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Panipat News: छठ घाट और सूर्य मंदिर का पूर्वांचल समाज को इंतजार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 16 Sep 2024 07:08 AM IST
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Purvanchal society waits for Chhath Ghat and Sun Temple
पानीपत। पूर्वांचल समाज को घोषणा के एक साल बाद भी छठ घाट और सूर्य मंदिर को लेकर रास्ता नहीं मिल पाया है। थर्मल व एनएफएल रजवाहे और ड्रेन नंबर दो पर छठ घाट का इंतजार है। महराना ग्राम पंचायत ने सूर्य मंदिर के लिए पांच एकड़ जमीन के लिए 55 लाख रुपये प्रति एकड़ का रेट रख दिया है। वे इसको लेकर स्थानीय लोगों से लेकर चंडीगढ़ तक जा चुके हैं। उनको गांव से लेकर चंडीगढ़ तक कोई समाधान नहीं मिला। ऐसे में समाज के लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
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छठ महापर्व पर अक्टूबर-2023 में एनएफएल रजवाहे पर प्रदेश स्तरीय समारोह का आयोजन किया गया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल, पूर्वांचल के दिल्ली के नेता मनोज तिवारी प्रमुख रूप से पहुंचे थे। पूर्वांचल समाज के लोगों ने यहां अपनी मांगों को रखा था। इनमें एनएफएल और थर्मल रजवाहे के साथ ड्रेन नंंबर-दो पर बाबरपुर के नजदीक छठ घाट बनाने की मांग की गई थी। इनके साथ सूर्य मंदिर बनाने की मांग रखी थी। यहां तीनों घाटों के लिए पांच करोड़ रुपये, महराना गांव की जमीन पर पांच एकड़ में सूर्य मंदिर बनाने के साथ मंदिर के लिए प्राथमिक रूप से 21 लाख रुपये देने की घोषणा की थी।
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कोट्स फोटो
पूर्वांचल समाज को कुछ नहीं मिला
उमा शंकर रॉय ने बताया कि पूर्वांचल समाज के लाखों लोग पानीपत में रहते हैं। उनको आज तक केवल वोट के लिए इस्तेमाल किया गया है। पिछले साल छठ महापर्व पर घाट बनाने और मंदिर के लिए जमीन की घोषणा की थी। इनमें से आज तक कुछ नहीं मिला है। महाराना ग्राम पंचायत सरपंच से मिले तो उन्होंने समाज की समिति को मंदिर के लिए जगह नहीं देने की बात कही। वे प्रति एकड़ 55 लाख रुपये जमीन के रेट बता रहे हैं। यह समाज के लोगों की अनदेखी है।
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कोट्स फोटो
नहीं बन पाए छठ घाट
सुशील ठाकुर ने बताया कि पूर्वांचल समाज के लाेगों ने अपने पसीने के साथ पानीपत के उद्योगों को बढ़ाया है। उनकी मेहनत से आज उद्योगों में तैयार माल दूसरे देशों तक पहुंच रहा है। जबकि इनमें मेहनत करने वाले मजदूरों की सुविधाओं की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है। छठ घाट नहीं बन पाए हैं। ऐसे में इस बार भी समाज के लाेगों को अपने स्तर पर तैयारी करनी पड़ेगी।

कोट्स फोटो
सूर्य मंदिर के सहयोग के लिए समाज तैयार
चंदन चौहान ने बताया कि सूर्य मंदिर बनाने में समाज के लोग अपना पूरा सहयोग देने को तैयार हैं। सरकार को इसके लिए जमीन देनी थी, लेकिन उनको आज तक जमीन नहीं मिल पाई है। वे ग्राम पंचायत से लेकर उच्चाधिकारियों तक के चक्कर लगा चुके हैं। समाज की अब तक सुनवाई नहीं हो पाई है। इससे लोगों में रोष व्याप्त है।

कोट्स फोटो
पूर्वांचल समाज अनदेखी का शिकार
पूर्व पार्षद अवधेश यादव ने बताया कि सूर्य मंदिर में सबकी आस्था होती है। पूर्वांचल के साथ स्थानीय लोग भी इसमें पूजा करते। उनकी मांग वर्षों से चली आ रही है, लेकिन किसी ने उनकी तरफ ध्यान नहीं दिया। वे अनदेखी का शिकार हो रहे हैं। समाज के लोगों में इसको लेकर रोष बना हुआ है और वे अपने मुद्दे को हर मंच पर उठाने को तैयार हैं।



कोट्स फोटो
अस्थायी व्यवस्था से हादसे का डर
अमित सिंह ने बताया कि छठ महापर्व में लोगों की आस्था है और लाखों लोग तीन दिवसीय महापर्व में मनाते हैं। अब स्थानीय लोग भी इसमें शामिल होते हैं। छठ घाट न होने पर समाज के लोगों को अस्थायी व्यवस्था करनी पड़ती है। इसमें हादसे होने का भी डर बना रहता है। छठ घाट अब तक बना देने चाहिए थे। इसमें देरी होना समाज का बड़ा मुद्दा है।
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