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जिले के किसानों को रास नहीं आई सीधी बिजाई
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पानीपत। खेत में खड़ी धान की फसल
- फोटो : Panipat
खरीफ सीजन में धान रोपाई या बिजाई का कार्य 100 फीसदी पूरा हो चुका है। लेकिन किसानों को धान की सीधी बिजाई की तकनीक रास नहीं आई। किसानों द्वारा इस बार भी धान की रोपाई पर ही फोकस किया गया। गत वर्ष धान की सीधी बिजाई करने वाले कुछ किसान भी सीधी बिजाई तकनीक से मुंह मोड़ते नजर आए। शायद इसी का परिणाम है कि जिले भर में किसानों ने लगभग 75 हजार हेक्टेयर में से मात्र 412 एकड़ में ही धान की सीधी बिजाई की है। हालांकि भूजल स्तर की गंभीर स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को जागरूक करने का प्रयास करते हुए धान की सीधी बिजाई कराने पर पूरा जोर दिया, लेकिन किसानों ने कृषि विभाग की सलाह भी नहीं मानी। न ही किसान भूजल स्तर को लेकर गंभीर दिखाई दिए। कृषि विभाग की पूरी कोशिशों के बावजूद सीधी बिजाई को लेकर विभाग लक्ष्य का मात्र 20 प्रतिशत लक्ष्य ही हासिल कर पाया। धान रोपाई के लिए जिले को करीब 60 हजार हेक्टेयर का लक्ष्य मिला था, जबकि किसानों ने हर साल की तरह करीब 75 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई की है।
पानीपत को मिला था 2000 एकड़ का लक्ष्य
कृषि विभाग हरियाणा की ओर से जिला पानीपत को 2000 एकड़ में धान की सीधी बिजाई का लक्ष्य दिया गया था। इसमें से 1600 एकड़ में सामान्य श्रेणी के किसान तथा 400 एकड़ में अनुसूचित जाति के किसानों के लिए लक्ष्य निर्धारित किया गया था। योजना के तहत धान की सीधी बिजाई करने वाले किसान को 5 हजार रुपये प्रति एकड़ अनुदान दिया जाएगा। कृषि अधिकारियों के अनुसार जो किसान इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं, उन्हें बिजाई के तुरंत बाद अपना पंजीकरण मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल पर करना होगा।
अगस्त में शुरू होगा फसल विविधिकरण का सर्वे
फसल विविधिकरण को लेकर किसान कितने गंभीर हुए हैं, उसकी स्थिति जानने के लिए कृषि विभाग द्वारा अगस्त में सर्वे किया जाएगा। सर्वे कार्य 2 अगस्त से शुरू होने की संभावना है।
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पैदावार औसत से कम
पिछले साल दो एकड़ में धान की सीधी बिजाई की थी। एक एकड़ में पैदावार औसत से कम रही। वहीं, खरपतवार भी ज्यादा हुई, जिसकी वजह से इस बार धान की सीधी बिजाई से परहेज किया है।
-दिनेश कुमार, किसान, गांव भालसी।
मेहनत ज्यादा करनी पड़ती है
धान की रोपाई विधि को ही प्राथमिकता दी जा रही है। सीधी बिजाई से खरपतवार ज्यादा होती है, जिससे मेहनत भी ज्यादा होती है और पैदावार पर भी असर पड़ता है। इस बार भी रोपाई विधि अपनाई है।
-भीम सिंह, किसान, गांव लोहारी।
सब्जी की खेती को प्राथमिकता
गिरते भूजलस्तर के लिहाज से फसल विविधिकरण की तकनीक बेहतरीन विकल्प है। क्षेत्र में वर्षों से सब्जी की खेती को ही प्राथमिकता दी जा रही है। धान की तुलना में सब्जियों में आमदनी भी अच्छी होती है।
सतीश मलिक, प्रगतिशील किसान, गांव उग्राखेड़ी।
प्रदेश व जिले में भूजलस्तर की चिंताजनक स्थिति को देखते हुए सरकार व विभाग द्वारा किसानों को सीधी बिजाई प्रक्रिया अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके बावजूद किसान रोपाई विधि को ही प्राथमिकता दे रहे हैं। कुछ किसान जागरूक भी हुए हैं। विभाग द्वारा शिविर लगाकर किसानों को जागरूक करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
-डॉ. वीरेंद्र देव आर्य, उपनिदेशक, कृषि विभाग, पानीपत
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पानीपत को मिला था 2000 एकड़ का लक्ष्य
कृषि विभाग हरियाणा की ओर से जिला पानीपत को 2000 एकड़ में धान की सीधी बिजाई का लक्ष्य दिया गया था। इसमें से 1600 एकड़ में सामान्य श्रेणी के किसान तथा 400 एकड़ में अनुसूचित जाति के किसानों के लिए लक्ष्य निर्धारित किया गया था। योजना के तहत धान की सीधी बिजाई करने वाले किसान को 5 हजार रुपये प्रति एकड़ अनुदान दिया जाएगा। कृषि अधिकारियों के अनुसार जो किसान इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं, उन्हें बिजाई के तुरंत बाद अपना पंजीकरण मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल पर करना होगा।
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अगस्त में शुरू होगा फसल विविधिकरण का सर्वे
फसल विविधिकरण को लेकर किसान कितने गंभीर हुए हैं, उसकी स्थिति जानने के लिए कृषि विभाग द्वारा अगस्त में सर्वे किया जाएगा। सर्वे कार्य 2 अगस्त से शुरू होने की संभावना है।
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पैदावार औसत से कम
पिछले साल दो एकड़ में धान की सीधी बिजाई की थी। एक एकड़ में पैदावार औसत से कम रही। वहीं, खरपतवार भी ज्यादा हुई, जिसकी वजह से इस बार धान की सीधी बिजाई से परहेज किया है।
-दिनेश कुमार, किसान, गांव भालसी।
मेहनत ज्यादा करनी पड़ती है
धान की रोपाई विधि को ही प्राथमिकता दी जा रही है। सीधी बिजाई से खरपतवार ज्यादा होती है, जिससे मेहनत भी ज्यादा होती है और पैदावार पर भी असर पड़ता है। इस बार भी रोपाई विधि अपनाई है।
-भीम सिंह, किसान, गांव लोहारी।
सब्जी की खेती को प्राथमिकता
गिरते भूजलस्तर के लिहाज से फसल विविधिकरण की तकनीक बेहतरीन विकल्प है। क्षेत्र में वर्षों से सब्जी की खेती को ही प्राथमिकता दी जा रही है। धान की तुलना में सब्जियों में आमदनी भी अच्छी होती है।
सतीश मलिक, प्रगतिशील किसान, गांव उग्राखेड़ी।
प्रदेश व जिले में भूजलस्तर की चिंताजनक स्थिति को देखते हुए सरकार व विभाग द्वारा किसानों को सीधी बिजाई प्रक्रिया अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके बावजूद किसान रोपाई विधि को ही प्राथमिकता दे रहे हैं। कुछ किसान जागरूक भी हुए हैं। विभाग द्वारा शिविर लगाकर किसानों को जागरूक करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
-डॉ. वीरेंद्र देव आर्य, उपनिदेशक, कृषि विभाग, पानीपत