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Panipat News: ठंड का सबसे बड़ा खतरा बुजुर्गों पर
Wed, 03 Jan 2024 02:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Wed, 03 Jan 2024 02:37 AM IST
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। मंगलवार इस सीजन का सबसे ठंड दिन रहा है। मंगलवार को दिन का तापमान दो डिग्री गिरकर 14 डिग्री तक पहुंच गया है। दिन में भयंकर ठंड से जनजीवन भावित है। आठ किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चल रही हवा ने कंपकंपी बढ़ा दी है। कड़ाके की ठंड ने बुजुर्गों में हाइपोथर्मिया बेल्स पाल्सी और ब्रोंकाइटिस का खतरा बढ़ा दिया है। ये सर्दी में होने वाली भयंकर बीमारी है। इसमें शरीर का तापमान गिर जाता है। सांस लेने में दिक्कत होती है।
सर्दी में ब्रोंकाइटिस का खतरा अधिक रहता है। सामान्य भाषा में कहें तो यह वायरल संक्रमण है जो फेफड़ों में सूजन का कारण बनता है। श्वास लेने में दिक्कत, गले में खराश, बुखार और पसलियों में घरघराहट और डिहाइड्रेशन हो सकता है। लापरवाही बरतने पर अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आ जाती है।
50 से अधिक आयु के बाद बेल्स पाल्सी यानी फेसियल पैरालिसिस और हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा रहता है। कान के पास से सेवेंथ क्रेनियल नस गुजरती है, जो तेज ठंड होने पर सिकुड़ जाती है। इसकी वजह से यह बीमारी होती है। ठंड से बचाव ही उपाय है।
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इमरजेंसी मेडिसिन फिजिशियन डॉ. सुखदीप कौर ने बताया कि अस्पताल में खांसी-जुकाम-बुखार के मरीज बढ़े हैं। हालांकि, ये सामान्य रोग हैं, हर आयु के व्यक्ति को चपेट में ले सकती है। यह वायरल इंफेक्शन है, इसमें एंटीबायटिक दवा की जरूरत नहीं होती। एंटी एलर्जिक दवा से मरीज को चार-पांच दिनों में आराम मिल जाता है। बेल्स पाल्सी ब्रोंकाइटिस और हाइपोथर्मिया के खतरे से निपटना जरूरी है। इसलिए डॉक्टर से परामर्श लेते रहें।
ये बरतें सावधानियां
शरीर को ढकने वाले पर्याप्त गर्म कपड़े पहनें।
प्रतिदिन एक घंटा धूप का आनंद लें।
हर बार गुनगुना पानी ही पीएं।
तैलीय खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।
स्वच्छ वातावरण में व्यायाम करें।
बासी और ठंडा भोजन न खाएं।
कोल्ड ड्रिंक और आइसक्रीम से परहेज करें।
सर्दी में वायरस इंफेक्शन बढ़ा है
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पानीपत। मंगलवार इस सीजन का सबसे ठंड दिन रहा है। मंगलवार को दिन का तापमान दो डिग्री गिरकर 14 डिग्री तक पहुंच गया है। दिन में भयंकर ठंड से जनजीवन भावित है। आठ किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चल रही हवा ने कंपकंपी बढ़ा दी है। कड़ाके की ठंड ने बुजुर्गों में हाइपोथर्मिया बेल्स पाल्सी और ब्रोंकाइटिस का खतरा बढ़ा दिया है। ये सर्दी में होने वाली भयंकर बीमारी है। इसमें शरीर का तापमान गिर जाता है। सांस लेने में दिक्कत होती है।
सर्दी में ब्रोंकाइटिस का खतरा अधिक रहता है। सामान्य भाषा में कहें तो यह वायरल संक्रमण है जो फेफड़ों में सूजन का कारण बनता है। श्वास लेने में दिक्कत, गले में खराश, बुखार और पसलियों में घरघराहट और डिहाइड्रेशन हो सकता है। लापरवाही बरतने पर अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आ जाती है।
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50 से अधिक आयु के बाद बेल्स पाल्सी यानी फेसियल पैरालिसिस और हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा रहता है। कान के पास से सेवेंथ क्रेनियल नस गुजरती है, जो तेज ठंड होने पर सिकुड़ जाती है। इसकी वजह से यह बीमारी होती है। ठंड से बचाव ही उपाय है।
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इमरजेंसी मेडिसिन फिजिशियन डॉ. सुखदीप कौर ने बताया कि अस्पताल में खांसी-जुकाम-बुखार के मरीज बढ़े हैं। हालांकि, ये सामान्य रोग हैं, हर आयु के व्यक्ति को चपेट में ले सकती है। यह वायरल इंफेक्शन है, इसमें एंटीबायटिक दवा की जरूरत नहीं होती। एंटी एलर्जिक दवा से मरीज को चार-पांच दिनों में आराम मिल जाता है। बेल्स पाल्सी ब्रोंकाइटिस और हाइपोथर्मिया के खतरे से निपटना जरूरी है। इसलिए डॉक्टर से परामर्श लेते रहें।
ये बरतें सावधानियां
शरीर को ढकने वाले पर्याप्त गर्म कपड़े पहनें।
प्रतिदिन एक घंटा धूप का आनंद लें।
हर बार गुनगुना पानी ही पीएं।
तैलीय खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।
स्वच्छ वातावरण में व्यायाम करें।
बासी और ठंडा भोजन न खाएं।
कोल्ड ड्रिंक और आइसक्रीम से परहेज करें।
सर्दी में वायरस इंफेक्शन बढ़ा है