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पानीपत थर्मल पावर स्टेशन के तीन कूलिंग टावर ध्वस्त, जानें क्यों किया गया ऐसा

Mon, 26 Aug 2019 11:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पानीपत (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पानीपत (हरियाणा) Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 26 Aug 2019 11:41 AM IST
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Three cooling towers of Panipat Thermal Power Station demolished
गिराए गए तीन टावर - फोटो : अमर उजाला

पानीपत सुपर थर्मल पावर स्टेशन में रविवार को हरियाणा बिजली उत्पादन निगम के आदेश पर करीब 40 साल पहले बनी 110-110 मेगावाट क्षमता वाली दूसरी, तीसरी, चौथी यूनिटों के कूलिंग टावरों को गिरा दिया गया। इस दौरान पानीपत पुलिस व केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की कड़ी सुरक्षा रही।

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इन टावरों को गिराने के लिए 650 ग्राम डाइनामाइट का इस्तेमाल किया गया। थर्मल की पहली यूनिट के कूलिंग प्लांट को करीब एक माह पहले विस्फोटकों की सहायता से गिरा दिया गया था। इससे पहले पांच अगस्त को पहली यूनिट को गिरा दिया गया था।
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पानीपत थर्मल में 1979 में बनी थर्मल पावर प्लांट की 110-110 मेगावाट क्षमता की एक से चार नंबर यूनिट को 2015 में कंडम घोषित कर बंद कर दिया गया था। उसके बाद से इसमें बिजली का उत्पादन नहीं हो रहा था।
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इन चारों यूनिटों के डिस्पोजल का ठेका मुंबई की कंपनी एचआर कामर्शियल को दिया गया था। इस कंपनी को ही इन चारों यूनिटों में बने कूलिंग टावर को गिराना था। जिनमें से यूनिट नंबर 1 के कूलिंग टावर को पांच अगस्त को ही ध्वस्त कर दिया गया था। रविवार को दूसरी, तीसरी व चौथी यूनिटों के कूलिंग टावरों को इमल्शन एक्सप्लोसिव के साथ विस्फोट कर गिराया गया।

इस दौरान कोई भी नुकसान नहीं हुआ। एचआर कामर्शियल कंपनी के डायरेक्टर पंकज जैन व प्रणव जैन ने बताया कि कूलिंग टावर को गिराने से पहले वहां चार फायर ब्रिगेड, चार एंबुलेंस व पांच डॉक्टरों की टीम मौके पर मौजूद रही। वहीं पानीपत पुलिस के सहयोग से जींद हाईवे पर यातायात बंद करवा दिया गया था।

इसके अलावा वाइब्रेशन को कंट्रोल करने के लिए कूलिंग टावर के चारों ओर लगभग 10 फीट गहराई तक गड्ढे खोदे गए थे, ताकि वाइब्रेशन को वहीं पर कंट्रोल किया जा सके। इसके अलावा साउंड कंट्रोल के लिए इसमें इमल्शन एक्सप्लोसिव लगाया गया था। जिसमें बहुत कम साउंड होती है।

बताया कि तीनों टावर को जयपुर की कंपनी एडवांस क्वेरीटेक इंजीनियर्स के तकनीकी विशेषज्ञों की 12 सदस्य टीम ने गिराया है, टीम के ब्लास्टिंग एक्सपर्ट इंजीनियर आनंद शर्मा ने बताया कि इन तीनों कूलिंग टावर को तोड़ने में एक नंबर कूलिंग टावर की बजाय बहुत कम मात्रा में एक्सप्लोसिव लगाया गया था।

इन तीनों यूनिटों में 650 किलो एक्सप्लोसिव लगाया गया। इसके लिए इन कूलिंग टावरों के बेस में 5200 छेद करके उनके अंदर एक्सप्लोसिव डाले गए थे। वहीं ब्लास्टिंग एक्सपर्ट इंजीनियर आनंद शर्मा ने बताया कि ब्लास्टिंग के जरिए कूलिंग टावर को तोड़ने में लगभग 50 लाख का ही खर्च आया है। थर्मल के चीफ इंजीनियर एसएल सचदेवा ने बताया कि दूसरी, तीसरी, चौथी यूनिटों के कूलिंग टावरों को सफलता पूर्व व सुरक्षित तरीके से गिरवाया गया है।

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