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बिना सतगुरु कल्याण नहीं है संभव : बाबा उमाकांत
Fri, 26 Jun 2026 02:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Fri, 26 Jun 2026 02:52 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसीसमालखा। महाभारत युद्ध के उपरांत जब भगवान कृष्ण धाम लौटने लगे तो पांडवों ने भी उनके साथ चलने की इच्छा जताई। कृष्ण ने उन्हें स्पष्ट रूप से कहा कि वे उन्हें साथ नहीं ले जा सकते। इसके लिए उन्हें किसी समर्थ गुरु की खोज कर नाम की कमाई करनी होगी।
यह वचन संत बाबा उमाकांत महाराज ने समालखा में आयोजित सत्संग कार्यक्रम में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहे। उन्होंने कहा कि आदिकाल से चला आ रहा ध्वन्यात्मक नाम गुप्त होता है और उसे समय के पूर्ण गुरु के मुख से सुनना आवश्यक है। जब संत-सतगुरु जीव को पांच नामों का रहस्य बताते हैं, तभी उसे जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति प्राप्त होती है।
बाबा उमाकांत महाराज ने कहा कि सतगुरु द्वारा बताए गए ध्वन्यात्मक नाम से जहां मोक्ष और आत्मिक शांति की प्राप्ति होती है, वहीं संतों द्वारा समय-समय पर जागृत किए गए वर्णात्मक नाम से सांसारिक दुखों, कष्टों और विपत्तियों में राहत मिलती है।
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उन्होंने कहा कि जिस प्रकार त्रेता युग में ‘राम’, द्वापर युग में ‘कृष्ण’, कबीर साहब के समय ‘सत साहेब’ और गुरु नानक देव के समय ‘वाहे गुरु’ नाम की विशेष महिमा रही, उसी प्रकार वर्तमान समय में ‘जय गुरु देव’ नाम पूरी तरह जागृत और प्रभावशाली है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि संकट और विपत्ति के समय पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ इस नाम का स्मरण करें।
बाबा उमाकांत महाराज ने कहा कि आने वाला समय चुनौतियों और कठिनाइयों से भरा हो सकता है। ऐसे में आध्यात्मिक साधना और नाम-स्मरण ही मनुष्य का सहारा बनेंगे। उन्होंने श्रद्धालुओं को आगामी 27, 28 और 29 जुलाई को जयपुर में आयोजित होने वाले गुरु पूर्णिमा महोत्सव में भाग लेने का भी निमंत्रण दिया।
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यह वचन संत बाबा उमाकांत महाराज ने समालखा में आयोजित सत्संग कार्यक्रम में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहे। उन्होंने कहा कि आदिकाल से चला आ रहा ध्वन्यात्मक नाम गुप्त होता है और उसे समय के पूर्ण गुरु के मुख से सुनना आवश्यक है। जब संत-सतगुरु जीव को पांच नामों का रहस्य बताते हैं, तभी उसे जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति प्राप्त होती है।
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बाबा उमाकांत महाराज ने कहा कि सतगुरु द्वारा बताए गए ध्वन्यात्मक नाम से जहां मोक्ष और आत्मिक शांति की प्राप्ति होती है, वहीं संतों द्वारा समय-समय पर जागृत किए गए वर्णात्मक नाम से सांसारिक दुखों, कष्टों और विपत्तियों में राहत मिलती है।
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उन्होंने कहा कि जिस प्रकार त्रेता युग में ‘राम’, द्वापर युग में ‘कृष्ण’, कबीर साहब के समय ‘सत साहेब’ और गुरु नानक देव के समय ‘वाहे गुरु’ नाम की विशेष महिमा रही, उसी प्रकार वर्तमान समय में ‘जय गुरु देव’ नाम पूरी तरह जागृत और प्रभावशाली है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि संकट और विपत्ति के समय पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ इस नाम का स्मरण करें।
बाबा उमाकांत महाराज ने कहा कि आने वाला समय चुनौतियों और कठिनाइयों से भरा हो सकता है। ऐसे में आध्यात्मिक साधना और नाम-स्मरण ही मनुष्य का सहारा बनेंगे। उन्होंने श्रद्धालुओं को आगामी 27, 28 और 29 जुलाई को जयपुर में आयोजित होने वाले गुरु पूर्णिमा महोत्सव में भाग लेने का भी निमंत्रण दिया।