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संयम से ही आत्मा का उत्थान संभव : अरुण चंद्र

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 12 Aug 2025 02:53 AM IST
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Soul's upliftment is possible only through self-restraint: Arun Chandra
अग्रवाल मंडी में प्रवचन सुनते श्रद्धालु। स्रोत : स्वयं
- जैन स्थानक अग्रवाल मंडी में अरुण चंद्र महाराज ने चातुर्मास में किए प्रवचन
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संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। जैन स्थानक अग्रवाल मंडी में अरुण चंद्र महाराज ने चातुर्मास में सोमवार को मंगल प्रवचन किए। उनके साथ शिष्य अभिषेक मुनि व अभिनंदन मुनि भी मौजूद रहे। उन्होंने छह आवश्यक में से छठे आवश्यक प्रत्याख्यान के महत्व पर प्रकाश डाला।
मुनि ने बताया कि यह आने वाले पापों से बचाव का एक सशक्त कवच है। प्रतिक्रमण जहां पूर्व और ध्यान वर्तमान के पापों को नष्ट करता है। वहीं प्रत्याख्यान भविष्य के पापों से रक्षा करता है। भविष्य में कौन सा प्रलोभन मिलेगा। यह कोई नहीं जानता इसलिए संयम और नियम ले लेना ही सबसे बड़ा बचाव है। जैन धर्म की शुरुआत त्याग से होती है और यही इसे महान बनाता है। दुनिया की दौड़ भोग की ओर है लेकिन महावीर की दौड़ त्याग की ओर थी। त्याग से ही स्मारक और मीनार बनती हैं। संयम से ही आत्मा का उत्थान होता है। प्रवचन के बीच मुनि ने भावपूर्ण पंक्तियां सुनाईं, कौन करता भला है किसी के लिए, आदमी न बना आदमी के लिए, एक ईश्वर बना है सभी के लिए। तुम्हारे त्याग ने गुरुवर हमें त्याग से जोड़ा है, तुम ही तीर्थ हो, मंदिर हो, तुम्हारे त्याग ने हमें त्याग की ओर मोड़ा है। मेरी एक ही तमन्ना है, मेरे दाता संग रहना है।
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ईर्ष्या और प्रतिशोध न रखने का दिया संदेश
पानीपत। राजाखेड़ी गांव में रोहित मुनि महाराज, श्रेयांश मुनि महाराज व रजत मुनि महाराज के चातुर्मास में रविवार को रोहित मुनि ने प्रवचन दिए। रोहित मुनि ने श्रावकों को ईर्ष्या भावना को त्यागने का संदेश दिया। मुनि ने बताया कि ईर्ष्या की भावना से हम कर्मों का बंधन कर लेते हैं जिनमें अंदर ही अंदर आदमी ईर्ष्या की आग में जलता रहता है। उसे सारी रात नींद नहीं आती। इसी प्रकार से प्रतिशोध की भावना वाला व्यक्ति भी हमेशा परेशान रहता है। ईर्ष्या और प्रतिशोध की भावना नहीं रखनी चाहिए। अच्छे काम हमेशा समय से करने चाहिए। भगवान का विचार करके एकरूप हो जाना चाहिए। जो गुणों और त्याग में बड़ा हो उसको प्रणाम करना चाहिए। संवाद
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