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Panipat News: अमेरिका में प्रस्तावित टैरिफ ने पानीपत के हैंडलूम निर्यातकों की चिंता बढ़ाई
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पानीपत। अमेरिका के प्रस्तावित नए टैरिफ प्लान ने पानीपत के हैंडलूम निर्यातकों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका में हैंडलूम उत्पादों पर टैरिफ दर छह से बढ़ाकर 22 प्रतिशत तक किए जाने की संभावना है। इससे स्थानीय निर्यातकों का मानना है कि उनका करीब 50 फीसदी कारोबार अमेरिका के साथ जुड़ा हुआ है। इसलिए सबसे ज्यादा मार उन्हीं पर पड़ेगी। नई टैरिफ दरों से यहां के उत्पाद महंगे हो जाएंगे। चीन, बांग्लादेश जैसे देशों के साथ प्रतिस्पर्धा करना काफी कठिन हो जाएगा।
पानीपत में हैंडलूम उद्योग से जुड़ी 20 से 25 हजार इकाइयां हैं। यहां से प्रतिवर्ष करीब 15 से 18 हजार करोड़ का निर्यात होता है जबकि करीब 80 हजार करोड़ का घरेलू बाजार है। यहां के हैंडलूम कारोबारियों की हिस्सेदारी अमेरिकी बाजार में 50 फीसदी है। पानीपत में बने कुशन, कंबल, बेडशीट, बेड कवर, टॉप बेड आइटम, बाथ मैट और अन्य उत्पाद निर्यात होते हैं। अमेरिका के साथ हैंडलूम उत्पाद यूरोपीय देशों, जापान, ऑस्ट्रेलिया भी भेजे जाते हैं।
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टैरिफ बढ़ाने से फायदे और नुकसान दोनों
सीए भूपेंद्र दीक्षित ने बताया, अमेरिका के टैरिफ लगाने से फायदे व नुकसान दोनों हैं। टैरिफ बढ़ाने से भारत के उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार खासकर अमेरिका में महंगा हो जाएगा। ऐसे में उत्पादों की मांग घट सकती है। दूसरे देश अपने उत्पाद उतार सकते हैं। इसका फायदा यह होगा कि स्थानीय व्यापारियों को यहां के बाजारों में अपने उत्पाद उतारने का अवसर मिल जाएगा।
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कोट
अमेरिका में हैंडलूम के उत्पादों की सबसे अधिक खपत है। अब वहां हैंडलूम पर छह प्रतिशत टैरिफ है। इसे दो अप्रैल को बढ़ाया जा सकता है। यह बढ़ता है तो भारतीय उत्पाद महंगा हो जाएगा। ऐसे में अमेरिका में दूसरे देश अपने सस्ते उत्पाद भेजना शुरू कर देंगे। इससे भारतीय उत्पादों की मांग प्रभावित होगी। केंद्र सरकार को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए। सरकार यदि अमेरिका के साथ बातचीत में टैरिफ दरों को कम नहीं करवा सकती है तो वह हैंडलूम पर सब्सिडी बढ़ाकर उद्यमियों को राहत दे सकती है।
-विनोद धमीजा, प्रधान, हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज पानीपत चैप्टर ।
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कोट
अंतरराष्ट्रीय बाजार में हैंडलूम के क्षेत्र में पानीपत के उत्पादों की कोई देश बराबरी नहीं कर सकता। यहां के उत्पाद हटकर हाेते हैं। अमेरिका में टैरिफ बढ़ने से भारतीय व्यापार कुछ प्रभावित जरूर होगा। आज दूसरे देशों के सामने भारत के उत्पादन अपनाने के सिवाय दूसरा बड़ा विकल्प भी नहीं है।
-रमेश वर्मा, प्रधान, हैंडलूम एक्सपोर्टर एसोसिएशन
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पानीपत में हैंडलूम उद्योग से जुड़ी 20 से 25 हजार इकाइयां हैं। यहां से प्रतिवर्ष करीब 15 से 18 हजार करोड़ का निर्यात होता है जबकि करीब 80 हजार करोड़ का घरेलू बाजार है। यहां के हैंडलूम कारोबारियों की हिस्सेदारी अमेरिकी बाजार में 50 फीसदी है। पानीपत में बने कुशन, कंबल, बेडशीट, बेड कवर, टॉप बेड आइटम, बाथ मैट और अन्य उत्पाद निर्यात होते हैं। अमेरिका के साथ हैंडलूम उत्पाद यूरोपीय देशों, जापान, ऑस्ट्रेलिया भी भेजे जाते हैं।
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टैरिफ बढ़ाने से फायदे और नुकसान दोनों
सीए भूपेंद्र दीक्षित ने बताया, अमेरिका के टैरिफ लगाने से फायदे व नुकसान दोनों हैं। टैरिफ बढ़ाने से भारत के उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार खासकर अमेरिका में महंगा हो जाएगा। ऐसे में उत्पादों की मांग घट सकती है। दूसरे देश अपने उत्पाद उतार सकते हैं। इसका फायदा यह होगा कि स्थानीय व्यापारियों को यहां के बाजारों में अपने उत्पाद उतारने का अवसर मिल जाएगा।
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अमेरिका में हैंडलूम के उत्पादों की सबसे अधिक खपत है। अब वहां हैंडलूम पर छह प्रतिशत टैरिफ है। इसे दो अप्रैल को बढ़ाया जा सकता है। यह बढ़ता है तो भारतीय उत्पाद महंगा हो जाएगा। ऐसे में अमेरिका में दूसरे देश अपने सस्ते उत्पाद भेजना शुरू कर देंगे। इससे भारतीय उत्पादों की मांग प्रभावित होगी। केंद्र सरकार को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए। सरकार यदि अमेरिका के साथ बातचीत में टैरिफ दरों को कम नहीं करवा सकती है तो वह हैंडलूम पर सब्सिडी बढ़ाकर उद्यमियों को राहत दे सकती है।
-विनोद धमीजा, प्रधान, हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज पानीपत चैप्टर ।
कोट
अंतरराष्ट्रीय बाजार में हैंडलूम के क्षेत्र में पानीपत के उत्पादों की कोई देश बराबरी नहीं कर सकता। यहां के उत्पाद हटकर हाेते हैं। अमेरिका में टैरिफ बढ़ने से भारतीय व्यापार कुछ प्रभावित जरूर होगा। आज दूसरे देशों के सामने भारत के उत्पादन अपनाने के सिवाय दूसरा बड़ा विकल्प भी नहीं है।
-रमेश वर्मा, प्रधान, हैंडलूम एक्सपोर्टर एसोसिएशन