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Panipat News: तानों को बनाया ताकत, सुषमा बनीं एथलेटिक्स कोच
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एथलीट कोच सुषमा। स्वयं
संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। समाज में ऐसी कई महिलाएं हैं, जिन्होंने रूढ़िवादी सोच का सामना करते हुए अपनी मेहनत के दम पर अलग पहचान बनाई है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी एथलेटिक्स कोच सुषमा की है। उन्होंने तानों को अपनी ताकत बनाया और अब बतौर एथलेटिक्स कोच बेटियों की प्रतिभा को तराशने का काम कर रही हैं।
सुषमा ने 11वीं कक्षा में एथलेटिक्स खेलना शुरू किया था। उस समय वह 800 और 1500 मीटर की दौड़ में हिस्सा लेती थीं। गांव में लोग उनके परिवार से लड़की की शादी करने को कहते थे। अभ्यास के लिए बाहर जाने और देर से लौटने पर भी उन्हें बातें सुननी पड़ती थीं। सुषमा ने इन टिप्पणियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।
चुनौतियों का सामना : सुषमा के अनुसार, उस दौर में लड़कियों के लिए खेलों में कॅरिअर बनाना आसान नहीं था। गांव में लड़कियों के घर से बाहर निकलने को लेकर कई धारणाएं थीं। अभ्यास के लिए देर से लौटने पर लोगों को बातें बनाने का मौका मिलता था। परिवार को भी ऐसी टिप्पणियां सुननी पड़ती थीं। सुषमा ने इन सभी बाधाओं के बावजूद खेल जारी रखा।
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कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में लिया िहस्सा
उन्होंने वर्ष 2007 में अपना पहला नेशनल खेला। इसके बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्राप्त किया। वर्ष 2010 में उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में भाग लिया फिर 2014 में एशियन गेम्स में भी देश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला।
इन प्रतियोगिताओं तक पहुंचना उनके खेल जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धियां रहीं। 2007 में उन्हें खेल कोटे से रेलवे में नौकरी मिली। इसके बाद वर्ष 2017 में वह आयकर विभाग में नौकरी पर लगीं। लगातार आगे बढ़ते हुए उन्होंने वर्ष 2024 में सरकारी कोच के पद पर नौकरी हासिल की।
बेटियों को दे रहीं प्रशिक्षण और प्रेरणा
वर्तमान में सुषमा पानीपत में सरकारी एथलेटिक्स कोच के रूप में सेवाएं दे रही हैं। उनके पास करीब 10 से 15 लड़कियां एथलेटिक्स का अभ्यास कर रही हैं। इनमें से कुछ खिलाड़ी नेशनल स्तर तक पहुंच चुकी हैं। सुषमा खिलाड़ियों को नियमित अभ्यास करवाती हैं और प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करती हैं। उनका प्रयास है कि बेटियां खेलों में अपनी प्रतिभा पहचानें और जिले व प्रदेश का नाम रोशन करें।
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पानीपत। समाज में ऐसी कई महिलाएं हैं, जिन्होंने रूढ़िवादी सोच का सामना करते हुए अपनी मेहनत के दम पर अलग पहचान बनाई है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी एथलेटिक्स कोच सुषमा की है। उन्होंने तानों को अपनी ताकत बनाया और अब बतौर एथलेटिक्स कोच बेटियों की प्रतिभा को तराशने का काम कर रही हैं।
सुषमा ने 11वीं कक्षा में एथलेटिक्स खेलना शुरू किया था। उस समय वह 800 और 1500 मीटर की दौड़ में हिस्सा लेती थीं। गांव में लोग उनके परिवार से लड़की की शादी करने को कहते थे। अभ्यास के लिए बाहर जाने और देर से लौटने पर भी उन्हें बातें सुननी पड़ती थीं। सुषमा ने इन टिप्पणियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।
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चुनौतियों का सामना : सुषमा के अनुसार, उस दौर में लड़कियों के लिए खेलों में कॅरिअर बनाना आसान नहीं था। गांव में लड़कियों के घर से बाहर निकलने को लेकर कई धारणाएं थीं। अभ्यास के लिए देर से लौटने पर लोगों को बातें बनाने का मौका मिलता था। परिवार को भी ऐसी टिप्पणियां सुननी पड़ती थीं। सुषमा ने इन सभी बाधाओं के बावजूद खेल जारी रखा।
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कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में लिया िहस्सा
उन्होंने वर्ष 2007 में अपना पहला नेशनल खेला। इसके बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्राप्त किया। वर्ष 2010 में उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में भाग लिया फिर 2014 में एशियन गेम्स में भी देश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला।
इन प्रतियोगिताओं तक पहुंचना उनके खेल जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धियां रहीं। 2007 में उन्हें खेल कोटे से रेलवे में नौकरी मिली। इसके बाद वर्ष 2017 में वह आयकर विभाग में नौकरी पर लगीं। लगातार आगे बढ़ते हुए उन्होंने वर्ष 2024 में सरकारी कोच के पद पर नौकरी हासिल की।
बेटियों को दे रहीं प्रशिक्षण और प्रेरणा
वर्तमान में सुषमा पानीपत में सरकारी एथलेटिक्स कोच के रूप में सेवाएं दे रही हैं। उनके पास करीब 10 से 15 लड़कियां एथलेटिक्स का अभ्यास कर रही हैं। इनमें से कुछ खिलाड़ी नेशनल स्तर तक पहुंच चुकी हैं। सुषमा खिलाड़ियों को नियमित अभ्यास करवाती हैं और प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करती हैं। उनका प्रयास है कि बेटियां खेलों में अपनी प्रतिभा पहचानें और जिले व प्रदेश का नाम रोशन करें।