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बढ़ते पेट्रोल पदार्थों के दाम की मार, छोड़नी पड़ेगी कार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 10 Oct 2021 11:45 PM IST
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Rising petrol prices hit, will have to leave the car
पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ते दामों का आम आदमी के जीवन और उसकी जेब पर खासा असर पड़ा है। महज 10 माह में पेट्रोल-डीजल के दाम 20 फीसदी तक बढ़ गए हैं। रसोई गैस में प्रति सिलिंडर 100 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इनसे आम आदमी के यातायात से लेकर रसोई का बजट बिगड़ चुका है। आम आदमी कार ड्राइव तक छोड़ने को मजबूर हैं व बाइक शेयरिंग से ही काम चलाने की योजना बना रहे हैं।
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डीजल के महंगे होने की वजह से ट्रांसपोर्टेशन पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। माल भाड़ा बढ़ने से आम आदमी की जरूरत की सभी चीजें महंगी हो रही हैं। रसोई गैस के दामों में आई तेजी की वजह से घर में खाना बनाने से लेकर बाहर से खाना मंगवाने तक के दाम बढ़े हैं। इनका असर एक नहीं बल्कि आम आदमी की मूलभूत आवश्यकताओं रोटी, कपड़ा और मकान तक पर भी पड़ा है।
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डीजल दाम बढ़े तो माल भाड़ा भी बढ़ा। जिससे हर प्रकार की खाद्य सामग्री के दामों में बढ़ोतरी हुई है। पहले एक छोटे परिवार की रसोई का खर्च 2 हजार रुपये तक था। जो अब 4 हजार रुपये को पार कर गया है। खास बात ये है कि पहले एक रुपये में मिलने वाला गोल गप्पा आज 5 रुपये का है। इनका कहना है कि थोक विक्रेता उन्हें पहले से कई गुणा दाम पर मसाले बेचते हैं। इन मसालों को उपयोग करके ही गोलगप्पों का पानी तैयार किया जाता है। कम दाम में अगर गोलगप्पा बेचा तो रोजी रोटी तक लाले पड़ जाएंगे।
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रेडीमेड जूते और कपड़ों की कीमतों में भारी उछाल
रोटी, कपड़ा और मकान की मूलभूत जरूरतों में कपड़ा और जूते दूसरे नंबर पर हैं। इन पर जनवरी से जीएसटी 18 प्रतिशत तक होने जा रही है। दुकानदारों का कहना है कि ये सब माल भाड़ा बढ़ने की वजह से हो रहा है। पहले हजार रुपये से नीचे के आइटम में केवल 5 प्रतिशत तक जीएसटी देय थी, जो अब 13 प्रतिशत बढ़कर 18 प्रतिशत तक पहुंच रही है। कपड़े अब 18 प्रतिशत महंगे होंगे, जबकि जूतों में 20 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होगी।
अब सपनों में ही बनेंगे मकान
महंगाई की मार आम आदमियों के आशियानों पर भी पड़ी है। पिछले एक साल में प्रॉपर्टी कंस्ट्रक्शन के दाम में 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। ट्रांसपोर्टेशन की वजह से कच्चे माल से लेकर तैयार माल कई गुणा महंगा हो गया है। ईंट, सीमेंट, लोहा इत्यादि के दाम भी आसमान छूने लगे हैं। लोहे का दाम 6 हजार रुपये प्रति टन तक बढ़ गया है। अब आम आदमी को उसका आशियाना केवल सपनों में बनाना पड़ रहा है।
छोड़ दी कार, बाइक शेयरिंग कर रहे हैं
शहरवासी बबलू ने बताया कि पहले कार पुलिंग से काम चल जाता था। अब बाइक शेयरिंग से काम चलाना पड़ेगा। एक बाइक पर दो लोग काम चलाते हैं। एक दिन एक तो दूसरा दिन दूसरा बाइक ले आता है।
होटल का खाना छोड़ा, दाल रोटी के पड़े लाले
अमन शर्मा का कहना है कि महंगाई इतनी ज्यादा हो गई है कि होटल के खाने की आदत बदल दी है। अब तो घर पर ही दाल रोटी से काम चलाना पड़ रहा है। रसोई पर महंगाई का ज्यादा असर पड़ा है।
आमदनी हो रही खत्म, बढ़ रहे खर्चे
विकास गौतम ने कहा कि आमदनी तो बढ़ नहीं रही, ऊपर से खर्चे बढ़ते जा रहे हैं। पहले ही घर के खर्च जेब पर भारी पड़ रहे थे, अब पेट्रोलियम पदार्थों में बढ़ोतरी की वजह से पूरा बजट गड़बड़ा गया है।

साइकिल की सवारी अच्छी
राजबीर ने बताया कि कार और बाइक से अच्छा तो साइकिल की सवारी रहेगी। ईंधन की खपत भी नहीं होगी और शरीर भी तंदुरुस्त रहेगा। ऐसा इसलिए है, क्योंकि महंगाई के सामने हमारे पास विकल्प नहीं है।
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