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Panipat News: फैक्टरी मालिक ने निगम अधिकारियों के खिलाफ दायर की याचिका
Sun, 28 Sep 2025 03:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Sun, 28 Sep 2025 03:21 AM IST
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। गोल्डन ग्रुप की स्वास्तिक रोड स्थित गोल्डन टैरी टॉवल फैक्टरी तोड़ने के मामले में नगर निगम अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। फैक्टरी मालिक वेदप्रकाश चुघ ने निगम अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट में केस दायर किया है। सिविल कोर्ट में मामले की सुनवाई 30 सितंबर को होगी। वहीं निगम आयुक्त ने निर्माण शाखा से इस बारे में जवाब मांगा है। अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है।
नगर निगम ने 19 सितंबर को गोल्डन ग्रुप की स्वास्तिक रोड स्थित गोल्डन टैरी टॉवल फैक्टरी के अगले हिस्से का करीब 10 फीट छज्जा तोड़ दिया था। निगम का दावा था कि यह अतिक्रमण कर बनाया गया है। इसके अगले दिन आधी रात को फिर से जेसीबी लेकर पहुंचे। गोल्डन ग्रुप के मालिक वेदप्रकाश चुघ का आरोप है कि नगर निगम अधिकारियों ने मनमर्जी से आधी रात को फैक्टरी तोड़ दी। यह कार्रवाई भाजपा के एक नेता के प्रभाव में की गई। उक्त नेता उनकी फैक्टरी के पीछे एक मिल में कॉलोनी काटने की तैयारी में हैं।
उन्हाेंने बताया कि उनकी फैक्टरी की रजिस्ट्री 917 गज की है, जबकि उन्होंने 870 गज में ही निर्माण किया है। नगर निगम अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कराएंगे। एडवोकेट बलराज खर्ब ने बताया कि फैक्टरी गिराने के मामले में सिविल जज जूनियर डिवीजन की कोर्ट में केस दायर किया है। कोर्ट में इसकी सुनवाई 30 सितंबर को की जाएगी। वे कोर्ट में नगर निगम की आधी रात को फैक्टरी गिराकर गली बनाने के प्रयास की वीडियो समेत अन्य सबूत कोर्ट के सामने रखेंगे। उन्होंने नगर निगम को पार्टी बनाया है।
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बड़ा सवाल- ड्यूटी मजिस्ट्रेट तक नहीं लगाया
नगर निगम के अधिकारियों की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं। वेदप्रकाश चुघ का आरोप है उनको केवल एक नोटिस मिला था। वे इसका भी जवाब देने निगम कार्यालय गए थे। निगम अधिकारियों ने उनको कोई रास्ता नहीं दिया। निगम के एक्सईएन गोपाल कलावत और एटीपी दीपक राणा ने 19 सितंबर की शाम को फैक्टरी का अगला हिस्सा गिरा दिया। इसके अगले दिन पूरी फैक्टरी तोड़ दी। जबकि ड्यूटी मजिस्ट्रेट तक नहीं लगाया गया था। उनकी कोई सुनवाई नहीं की।
वेदप्रकाश चुघ ने फैक्टरी के 917 गज की रजिस्ट्री के संबंधित दस्तावेज दिखाए थे। अधिकारियों से जवाब मांगा गया है। अधिकारियों से गलती हुई तो इसकी भरपाई कराई जाएगी। वे कोर्ट में भी अपना जवाब पेश करेंगे।
डॉ. पंकज, आयुक्त, नगर निगम
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पानीपत। गोल्डन ग्रुप की स्वास्तिक रोड स्थित गोल्डन टैरी टॉवल फैक्टरी तोड़ने के मामले में नगर निगम अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। फैक्टरी मालिक वेदप्रकाश चुघ ने निगम अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट में केस दायर किया है। सिविल कोर्ट में मामले की सुनवाई 30 सितंबर को होगी। वहीं निगम आयुक्त ने निर्माण शाखा से इस बारे में जवाब मांगा है। अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है।
नगर निगम ने 19 सितंबर को गोल्डन ग्रुप की स्वास्तिक रोड स्थित गोल्डन टैरी टॉवल फैक्टरी के अगले हिस्से का करीब 10 फीट छज्जा तोड़ दिया था। निगम का दावा था कि यह अतिक्रमण कर बनाया गया है। इसके अगले दिन आधी रात को फिर से जेसीबी लेकर पहुंचे। गोल्डन ग्रुप के मालिक वेदप्रकाश चुघ का आरोप है कि नगर निगम अधिकारियों ने मनमर्जी से आधी रात को फैक्टरी तोड़ दी। यह कार्रवाई भाजपा के एक नेता के प्रभाव में की गई। उक्त नेता उनकी फैक्टरी के पीछे एक मिल में कॉलोनी काटने की तैयारी में हैं।
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उन्हाेंने बताया कि उनकी फैक्टरी की रजिस्ट्री 917 गज की है, जबकि उन्होंने 870 गज में ही निर्माण किया है। नगर निगम अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कराएंगे। एडवोकेट बलराज खर्ब ने बताया कि फैक्टरी गिराने के मामले में सिविल जज जूनियर डिवीजन की कोर्ट में केस दायर किया है। कोर्ट में इसकी सुनवाई 30 सितंबर को की जाएगी। वे कोर्ट में नगर निगम की आधी रात को फैक्टरी गिराकर गली बनाने के प्रयास की वीडियो समेत अन्य सबूत कोर्ट के सामने रखेंगे। उन्होंने नगर निगम को पार्टी बनाया है।
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बड़ा सवाल- ड्यूटी मजिस्ट्रेट तक नहीं लगाया
नगर निगम के अधिकारियों की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं। वेदप्रकाश चुघ का आरोप है उनको केवल एक नोटिस मिला था। वे इसका भी जवाब देने निगम कार्यालय गए थे। निगम अधिकारियों ने उनको कोई रास्ता नहीं दिया। निगम के एक्सईएन गोपाल कलावत और एटीपी दीपक राणा ने 19 सितंबर की शाम को फैक्टरी का अगला हिस्सा गिरा दिया। इसके अगले दिन पूरी फैक्टरी तोड़ दी। जबकि ड्यूटी मजिस्ट्रेट तक नहीं लगाया गया था। उनकी कोई सुनवाई नहीं की।
वेदप्रकाश चुघ ने फैक्टरी के 917 गज की रजिस्ट्री के संबंधित दस्तावेज दिखाए थे। अधिकारियों से जवाब मांगा गया है। अधिकारियों से गलती हुई तो इसकी भरपाई कराई जाएगी। वे कोर्ट में भी अपना जवाब पेश करेंगे।
डॉ. पंकज, आयुक्त, नगर निगम