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जल और वायु प्रदूषण करने पर शुगर मिल बंद

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 01 Aug 2020 12:21 AM IST
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sugar mill closed due to water and air pollution
नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने रिफाइनरी के बाद पानीपत शुगर मिल को आड़े हाथों लिया है। शुगर मिल पर बड़ी कार्रवाई करते हुए एनजीटी ने यूनिटों का बंद कर दिया है। एनजीटी ने आदेश में साफ कहा है कि जब तक कि जल एवं वायु प्रदूषण को खत्म करने के लिए उपचारात्मक उपाय नहीं पूरे होते, शुगर मिल बंद रहेगी। इसके साथ ही हरियाणा राज्य प्रदूूषण नियंत्रण बोर्ड की जिम्मेदारी तय कर दी कि उपाय होने तक शुगर मिल शुरू नहीं होनी चाहिए। एनजीटी ने आदेश में कहा कि शुगर मिल वायु और जल प्रदूषण कर अपराध कर रह है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने डिस्टलरी को क्लोजर नोटिस जारी किया था, उसके बावजूद संचालित की जा रही है। शुगर मिल का बॉयलर भी बहुत पुराना हो चुका है, ईटीपी भी खराब है। मिल खुले में पानी बहा रहा है। यह हालात तब है कि जबकि इससे पहले शुगर मिल पर एनजीटी 20 लाख रुपये का जुर्माना भी लगा चुका है।
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सीपीसीबी के अधिकारियों ने सौंपी यह रिपोर्ट-
शुगर मिल में ईटीपी (एफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट) ठीक नहीं है। इस कारण ट्रीटेड पानी खुले में बहाया जा रहा। शुगर मिल की तमाम व्यवस्थाओं में खामियां हैं, इसलिए आधा शहर शुगर मिल से निकलने वाली बदबू से परेशान हैं। एनजीटी के निर्देश पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) दिल्ली के अफसरों ने अपने राज्य के सहयोगी अफसरों के साथ शुगर मिल का दौरा किया तो कई कमियां सामने आई। कमेटी की रिपोर्ट में ईटीपी के ऑपरेशन और मेंटेनेंस की व्यवस्था सबसे खराब निकली थी। यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि जल प्रदूषण के लिए यह खतरनाक है। सीपीसीबी के सहायक निदेशक पीके मिश्रा, सीपीसीबी से ही रीना सतावन, आरए कुलदीप सिंह, एचएसपीसीबी पानीपत के आरओ संदीप सिंह और असिस्टेंट एनवायरनमेंट इंजीनियर प्रदीप सिंह की टीम ने 12 फरवरी 2020 को शुगर मिल पानीपत की जांच कर रिपोर्ट एनजीटी को सौंपी थी।
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शुगर मिल की जांच में यह कमियां आईं सामने
बोरवेल से शुगर मिल को ताजा पानी मिलता है। हालांकि, इस बोरवेल के लिए सेंट्रल ग्राउंड वाटर अथॉरिटी से एनओसी लेना बाकी है। ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाला ट्रीटेड पानी की पाइप लाइन लीकेज थी। ईटीपी के पानी को जहां पर स्टोर किया जाता है, वह ओवरफ्लो था। यूनिट में सिंचाई की कोई प्लानिंग नजर नहीं आई। ईटीपी का ऑपरेशन और मेंटीनेंस सबसे खराब स्थिति में था। प्राइमरी और सेकेंडरी क्लेरिफायर क्षतिग्रस्त मिला। यूनिट से निकलने वाले खतरनाक वेस्ट और सॉलिड के मैनेजमेंट का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।
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आसपास एरिया में घूमी थी टीम, लोगों से की थी बात
टीम के सदस्य संजय कॉलोनी के विजय जैन और राहुल, संजय कॉलोनी स्थित शहीद रविकांत कन्या विद्यालय की मुख्य टीचर पूनम शर्मा, वार्ड-17 की पार्षद प्रमोद देवी, मुखीजा कॉलोनी की गीता देवी और न्यू आरके पुरम स्थित नवयुग स्कूल की मालिक संगीता से मिले और समस्याएं जानी। संगीता ने बताया कि कैसे शुगर मिल की राख और बदबू की वजह से बच्चे खुले में नहीं बैठते हैं। वो शुगर मिल की पहले भी शिकायत कर चुकी है। एनजीटी ने लोगों की इस शिकायत को गंभीरता से लिया।

इन कालोनियों के लोग है परेशान
वार्ड-18 का पूरा एरिया सबसे अधिक प्रभावित है। जिसमें सतकरतार कॉलोनी, आठ मरला एरिया, मुखीजा कालोनी, आरके पुरम एरिया साथ ही वार्ड-17 का एरिया भी बहुत प्रभावित है। इसमें मिल के सामने संजय कॉलोनी, आजाद नगर, राज नगर एरिया आदि है।
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