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Panipat News: विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में अहम भूमिका निभाते हैं शिक्षक
Fri, 05 Sep 2025 12:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Fri, 05 Sep 2025 12:44 AM IST
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डायट कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में जानकारी देते अध्यापक विनय। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। शिक्षक विद्यार्थियों के जीवन में अंधकार को दूर कर उनकी जिंदगी में उजाला लाते हैं। कई शिक्षक ऐसे हैं जो मुश्किलों के बीच कठिन परिश्रम कर युवा पीढ़ी को नई दिशा प्रदान कर रहे हैं और किताबी ज्ञान के साथ कंप्यूटर, संगीत, खेलों में बच्चों का मार्गदर्शन कर उन्हें सफल बनाने में योगदान दे रहे हैं।
शिक्षकों को सम्मान देने के लिए ही 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। यह तिथि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्रतिष्ठित विद्वान और भारत के दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिवस भी है। यह दिन शिक्षकों के निस्वार्थ समर्पण और ज्ञान को धन्यवाद अर्पण करने का है। इसलिए गुरु को ईश्वर से भी श्रेष्ठ माना गया है क्योंकि वह हमें भगवान तक पहुंचने का मार्ग दिखाते हैं। इसलिए कहा गया है कि गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय। बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो मिलाय। शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर वीरवार को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में संवाद कार्यक्रम किया। जिसमें जिले के शिक्षाविद् शामिल हुए। उन्होंने नई शिक्षा नीति में शिक्षक की भूमिका, विद्यार्थी को किस तरह तराशना है, विद्यार्थी के कौशल को पहचाना आदि विषयों पर अपनी बेबाक राय और उपयोगी सुझाव भी रखे।
बोले शिक्षाविद् ....
बच्चों के कौशल को निखारता है शिक्षक : तकदीर सिंह
बच्चों के उज्ज्वल भविष्य में शिक्षक का महत्वपूर्ण योगदान होता है। शिक्षक बच्चों के कौशल को निखारता है। वह बच्चों को जीवन जीने की कला और व्यवहार का तरीका बताता है। शिक्षक को एक मिशन के तौर पर काम करना चाहिए, इसका उद्देश्य मूल्यों पर आधारित शिक्षा होनी चाहिए। उन्हें बच्चों के कौशल, स्तर एवं बौद्धिक क्षमता के अनुरूप तैयार करना होगा। - तकदीर सिंह, सहायक प्रोफेसर, मनोविज्ञान, डायट पानीपत।
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हर मुश्किल को आसान बनाता है शिक्षक : उमेद सिंह
वर्तमान में पाठ्यक्रम सहित नैतिक शिक्षा का बड़ा महत्व है। एक शिक्षक बच्चों के कौशल को पहचान कर उन्हें तैयार करता और लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए उनका मार्गदर्शन करता है। शिक्षक का काम व्यक्तित्व विभिन्नताओं को पहचानना और उसे उभारना होता है। उन्हें तर्क-वितर्क के लिए तैयार करना होता है।
-उमेद सिंह, पीजीटी, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बड़ौली।
बिना भेदभाव बच्चों को देता है शिक्षा : निर्मला
व्यक्ति की सफलता में गुरु का विशेष महत्व है। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन इसके उदाहरण हैं। शिक्षक का पहला कर्तव्य बच्चों को एक नजर से देखना है। बिना भेदभाव के शिक्षा देना वाला ही सच्चा शिक्षक है। शिक्षक की महिमा भगवान से भी बढ़कर होती है। शिक्षक को हर तरह की चुनौती के लिए खुद को तैयार करना होगा। नई तकनीक से खुद को अपडेट करना होगा।
- निर्मला देवी, शिक्षिका, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय शेरा।
क्षमता अनुसार विकसित करें बच्चों का कौशल : नरेश
बच्चों को उनकी क्षमता के हिसाब से देखते हुए कौशल विकास करना चाहिए। बच्चों को तनाव रहित वातावरण देना होगा। वैचारिक शिक्षा पर भी महत्व देना होगा, ताकि व्यवस्था अंक लेने तक समिति न रहे। शिक्षकों के पास संभावना है कि वह बच्चों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर सकें।
- नरेश, पीजीटी, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सौंधापुर।
दीपक की तरह रास्ता दिखाता है शिक्षक : सुरेश कुमार
शिक्षक बिना किसी उम्मीद के सेवा कर रहे हैं ताकि बच्चों का जीवन स्तर सुधारा जा सके। शिक्षक दीपक की तरह बच्चों को रास्ता दिखाने का काम करता है। बच्चों को किस तरह तराशना है, ताकि दीपक को रोशन किया जा सके। वह शिक्षा के साथ प्रकृति को बचाने का काम करता है।
- सुरेश कुमार, डीपीई, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय लोहारी।
शिक्षा संस्कार के साथ रोजगारपरक होनी चाहिए : विकास
अगर हमें अमर बना है तो शिक्षक होकर काम करना है। शिक्षक बिना किसी भेदभाव के काम करता है। हालांकि हमें प्राचीन शिक्षा व्यवस्था को देखना होगा। छात्र-शिक्षक के संबंध को समझना होगा। शिक्षा संस्कार के साथ रोजगारपरक होनी चाहिए।
- विकास शर्मा, टीजीटी, राजकीय माध्यमिक विद्यालय कचरौली।
शिक्षक को खुद के व्यवहार में लाना होगा परिवर्तन : सुदेश राठी
छात्र शिक्षक और समाज से सीखते हैं। आज हर स्तर पर चुनौतियां हैं। शिक्षक को सिर्फ उपदेश की तरह नहीं बल्कि बच्चों के व्यवहार में परिवर्तन लाने के लिए सर्वप्रथम खुद के व्यवहार में परिवर्तन लाना होगा। बच्चे शिक्षक पर विश्वास करते हैं। शिक्षक को उसे विश्वास को बरकरार रखना होगा। अभिभावक भी बच्चों की शिक्षा एवं संस्कारों पर ध्यान दें तो शिक्षा का स्तर सुधरेगा।
- सुदेश राठी, डीपीई, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय करहंस।
शारीरिक गतिविधियों पर भी ध्यान देने की जरूरत : राकेश
स्कूलों में पढ़ाई के साथ अब शारीरिक गतिविधियों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। शारीरिक रूप से बच्चों को स्वस्थ रखना वर्तमान समय की मांग है। सरकारी स्कूलों के प्रति बच्चों और अभिभावकों की सोच बदलनी होगी। शिक्षक समाज के निर्माण में योगदान देता है। इस पेशे में लोगों को लाने के लिए एक नीति की जरूरत है। स्कूली परीक्षा में बच्चों के कौशल एवं मनोवैज्ञानिक विकास का भी आंकलन हो। इसमें शिक्षक के साथ समाज और अभिभावकों का बड़ा योगदान होना चाहिए।
- राकेश, पीजीटी, राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय नारायणा।
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पानीपत। शिक्षक विद्यार्थियों के जीवन में अंधकार को दूर कर उनकी जिंदगी में उजाला लाते हैं। कई शिक्षक ऐसे हैं जो मुश्किलों के बीच कठिन परिश्रम कर युवा पीढ़ी को नई दिशा प्रदान कर रहे हैं और किताबी ज्ञान के साथ कंप्यूटर, संगीत, खेलों में बच्चों का मार्गदर्शन कर उन्हें सफल बनाने में योगदान दे रहे हैं।
शिक्षकों को सम्मान देने के लिए ही 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। यह तिथि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्रतिष्ठित विद्वान और भारत के दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिवस भी है। यह दिन शिक्षकों के निस्वार्थ समर्पण और ज्ञान को धन्यवाद अर्पण करने का है। इसलिए गुरु को ईश्वर से भी श्रेष्ठ माना गया है क्योंकि वह हमें भगवान तक पहुंचने का मार्ग दिखाते हैं। इसलिए कहा गया है कि गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय। बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो मिलाय। शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर वीरवार को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में संवाद कार्यक्रम किया। जिसमें जिले के शिक्षाविद् शामिल हुए। उन्होंने नई शिक्षा नीति में शिक्षक की भूमिका, विद्यार्थी को किस तरह तराशना है, विद्यार्थी के कौशल को पहचाना आदि विषयों पर अपनी बेबाक राय और उपयोगी सुझाव भी रखे।
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बोले शिक्षाविद् ....
बच्चों के कौशल को निखारता है शिक्षक : तकदीर सिंह
बच्चों के उज्ज्वल भविष्य में शिक्षक का महत्वपूर्ण योगदान होता है। शिक्षक बच्चों के कौशल को निखारता है। वह बच्चों को जीवन जीने की कला और व्यवहार का तरीका बताता है। शिक्षक को एक मिशन के तौर पर काम करना चाहिए, इसका उद्देश्य मूल्यों पर आधारित शिक्षा होनी चाहिए। उन्हें बच्चों के कौशल, स्तर एवं बौद्धिक क्षमता के अनुरूप तैयार करना होगा। - तकदीर सिंह, सहायक प्रोफेसर, मनोविज्ञान, डायट पानीपत।
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हर मुश्किल को आसान बनाता है शिक्षक : उमेद सिंह
वर्तमान में पाठ्यक्रम सहित नैतिक शिक्षा का बड़ा महत्व है। एक शिक्षक बच्चों के कौशल को पहचान कर उन्हें तैयार करता और लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए उनका मार्गदर्शन करता है। शिक्षक का काम व्यक्तित्व विभिन्नताओं को पहचानना और उसे उभारना होता है। उन्हें तर्क-वितर्क के लिए तैयार करना होता है।
-उमेद सिंह, पीजीटी, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बड़ौली।
बिना भेदभाव बच्चों को देता है शिक्षा : निर्मला
व्यक्ति की सफलता में गुरु का विशेष महत्व है। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन इसके उदाहरण हैं। शिक्षक का पहला कर्तव्य बच्चों को एक नजर से देखना है। बिना भेदभाव के शिक्षा देना वाला ही सच्चा शिक्षक है। शिक्षक की महिमा भगवान से भी बढ़कर होती है। शिक्षक को हर तरह की चुनौती के लिए खुद को तैयार करना होगा। नई तकनीक से खुद को अपडेट करना होगा।
- निर्मला देवी, शिक्षिका, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय शेरा।
क्षमता अनुसार विकसित करें बच्चों का कौशल : नरेश
बच्चों को उनकी क्षमता के हिसाब से देखते हुए कौशल विकास करना चाहिए। बच्चों को तनाव रहित वातावरण देना होगा। वैचारिक शिक्षा पर भी महत्व देना होगा, ताकि व्यवस्था अंक लेने तक समिति न रहे। शिक्षकों के पास संभावना है कि वह बच्चों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर सकें।
- नरेश, पीजीटी, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सौंधापुर।
दीपक की तरह रास्ता दिखाता है शिक्षक : सुरेश कुमार
शिक्षक बिना किसी उम्मीद के सेवा कर रहे हैं ताकि बच्चों का जीवन स्तर सुधारा जा सके। शिक्षक दीपक की तरह बच्चों को रास्ता दिखाने का काम करता है। बच्चों को किस तरह तराशना है, ताकि दीपक को रोशन किया जा सके। वह शिक्षा के साथ प्रकृति को बचाने का काम करता है।
- सुरेश कुमार, डीपीई, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय लोहारी।
शिक्षा संस्कार के साथ रोजगारपरक होनी चाहिए : विकास
अगर हमें अमर बना है तो शिक्षक होकर काम करना है। शिक्षक बिना किसी भेदभाव के काम करता है। हालांकि हमें प्राचीन शिक्षा व्यवस्था को देखना होगा। छात्र-शिक्षक के संबंध को समझना होगा। शिक्षा संस्कार के साथ रोजगारपरक होनी चाहिए।
- विकास शर्मा, टीजीटी, राजकीय माध्यमिक विद्यालय कचरौली।
शिक्षक को खुद के व्यवहार में लाना होगा परिवर्तन : सुदेश राठी
छात्र शिक्षक और समाज से सीखते हैं। आज हर स्तर पर चुनौतियां हैं। शिक्षक को सिर्फ उपदेश की तरह नहीं बल्कि बच्चों के व्यवहार में परिवर्तन लाने के लिए सर्वप्रथम खुद के व्यवहार में परिवर्तन लाना होगा। बच्चे शिक्षक पर विश्वास करते हैं। शिक्षक को उसे विश्वास को बरकरार रखना होगा। अभिभावक भी बच्चों की शिक्षा एवं संस्कारों पर ध्यान दें तो शिक्षा का स्तर सुधरेगा।
- सुदेश राठी, डीपीई, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय करहंस।
शारीरिक गतिविधियों पर भी ध्यान देने की जरूरत : राकेश
स्कूलों में पढ़ाई के साथ अब शारीरिक गतिविधियों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। शारीरिक रूप से बच्चों को स्वस्थ रखना वर्तमान समय की मांग है। सरकारी स्कूलों के प्रति बच्चों और अभिभावकों की सोच बदलनी होगी। शिक्षक समाज के निर्माण में योगदान देता है। इस पेशे में लोगों को लाने के लिए एक नीति की जरूरत है। स्कूली परीक्षा में बच्चों के कौशल एवं मनोवैज्ञानिक विकास का भी आंकलन हो। इसमें शिक्षक के साथ समाज और अभिभावकों का बड़ा योगदान होना चाहिए।
- राकेश, पीजीटी, राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय नारायणा।

डायट कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में जानकारी देते अध्यापक विनय। संवाद