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समय पर नहीं उठाए कदम 40 फीसद डॉक्टर संक्रमित
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पानीपत। कोरोना की तीसरी लहर डॉक्टरों के लिए घातक साबित हो रही है। इस लहर में अब तक चार सरकारी डॉक्टर दंपती और 18 सरकारी डॉक्टर संक्रमित हो चुके हैं। असल में, इस बार समय पर कदम नहीं उठाए गए नतीजा 40 प्रतिशत डॉक्टर के साथ ही 15 से अधिक स्वास्थ्य कर्मचारी संक्रमित हो गए।
अस्पताल के नेत्र एवं हड्डी रोग वार्ड पूरी तरह से बंद है। दोनों वार्ड का 90 प्रतिशत स्टाफ संक्रमित है। पीएमओ, डिप्टी एमएस, कोरोना टीकाकरण के नोडल अधिकारी, दो एनेस्थेटिस्ट, दो नेत्र रोग विशेषज्ञ, दो हड्डी रोग विशेषज्ञ, दो एमओ समेत कई और डॉक्टर कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। पिछली दो लहरों में एहतियाती कदमों के तहत ओपीडी को बंद कर दिया गया था, इसके साथ ही सभी बैठकें ऑनलाइन हो रही थीं लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।
डॉक्टरों में संक्रमण की संभावित वजह
केस बढ़ने के बावजूद ओपीडी-सर्जरी रही जारी
पांच दिन पहले तक जिले में कोरोना के रोगियों की संख्या 750 के पास हो चुकी थी। जिले में हर रोज 100-120 की औसत से कोरोना के रोगी आ रहे थे। इसके बावजूद सिविल अस्पताल में ओपीडी जारी रही। सर्जन सर्जरी करते रहे। मरीजों के सीधा संपर्क में आने से एक डेंटल सर्जन, दो नेत्र रोग विशेषज्ञ व दो हड्डी विशेषज्ञ कोरोना संकमित हो गए।
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बैठकों के लिए नहीं चुना ऑनलाइन माध्यम
कोरोना के घातक होने के बाद भी सिविल अस्पताल में डॉक्टरों की बैठकों का दौर शुरू रहा। सिविल सर्जन व पीएमओ डॉक्टरों की तैयारियों को लेकर मीटिंग लेते रहे। यहां पर पीएमओ व डिप्टी एमएस कोरोना संक्रमित हो गए। बैठकें ऑनलाइन नहीं की गईं।
बाहर से घूम कर आए डॉक्टर हुए संक्रमित
जिले के कुछ संक्रमित डॉक्टर ऐसे भी हैं, जो हिमाचल व उत्तराखंड परिवार के साथ घूमने गए थे। वहां से लौटने के बाद तबीयत बिगड़ी तो जांच कराने पर वह कोरोना संक्रमित मिले।
जांच कराने से बचते रहे डॉक्टर
सिविल अस्पताल के सभी डॉक्टर एक दूसरे के संपर्क में थे। कई डॉक्टरों के लगातार संपर्क में आने के बाद कुछ डॉक्टरों ने अपनी जांच नहीं कराई। वे लगातार ओपीडी करते रहे। मीटिंग में शामिल होते रहे, बाद में उनकी तबीयत बिगड़ी तो जांच कराने पर वे पॉजिटिव मिले। उनके स्टाफ के सदस्य भी कोरोना संक्रमित हो गए।
सभी डॉक्टरों को हिदायतें दी है कि सतर्कता से काम करें
एक साथ बड़ी संख्या में डॉक्टरों का संक्रमित होना चिंतनीय है। डॉक्टरों को हिदायतें दी गई हैं कि सतर्कता से काम करें। अगर स्टाफ का कोई साथी संक्रमित मिलता है तो अपनी जांच अवश्य कराएं। - डॉ. जितेंद्र कादियान, सिविल सर्जन
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अस्पताल के नेत्र एवं हड्डी रोग वार्ड पूरी तरह से बंद है। दोनों वार्ड का 90 प्रतिशत स्टाफ संक्रमित है। पीएमओ, डिप्टी एमएस, कोरोना टीकाकरण के नोडल अधिकारी, दो एनेस्थेटिस्ट, दो नेत्र रोग विशेषज्ञ, दो हड्डी रोग विशेषज्ञ, दो एमओ समेत कई और डॉक्टर कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। पिछली दो लहरों में एहतियाती कदमों के तहत ओपीडी को बंद कर दिया गया था, इसके साथ ही सभी बैठकें ऑनलाइन हो रही थीं लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।
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डॉक्टरों में संक्रमण की संभावित वजह
केस बढ़ने के बावजूद ओपीडी-सर्जरी रही जारी
पांच दिन पहले तक जिले में कोरोना के रोगियों की संख्या 750 के पास हो चुकी थी। जिले में हर रोज 100-120 की औसत से कोरोना के रोगी आ रहे थे। इसके बावजूद सिविल अस्पताल में ओपीडी जारी रही। सर्जन सर्जरी करते रहे। मरीजों के सीधा संपर्क में आने से एक डेंटल सर्जन, दो नेत्र रोग विशेषज्ञ व दो हड्डी विशेषज्ञ कोरोना संकमित हो गए।
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बैठकों के लिए नहीं चुना ऑनलाइन माध्यम
कोरोना के घातक होने के बाद भी सिविल अस्पताल में डॉक्टरों की बैठकों का दौर शुरू रहा। सिविल सर्जन व पीएमओ डॉक्टरों की तैयारियों को लेकर मीटिंग लेते रहे। यहां पर पीएमओ व डिप्टी एमएस कोरोना संक्रमित हो गए। बैठकें ऑनलाइन नहीं की गईं।
बाहर से घूम कर आए डॉक्टर हुए संक्रमित
जिले के कुछ संक्रमित डॉक्टर ऐसे भी हैं, जो हिमाचल व उत्तराखंड परिवार के साथ घूमने गए थे। वहां से लौटने के बाद तबीयत बिगड़ी तो जांच कराने पर वह कोरोना संक्रमित मिले।
जांच कराने से बचते रहे डॉक्टर
सिविल अस्पताल के सभी डॉक्टर एक दूसरे के संपर्क में थे। कई डॉक्टरों के लगातार संपर्क में आने के बाद कुछ डॉक्टरों ने अपनी जांच नहीं कराई। वे लगातार ओपीडी करते रहे। मीटिंग में शामिल होते रहे, बाद में उनकी तबीयत बिगड़ी तो जांच कराने पर वे पॉजिटिव मिले। उनके स्टाफ के सदस्य भी कोरोना संक्रमित हो गए।
सभी डॉक्टरों को हिदायतें दी है कि सतर्कता से काम करें
एक साथ बड़ी संख्या में डॉक्टरों का संक्रमित होना चिंतनीय है। डॉक्टरों को हिदायतें दी गई हैं कि सतर्कता से काम करें। अगर स्टाफ का कोई साथी संक्रमित मिलता है तो अपनी जांच अवश्य कराएं। - डॉ. जितेंद्र कादियान, सिविल सर्जन