{"_id":"6acff18202abee651e0d491d","slug":"stricter-grap-norms-ptz-cameras-to-be-installed-in-boiler-feeding-areas-by-the-31st-panipat-news-c-244-1-pnp1001-166016-2026-10-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panipat News: ग्रैप की सख्ती, बॉयलर फीडिंग एरिया में 31 तक लगाने होंगे पीटीजेड कैमरे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panipat News: ग्रैप की सख्ती, बॉयलर फीडिंग एरिया में 31 तक लगाने होंगे पीटीजेड कैमरे
विज्ञापन
उद्यमियों की बैठक लेते अधिकारी। स्रोत : सोशल मीडिया
माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। प्रदूषण के नाम पर कार्रवाई के विरोध और आंदोलन की चेतावनी के बीच हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) के दौरान औद्योगिक इकाइयों पर सख्ती बढ़ा दी है। इसके तहत पीटीजेड कैमरों से बॉयलर फीडिंग एरिया की निगरानी की जाएगी, ताकि संचालन पर नजर रखी जा सके।
बुधवार को बोर्ड अधिकारियों ने औद्योगिक एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर प्रदूषण नियंत्रण नियमों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बॉयलर फीडिंग एरिया में 31 अक्तूबर तक पैन-टिल्ट-जूम (पीटीजेड) कैमरे लगाने होंगे। वहीं, बॉयलर से निकलने वाले उत्सर्जन में सस्पेंडेड पार्टिकुलेट मैटर (एसपीएम) की मात्रा 50 से नीचे रखना अनिवार्य है। इस मानक में कोई छूट नहीं दी गई है।
क्षेत्रीय अधिकारी भूपेंद्र चहल की अध्यक्षता में हुई बैठक में एसडीओ कुलदीप और दिव्यांश सहित 100 से अधिक उद्योगपति शामिल हुए। अधिकारियों ने प्रदूषण नियंत्रण उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया।
विज्ञापन
पानीपत डायर्स एसोसिएशन के बैनर तले उद्यमियों ने पिछले सप्ताह जिमखाना क्लब में बैठक कर प्रदूषण के नाम पर जांच और कार्रवाई का विरोध किया था। उनका आरोप था कि बोर्ड की कार्रवाई से उद्योगों के सामने कारोबार बंद होने का संकट खड़ा हो रहा है। उद्यमियों ने कहा था कि ऑनलाइन निगरानी के दौरान तकनीकी खामी आने पर भी क्लोजर नोटिस जारी कर दिए जाते हैं। इस बैठक को करीब 10 औद्योगिक एसोसिएशनों का समर्थन मिला था। हालांकि, बुधवार को बोर्ड की बैठक में विरोध करने वाले समूह के प्रमुख पदाधिकारी शामिल नहीं हुए।
निर्माण कार्यों, चिमनियों के धुएं पर निगरानी
एचएसपीसीबी ने निर्देश दिए कि 500 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाली फैक्ट्रियों में निर्माण या तोड़फोड़ का काम चलने पर डस्ट पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। संबंधित इकाइयों को निर्धारित नियमों का पालन भी करना होगा। इसके अलावा, टैंकरों से होने वाले डिस्चार्ज और चिमनियों से निकलने वाले काले धुएं पर कड़ी नजर रखी जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, अगले महीने से वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की विशेष टीमें उद्योगों का औचक निरीक्षण शुरू कर सकती हैं। ऐसे में उद्यमियों को बॉयलरों का निर्धारित मानकों के अनुसार संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
विज्ञापन
पानीपत। प्रदूषण के नाम पर कार्रवाई के विरोध और आंदोलन की चेतावनी के बीच हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) के दौरान औद्योगिक इकाइयों पर सख्ती बढ़ा दी है। इसके तहत पीटीजेड कैमरों से बॉयलर फीडिंग एरिया की निगरानी की जाएगी, ताकि संचालन पर नजर रखी जा सके।
बुधवार को बोर्ड अधिकारियों ने औद्योगिक एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर प्रदूषण नियंत्रण नियमों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बॉयलर फीडिंग एरिया में 31 अक्तूबर तक पैन-टिल्ट-जूम (पीटीजेड) कैमरे लगाने होंगे। वहीं, बॉयलर से निकलने वाले उत्सर्जन में सस्पेंडेड पार्टिकुलेट मैटर (एसपीएम) की मात्रा 50 से नीचे रखना अनिवार्य है। इस मानक में कोई छूट नहीं दी गई है।
विज्ञापन
क्षेत्रीय अधिकारी भूपेंद्र चहल की अध्यक्षता में हुई बैठक में एसडीओ कुलदीप और दिव्यांश सहित 100 से अधिक उद्योगपति शामिल हुए। अधिकारियों ने प्रदूषण नियंत्रण उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया।
विज्ञापन
पानीपत डायर्स एसोसिएशन के बैनर तले उद्यमियों ने पिछले सप्ताह जिमखाना क्लब में बैठक कर प्रदूषण के नाम पर जांच और कार्रवाई का विरोध किया था। उनका आरोप था कि बोर्ड की कार्रवाई से उद्योगों के सामने कारोबार बंद होने का संकट खड़ा हो रहा है। उद्यमियों ने कहा था कि ऑनलाइन निगरानी के दौरान तकनीकी खामी आने पर भी क्लोजर नोटिस जारी कर दिए जाते हैं। इस बैठक को करीब 10 औद्योगिक एसोसिएशनों का समर्थन मिला था। हालांकि, बुधवार को बोर्ड की बैठक में विरोध करने वाले समूह के प्रमुख पदाधिकारी शामिल नहीं हुए।
निर्माण कार्यों, चिमनियों के धुएं पर निगरानी
एचएसपीसीबी ने निर्देश दिए कि 500 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाली फैक्ट्रियों में निर्माण या तोड़फोड़ का काम चलने पर डस्ट पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। संबंधित इकाइयों को निर्धारित नियमों का पालन भी करना होगा। इसके अलावा, टैंकरों से होने वाले डिस्चार्ज और चिमनियों से निकलने वाले काले धुएं पर कड़ी नजर रखी जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, अगले महीने से वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की विशेष टीमें उद्योगों का औचक निरीक्षण शुरू कर सकती हैं। ऐसे में उद्यमियों को बॉयलरों का निर्धारित मानकों के अनुसार संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।