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Panipat News: विद्यार्थियों को नए सत्र से पहले मिलेंगी पुस्तकें
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पानीपत। राजकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों को पुस्तकों के लिए हर साल की तरह इस बार परेशान नहीं होना पड़ेगा। विद्यार्थियों को इस बार नए सत्र में स्कूलों में छात्र संख्या के अनुसार समय से पुस्तकें मुहैया करा दी जाएंगी। इसके लिए शिक्षा विभाग ने पहले से ही योजना बना ली है। समय से पुस्तकें मिलने से अध्यापकों को भी पढ़ाने में सहूलियत होगी। हर साल आधा सत्र बीत जाने के बाद विद्यालयों में किताबें आती थीं, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती थी। समय पर किताबें न आने पर अभिभावक, शिक्षक व अध्यापक संघ भी इसके लिए आंदोलन कर चुके हैं। ऐसे में शिक्षा विभाग ने इस बार सत्र की शुरू होने से पहले पुस्तकें पहुंचाने की योजना बनाई है।
विभाग की ओर से दिसंबर माह में ही विद्यालयों से डिमांड मांग ली गई थी। डिमांड के लिए विभाग ने एमआईएस पोर्टल में संशोधन भी किया था, जिसमें पुस्तकें मांगने का विकल्प जोड़ा था। जिले के सभी राजकीय विद्यालयों ने अपनी डिमांड एमआईएस पोर्टल पर भेज दी है। इस प्रक्रिया से जहां अध्यापकों को डिमांड भेजने में आसानी रहीं। वहीं, विभाग को डिमांड तुरंत मिल भी गई है।
पाठ्य-पुस्तक में भी किए जा रहे बदलाव
विभाग की ओर से इस बार पाठ्य पुस्तक में भी बदलाव किए जा रहे हैं। इस पर विभाग ने विद्यालयों से दोबारा डिमांड मांगी है। प्रक्रिया सरल होने के चलते अध्यापकों ने तेजी से दोबारा डिमांड भेज दी है। अब पुस्तकों में बदलाव अंतिम चरण में है। एससीईआरटी की ओर से पुस्तकों सदस्यों को भेज दी है। प्रतिक्रिया मिलने के बाद पुस्तकों की छपाई शुरू की जाएगी। विभाग ने एक महीने में जिले के सभी विद्यार्थियों के लिए पुस्तकें प्रकाशित करने का लक्ष्य रखा है, ताकि अप्रैल में पुस्तकें भिजवा दी जाएं।
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बालवाटिका से आठवीं तक पढ़ रहे 76 हजार विद्यार्थी
बता दें कि राजकीय विद्यालयों में पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को निशुल्क पुस्तकें दी जाती हैं। बालवाटिका से पांचवीं तक करीब 45 हजार 771 विद्यार्थी हैं। वहीं, छठी से आठवीं तक करीब 30 हजार 176 बच्चे पढ़ रहे हैं।
शिक्षा की गुणवत्ता में आएगा सुधार
राजकीय अध्यापक संघ से अजेंद्र कुंडू ने कहा कि हर साल पुस्तकें भिजवाने में देरी होती थी। इससे शिक्षकों को पढ़ाने और बच्चों को पढ़ने में परेशानी आती थी। पुस्तकें देरी से आने का मुद्दा राजकीय अध्यापक संघ उठाता रहा है। इस बार डिमांड वार्षिक परीक्षा से पहले मांगी गई है। नए सत्र में समय पर पुस्तकें आने से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
वर्जन-
विद्यार्थियों को इस साल परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। विभाग की ओर से एमआईएस पोर्टल पर किताबों की डिमांड की गई थी। अप्रैल के पहले सप्ताह में पुस्तकें आने की संभावना है।
- अनिल मलिक, जिला एफएलएन कोऑर्डिनेटर, पानीपत।
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विभाग की ओर से दिसंबर माह में ही विद्यालयों से डिमांड मांग ली गई थी। डिमांड के लिए विभाग ने एमआईएस पोर्टल में संशोधन भी किया था, जिसमें पुस्तकें मांगने का विकल्प जोड़ा था। जिले के सभी राजकीय विद्यालयों ने अपनी डिमांड एमआईएस पोर्टल पर भेज दी है। इस प्रक्रिया से जहां अध्यापकों को डिमांड भेजने में आसानी रहीं। वहीं, विभाग को डिमांड तुरंत मिल भी गई है।
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पाठ्य-पुस्तक में भी किए जा रहे बदलाव
विभाग की ओर से इस बार पाठ्य पुस्तक में भी बदलाव किए जा रहे हैं। इस पर विभाग ने विद्यालयों से दोबारा डिमांड मांगी है। प्रक्रिया सरल होने के चलते अध्यापकों ने तेजी से दोबारा डिमांड भेज दी है। अब पुस्तकों में बदलाव अंतिम चरण में है। एससीईआरटी की ओर से पुस्तकों सदस्यों को भेज दी है। प्रतिक्रिया मिलने के बाद पुस्तकों की छपाई शुरू की जाएगी। विभाग ने एक महीने में जिले के सभी विद्यार्थियों के लिए पुस्तकें प्रकाशित करने का लक्ष्य रखा है, ताकि अप्रैल में पुस्तकें भिजवा दी जाएं।
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बालवाटिका से आठवीं तक पढ़ रहे 76 हजार विद्यार्थी
बता दें कि राजकीय विद्यालयों में पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को निशुल्क पुस्तकें दी जाती हैं। बालवाटिका से पांचवीं तक करीब 45 हजार 771 विद्यार्थी हैं। वहीं, छठी से आठवीं तक करीब 30 हजार 176 बच्चे पढ़ रहे हैं।
शिक्षा की गुणवत्ता में आएगा सुधार
राजकीय अध्यापक संघ से अजेंद्र कुंडू ने कहा कि हर साल पुस्तकें भिजवाने में देरी होती थी। इससे शिक्षकों को पढ़ाने और बच्चों को पढ़ने में परेशानी आती थी। पुस्तकें देरी से आने का मुद्दा राजकीय अध्यापक संघ उठाता रहा है। इस बार डिमांड वार्षिक परीक्षा से पहले मांगी गई है। नए सत्र में समय पर पुस्तकें आने से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
वर्जन-
विद्यार्थियों को इस साल परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। विभाग की ओर से एमआईएस पोर्टल पर किताबों की डिमांड की गई थी। अप्रैल के पहले सप्ताह में पुस्तकें आने की संभावना है।
- अनिल मलिक, जिला एफएलएन कोऑर्डिनेटर, पानीपत।