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स्ट्रीट लाइट घोटाले की जांच करने दोबारा निगम कार्यालय पहुंची एसआईटी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 22 Dec 2020 02:05 AM IST
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team reached nigam office investigate the case of street light fraud
नगर निगम के स्ट्रीट लाइट घोटाले की पिछले एक साल से चल रही जांच के अब पूरा होने के आसार बनते नजर आ रहे हैं। इसकी जमीनी हकीकत से रूबरू होने व टेंडरों की गहनता से जांच पड़ताल करने के लिए गृह मंत्री के निर्देशों पर बनी स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम सोमवार को फिर से पानीपत निगम कार्यालय पहुंची। इस दौरान एसआईटी ने निगम अधिकारियों के साथ हर तथ्य को जांच कर फाइल में नोट किया। चर्चा है कि पिछले पांच साल में हुए स्ट्रीट लाइटों की खरीद फरोख्त और रिपेयरिंग के काम में एसआईटी को बड़े सबूत हाथ लगे हैं। करीब 11 करोड़ से किए गए इन कामों में करीब 4 करोड़ रुपये तक का झोल एसआईटी सामने ला सकती है। इसकी चर्चा मात्र से ही निगम अधिकारियों समेत ठेकेदारों में भी हड़कंप मच गया है। जांच के बारे में एसआईटी अधिकारियों ने कुछ भी बोलने से साफ मना कर दिया है। उनका कहना है कि वे इसकी जांच केवल सरकार को सुपुर्द करेंगे। वहीं, निगम अधिकारियों ने भी एसआईटी जांच के बारे में कोई भी जानकारी न होने की बात कही है।
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बता दें कि नगर निगम हाउस में निगम पार्षद दुष्यंत भट्ट द्वारा उजागर किए गए स्ट्रीट लाइट घोटाले की जांच पर एसआईटी काम कर रही है। सदन की मांग थी कि इस मामले की जांच विजिलेंस से करवाई जाए, लेकिन गृह मंत्री अनिल विज के निर्देशों के बाद इसके लिए एसआईटी का गठन किया गया था। इसमें मुख्य रूप से जांच अधिकारी के तौर पर फरीदाबाद के एक्सईएन ज्ञान प्रकाश वाधवा, करनाल नगर निगम के सीनियर अकाउंट अफसर संजय कालीरमण व करनाल नगर निगम के रिटायर्ड चीफ इंजीनियर रमेेश मंढाण शामिल रहे, जो इस समय करनाल नगर निगम के मुख्य सलाहकार के तौर पर भी काम कर रहें हैं। इससे पहले भी एसआईटी शुक्रवार को निगम कार्यालय आकर टेंडरों की फाइलों और मौके पर जाकर कई प्वाइंटों की जांच कर चुकी है।
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क्वालिटी और रेटों पर एसआईटी की नजर
एसआईटी द्वारा निगम क्षेत्र में घोटाले की समयावधि में लगाई गई लाइटों की क्वालिटी और इनके रेटों पर कड़ी नजर है। माना जा रहा है कि एसआईटी इनके तथ्यों के आधार पर ही बड़ी कार्रवाई करने के मूड में हैं। टेंडरों में निर्धारित मैटिरियल और उस समय से लेकर अब तक के लाइटों के रेटों को भी जांच का आधार बनाया जा रहा है।
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ये अहम बिंदु हैं जांच का आधार-
- 2015 से लेकर 2019 तक 69 टेंडर लगा करीब दस हजार स्ट्रीट लाइटों व मेंटनेंस पर खर्च सवा 11 करोड़ रुपये
- 6 करोड़ 70 लाख से खरीदी करीब साढ़े 5 हजार एलईडी व चार हजार सीएफएल व 160 टॉवर लाइट
- करीब 1.50 करोड़ रुपये बिजली के कामों व करीब 3 करोड़ रुपये स्ट्रीट लाइट व टॉवर लाइटों पर खर्च किए
इन प्वांइट को जांच रही एसआईटी-
- स्ट्रीट लाइट के सभी टेंडरों को लगाकर काम किया भी गया है या नहीं
- टेंडर व सरकार की हिदायतें व दिशा-निर्देशों का पूरा पालन हो पाया है या नहीं
- मौके पर उक्त मैटिरियल लगा है या नहीं, उसकी क्वालिटी सही है या नहीं
- लाइटों या रिपेयरिंग के सामन के रेटों में कितना अंतर था, ये अंतर कैसे आया
- लाइटों को लगवाने वाले अधिकारी कौन-कौन थे, किस किस अधिकारी के पैमेंट संबंधित फाइलों पर हस्ताक्षर हैं
- गड़बड़ी वाली लाइटों की पैमेंट किस आधार पर की गई है
ठेकेदारों समेत अधिकारियों के उड़े होश-
एसआईटी की जांच रिपोर्ट जैसे जैसे बढ़ रही है, वैसे-वैसे स्ट्रीट लाइट ठेेकेदारों व निगम अधिकारियों के होश हवा हो रहे हैं। डायरेक्टर आफिस की रिपोर्ट को क्रॉस चैक करने के बाद इस रिपोर्ट को फिर से मुख्यालय सुपुर्द किया जाएगा, जिसके बाद मंत्री के निर्देशों पर आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। अगर इसमें बड़ा फर्जीवाड़ा मिला तो संबंधित ठेकेदार या एजेंसी पर रिकवरी तक डाली जा सकती है। इसके अलावा संबंधित अधिकारी द्वारा गड़बड़झाले में आरोपी पाए जाने पर उनके खिलाफ चार्जशीट तक दायर हो सकती है।
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