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धर्म से बढ़ाई जा सकती है पुण्य की पूंजी : राधे-राधे महाराज
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श्रीमद्भागवत कथा सुनते श्रद्धालु। स्रोत : मंदिर
पानीपत। श्री अवध धाम मंदिर में वार्षिक महोत्सव पर श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सत्संग समारोह का मंगलवार को छठा दिन रहा। कथावाचक राधे-राधे महाराज ने कहा कि धर्म से पुण्य की पूंजी बढ़ाई जा सकती है। निर्मल और पवित्र मन से भक्ति करने से भगवान के चरणों में स्थान पाया जा सकता है। कुछ लोग भगवान की लीला के नाम पर कुछ और ही कर रहे हैं। भगवन की लीला का स्वरूप पहले सार्वजनिक नहीं था। आज सबकुछ बदल गया है और जिसकी जैसी मर्जी वैसे नचा रहे हैं। ये विचित्र बात है। नौटंकी या मनोरंजन का नाम लीला नहीं है।
कथा मंदिर के संस्थापक पंडित दाऊजी महाराज के सानिध्य में चल रही है। स्वामी दयानंद सरस्वती महाराज ने मंगलवार को कथा में विशेष रूप से पहुंचे। राधे-राधे महाराज ने भागवत कथा के प्रसंग पर चर्चा करते हुए कहा कि जब प्यास लगती है, तभी पानी का महत्व समझ में आता है, ठीक उसी प्रकार भगवान के श्रीचरणों में स्थान प्राप्त करने के लिए हृदय से प्रभु को स्मरण करने की आवश्यकता है। किसी ने भगवान को देखा तो नहीं है लेकिन भगवान की कथा सुनने मात्र से ही मन के सारे विकार नष्ट हो जाते हैं। कोई व्यक्ति भक्ति का रस एक बार पी लेता है तो वह फिर कभी दूसरा रस नहीं लेता। जैसे जल का आधार समुद्र है, ठीक उसी तरह जीवों का आधार परमात्मा है।
उन्होंने कहा कि भगवान को प्रसन्न करने के लिए केवल समर्पण की आवश्यकता है। जीवन को सार्थक बनाने के लिए सत्संग से जुड़ना जरूरी है। हमारे सत्कर्म ही हमारी रक्षा करते हैं। हम धर्म से पुण्य की पूंजी बढ़ा सकते हैं लेकिन पाप की पूंजी तो अपने आप बढ़ती है। जीवन में बिना पुण्य के सुख नहीं है। भक्ति सिर्फ गंगा स्नान और मंदिर में पूजा करना ही नहीं बल्कि ईश्वर का भजन, सत्कर्म करना, पुत्र, पति, स्वामी, समाज व मानवता की सेवा करना भी भक्ति है। भगवान अपने भक्तों में अमीर, कुलीनता, वृद्ध, बालक, मनुष्य और जानवर का भेद नहीं करते। गरीब सुदामा, बालक प्रहलाद, माता सेवरी और गजराज पर कृपा करके उन्होंने संसार को भक्ति का संदेश दिया है। इस अवसर पर भाजपा नेता गजेंद्र सलूजा, नवीन भाटिया, निशांत छौक्कर, राजेश गुप्ता, अनिल मदान, पुरुषोत्तम शर्मा, कृष्ण छौक्कर, हरिओम तायल, महेंद्र कंसल, विनोद जुनेजा, प्रीतम गुर्जर मौजूद रहे।
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कथा मंदिर के संस्थापक पंडित दाऊजी महाराज के सानिध्य में चल रही है। स्वामी दयानंद सरस्वती महाराज ने मंगलवार को कथा में विशेष रूप से पहुंचे। राधे-राधे महाराज ने भागवत कथा के प्रसंग पर चर्चा करते हुए कहा कि जब प्यास लगती है, तभी पानी का महत्व समझ में आता है, ठीक उसी प्रकार भगवान के श्रीचरणों में स्थान प्राप्त करने के लिए हृदय से प्रभु को स्मरण करने की आवश्यकता है। किसी ने भगवान को देखा तो नहीं है लेकिन भगवान की कथा सुनने मात्र से ही मन के सारे विकार नष्ट हो जाते हैं। कोई व्यक्ति भक्ति का रस एक बार पी लेता है तो वह फिर कभी दूसरा रस नहीं लेता। जैसे जल का आधार समुद्र है, ठीक उसी तरह जीवों का आधार परमात्मा है।
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उन्होंने कहा कि भगवान को प्रसन्न करने के लिए केवल समर्पण की आवश्यकता है। जीवन को सार्थक बनाने के लिए सत्संग से जुड़ना जरूरी है। हमारे सत्कर्म ही हमारी रक्षा करते हैं। हम धर्म से पुण्य की पूंजी बढ़ा सकते हैं लेकिन पाप की पूंजी तो अपने आप बढ़ती है। जीवन में बिना पुण्य के सुख नहीं है। भक्ति सिर्फ गंगा स्नान और मंदिर में पूजा करना ही नहीं बल्कि ईश्वर का भजन, सत्कर्म करना, पुत्र, पति, स्वामी, समाज व मानवता की सेवा करना भी भक्ति है। भगवान अपने भक्तों में अमीर, कुलीनता, वृद्ध, बालक, मनुष्य और जानवर का भेद नहीं करते। गरीब सुदामा, बालक प्रहलाद, माता सेवरी और गजराज पर कृपा करके उन्होंने संसार को भक्ति का संदेश दिया है। इस अवसर पर भाजपा नेता गजेंद्र सलूजा, नवीन भाटिया, निशांत छौक्कर, राजेश गुप्ता, अनिल मदान, पुरुषोत्तम शर्मा, कृष्ण छौक्कर, हरिओम तायल, महेंद्र कंसल, विनोद जुनेजा, प्रीतम गुर्जर मौजूद रहे।
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