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Panipat News: पानीपत को जिला बनाने के संघर्ष में आगे रहे थे रूपराम यादव

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 11 Aug 2024 02:36 AM IST
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Roopram Yadav was at the forefront of the struggle to make Panipat a district
माई सिटी रिपोर्टर
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पानीपत। पानीपत को जिला बनाने में संघर्ष के साथी या कहें अग्रणी भूमिका निभाने वाले रूपराम यादव का निधन हो गया। वे सेक्टर-11 में रह रहे थे। उनके पांच पुत्र उनकी वैचारिक विरासत को संभाल रहे हैं। वे महात्मा गांधी को अपना गुरु मानते थे। वे 1991-92 में पानीपत को जिला बनाने के संघर्ष में सक्रिय रहे।
उन्होंने पानीपत नागरिक मंच के तत्कालीन प्रधान स्व. महेश दत्त शर्मा के साथ मिलकर आवाज उठाई थी। उनके पास उस समय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी थी। गांधी ग्लोबल फैमिली के महासचिव एडवोकेट राम मोहन राय ने पानीपत के वयोवृद्ध गांधीवादी, खादी व रचनात्मक कार्यकर्ता रूपराम यादव के निधन पर शोक व्यक्त किया है। परिजनों ने बताया कि उनका सौ वर्ष की आयु से दो दिन पहले निधन हो गया।
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उन्हाेंने सोम भाई और भीम सेन के साथ मिलकर खादी ग्रामोद्योग की स्थापना। वे गुरु महात्मा गांधी के संदेश, सिद्धांतों व विचारों का प्रचार-प्रसार करते थे। उनका पानीपत में हथकरघा के माध्यम कंबल उद्योग को विकसित करने में बड़ा योगदान रहा। इतना ही नहीं पानीपत को जिला बनाने के आंदोलन में भी उन्होंने अग्रणी भूमिका निभाई। महेश भाई के साथ पानीपत नागरिक मंच के संस्थापकों में से एक थे।
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यूपी के बड़ौत में हुआ था जन्म
परिजनों ने बताया कि उनका जन्म बड़ौत (उत्तर प्रदेश) के एक गांव में 1924 में हुआ था। वे गांधी विचार में ओतप्रोत होकर डॉ. गोपी चंद भार्गव (पूर्व मुख्यमंत्री, पंजाब) और खादी जगत की महान विभूति सोमदत्त वेदालंकार और चौधरी भीमसेन के साथ जुड़े। इनकी प्रेरणा से वर्ष 1956 में खादी आश्रम पानीपत में सेवा प्रारंभ की। वे ऊनी विभाग के अनेक वर्षों तक प्रबंधक रहे। वर्ष 1967 में पानीपत में प्रांतीय नशा बंदी सम्मेलन, दादा गणेशी लाल, सोमभाई, स्वामी आनंद रंक बंधु, जगदीश चंद्र जौहर, चौधरी निरंजन सिंह, प्रभात शोभा पंडित, प्रो. शेर सिंह व सीता रानी के संयुक्त नेतृत्वकारी दस्ते में शामिल रहे। उनकी पुत्रवधू ओमवती यादव नगर की प्रमुख शिक्षाविद हैं। उनकी अन्य पुत्रवधू मधु यादव माता सीता रानी सेवा संस्था में पदाधिकारी हैं। उनकी पत्नी स्व. विद्या देवी भी जीवनपर्यंत महिला आर्य समाज में सक्रिय थीं।
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