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अंधविश्वास और अज्ञानता के कडे़ विरोधी थे स्वामी दयानंद
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विजेता छात्र को सम्मानित करते हुए अध्यापक।
- फोटो : Panipat
पानीपत। स्वामी दयानंद सरस्वती की जयंती पर शनिवार को आर्य वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पानीपत में ‘स्वामी दयानंद का संदेश’ विषय पर निबंध प्रतियोगिता एवं पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ वेद मंत्रों के साथ हुआ और समापन राष्ट्रगान के साथ समारोह हुआ।
कार्यक्रम में प्राचार्य मनीष घणघस ने कहा कि स्वामी दयानंद मूर्ति पूजा, अंधविश्वास, अज्ञानता और पाखंड व कुरीतियों का कड़ा विरोध करते थे। राजनीतिक क्षेत्र में वह स्वराज स्थापित करना चाहते थे। उन्होंने आर्य समाज के 10 नियमों का न केवल पालन किया बल्कि इन नियमों का सच्चे मन से प्रचार-प्रसार भी किया। विश्व मानव का उपकार व जनकल्याण करना ही आर्य समाज का मुख्य उद्देश्य है। इस मौके पर मास्टर नवरत्न मुकेश शास्त्री, महेंद्र सिंह, अंकित शर्मा, संदीप व सोनू वर्मा मुख्य रूप से मौजूद रहे।
उधर, डीएवी पुलिस पब्लिक स्कूल प्रांगण में स्वामी दयानंद सरस्वती जन्मोत्सव पखवाड़े का शनिवार को समापन हुआ। इसका आयोजन आर्य प्रादेशिक प्रतिनिधि उपसभा व हरियाणा एवं आर्य युवा समाज के तत्वावधान में किया गया था। समापन समारोह में सूर्य नमस्कार एवं हवन का आयोजन किया गया।
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प्रधानाचार्या अनुपमा सिन्हा ने कहा कि आर्य समाज के संस्थापक एवं डीएवी संस्था के आधार स्तंभ स्वामी दयानंद सरस्वती का जन्मदिवस 12 फरवरी तथा विक्रम संवत के अनुसार फाल्गुन कृष्ण दशमी तदनुसार 26 फरवरी को है। इसलिए 12 फरवरी से 26 फरवरी तक प्रतिदिन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसके अंतर्गत सूर्य नमस्कार और आर्य समाज समिति ने साप्ताहिक हवन का आयोजन किया। विद्यार्थियों ने नाटक, भाषणों एवं कविताओं के माध्यम से प्रस्तुतियां भी दीं।
स्वामी दयानंद सरस्वती ने किया समाज की बुराइयों का अंत
पानीपत। नूरवाला स्थित एवी पब्लिक स्कूल में स्वामी दयानंद सरस्वती की जयंती पर हवन किया गया। प्रधानाचार्य भास्कर प्रकाश ने बताया कि गुरुकुल शिक्षा पद्धति स्वामी दयानंद के कारण ही है। उन्होंने सती प्रथा, बाल विवाह व गौ हत्या जैसी बुराइयों का अंत किया है। स्वामी दयानंद ने हिंदी भाषा में ही ग्रंथों की रचना की है। उनका मुख्य ग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश है। कार्यक्रम में विनिता कपूर, उषा रावल, अनीता कमलेश, ममता, प्रिंसी , सपना , गीता व नीरज मौजूद रहे।
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कार्यक्रम में प्राचार्य मनीष घणघस ने कहा कि स्वामी दयानंद मूर्ति पूजा, अंधविश्वास, अज्ञानता और पाखंड व कुरीतियों का कड़ा विरोध करते थे। राजनीतिक क्षेत्र में वह स्वराज स्थापित करना चाहते थे। उन्होंने आर्य समाज के 10 नियमों का न केवल पालन किया बल्कि इन नियमों का सच्चे मन से प्रचार-प्रसार भी किया। विश्व मानव का उपकार व जनकल्याण करना ही आर्य समाज का मुख्य उद्देश्य है। इस मौके पर मास्टर नवरत्न मुकेश शास्त्री, महेंद्र सिंह, अंकित शर्मा, संदीप व सोनू वर्मा मुख्य रूप से मौजूद रहे।
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उधर, डीएवी पुलिस पब्लिक स्कूल प्रांगण में स्वामी दयानंद सरस्वती जन्मोत्सव पखवाड़े का शनिवार को समापन हुआ। इसका आयोजन आर्य प्रादेशिक प्रतिनिधि उपसभा व हरियाणा एवं आर्य युवा समाज के तत्वावधान में किया गया था। समापन समारोह में सूर्य नमस्कार एवं हवन का आयोजन किया गया।
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प्रधानाचार्या अनुपमा सिन्हा ने कहा कि आर्य समाज के संस्थापक एवं डीएवी संस्था के आधार स्तंभ स्वामी दयानंद सरस्वती का जन्मदिवस 12 फरवरी तथा विक्रम संवत के अनुसार फाल्गुन कृष्ण दशमी तदनुसार 26 फरवरी को है। इसलिए 12 फरवरी से 26 फरवरी तक प्रतिदिन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसके अंतर्गत सूर्य नमस्कार और आर्य समाज समिति ने साप्ताहिक हवन का आयोजन किया। विद्यार्थियों ने नाटक, भाषणों एवं कविताओं के माध्यम से प्रस्तुतियां भी दीं।
स्वामी दयानंद सरस्वती ने किया समाज की बुराइयों का अंत
पानीपत। नूरवाला स्थित एवी पब्लिक स्कूल में स्वामी दयानंद सरस्वती की जयंती पर हवन किया गया। प्रधानाचार्य भास्कर प्रकाश ने बताया कि गुरुकुल शिक्षा पद्धति स्वामी दयानंद के कारण ही है। उन्होंने सती प्रथा, बाल विवाह व गौ हत्या जैसी बुराइयों का अंत किया है। स्वामी दयानंद ने हिंदी भाषा में ही ग्रंथों की रचना की है। उनका मुख्य ग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश है। कार्यक्रम में विनिता कपूर, उषा रावल, अनीता कमलेश, ममता, प्रिंसी , सपना , गीता व नीरज मौजूद रहे।

पानीपत। एवी पब्लिक स्कूल में हवन यज्ञ में आहुति डालते बच्चे।- फोटो : Panipat