैयार करे, जिसमें महिला अधिवक्ताओं के लिए प्रधान पद के लिए हर दूसरे या तीसरे साल और बाकी चार पदों पर अलग-अलग साल में सीटें आरक्षित रखी जाए।