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Panipat News: सीबीएसई स्कूलों में एआई और सीटी की पढ़ाई करेंगे विद्यार्थी
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पानीपत। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत शिक्षा प्रणाली को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अब सीबीएसई स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और कंप्यूटेशनल थिंकिंग (सीटी) जैसे विषयों की पढ़ाई कराई जाएगी। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा तीसरी से आठवीं तक इन विषयों को लागू किया जाएगा। इस संबंध में सभी स्कूल प्रमुखों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
जिले के करीब 72 सीबीएसई स्कूलों में इस नई पहल को लागू किया जाएगा। इससे जिले के लगभग 43 हजार विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा। इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को शुरुआती स्तर से ही तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है, ताकि वे बदलते डिजिटल युग की चुनौतियों का सामना कर सकें।
नई शिक्षा नीति के तहत यह कदम न केवल शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाएगा बल्कि विद्यार्थियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए भी तैयार करेगा। स्कूल प्रबंधन भी इस पहल के लिए उत्साहित हैं और इसे प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में कार्य शुरू कर दिया गया है।
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विद्यार्थियों को तकनीकी दक्षता पर जोर
नए पाठ्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को डिजिटल साक्षरता, तकनीक के सुरक्षित व नैतिक उपयोग और नवाचार की समझ विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही, एआई के व्यावहारिक उपयोग से भी उन्हें परिचित कराया जाएगा जिससे वे दैनिक जीवन में तकनीक के महत्व को समझ सकें।
छात्रों को मिलेगा डिजिटल भविष्य का आधार
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल छात्रों में आलोचनात्मक सोच, समस्या समाधान क्षमता और निर्णय लेने के कौशल को विकसित करने में सहायक होगी। इससे विद्यार्थियों को भविष्य में तकनीकी क्षेत्रों में बेहतर अवसर प्राप्त होंगे और वे एक जिम्मेदार डिजिटल नागरिक के रूप में विकसित हो सकेंगे।
आज के तेजी से बदलते तकनीकी युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केवल एक विषय नहीं बल्कि भविष्य की अनिवार्यता बन चुका है। यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को डिजिटल साक्षरता, तकनीक के नैतिक उपयोग और नवाचार की समझ प्रदान करेगा। इस पहल से बच्चों को एआई के व्यावहारिक उपयोग से जोड़ा जाएगा।
- बिजेंद्र मान, जिलाध्यक्ष, सहोदय स्कूल।
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जिले के करीब 72 सीबीएसई स्कूलों में इस नई पहल को लागू किया जाएगा। इससे जिले के लगभग 43 हजार विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा। इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को शुरुआती स्तर से ही तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है, ताकि वे बदलते डिजिटल युग की चुनौतियों का सामना कर सकें।
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नई शिक्षा नीति के तहत यह कदम न केवल शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाएगा बल्कि विद्यार्थियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए भी तैयार करेगा। स्कूल प्रबंधन भी इस पहल के लिए उत्साहित हैं और इसे प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में कार्य शुरू कर दिया गया है।
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विद्यार्थियों को तकनीकी दक्षता पर जोर
नए पाठ्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को डिजिटल साक्षरता, तकनीक के सुरक्षित व नैतिक उपयोग और नवाचार की समझ विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही, एआई के व्यावहारिक उपयोग से भी उन्हें परिचित कराया जाएगा जिससे वे दैनिक जीवन में तकनीक के महत्व को समझ सकें।
छात्रों को मिलेगा डिजिटल भविष्य का आधार
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल छात्रों में आलोचनात्मक सोच, समस्या समाधान क्षमता और निर्णय लेने के कौशल को विकसित करने में सहायक होगी। इससे विद्यार्थियों को भविष्य में तकनीकी क्षेत्रों में बेहतर अवसर प्राप्त होंगे और वे एक जिम्मेदार डिजिटल नागरिक के रूप में विकसित हो सकेंगे।
आज के तेजी से बदलते तकनीकी युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केवल एक विषय नहीं बल्कि भविष्य की अनिवार्यता बन चुका है। यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को डिजिटल साक्षरता, तकनीक के नैतिक उपयोग और नवाचार की समझ प्रदान करेगा। इस पहल से बच्चों को एआई के व्यावहारिक उपयोग से जोड़ा जाएगा।
- बिजेंद्र मान, जिलाध्यक्ष, सहोदय स्कूल।