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Panipat News: प्रदूषण से बढ़ी उच्च रक्तचाप की समस्या
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पानीपत। एक नवंबर से ही शहर की आबोहवा काफी खराब है। हवा में धूल व धुएं की मात्रा बेहद अधिक है। सुबह शाम छाने वाली स्मॉग से गर्भवतियों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ रहा है। प्रदूषण के कारण गर्भवतियों में उच्च रक्तचाप की समस्याएं बढ़ रही हैं। अब जिला नागरिक अस्पताल में महिला संबंधी रोग की ओपीडी 250 पार हो चुकी है। आमतौर पर यह ओपीडी 140-150 के बीच होती थी। उच्च रक्तचाप के कारण प्री मैच्योर डिलीवरी भी बढ़ रही है।
आमतौर पर प्रतिदिन दो से तीन प्री मैच्योर डिलीवरी होती थी। अब यह प्रतिदिन का आंकड़ा पांच से अधिक है। जिला नागरिक अस्पताल में डिलीवरी का आंकड़ा भी एक हजार पार हो चुका है। महिला रोग विशेषज्ञ गर्भवतियों को सुबह शाम की सैर से बचने की सलाह दे रही हैं। शुक्रवार को शहर का एक्यूआई 169 दर्ज किया गया है। यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। हवा की गुणवत्ता खराब होने से नेत्र व चमड़ी के रोगी भी बढ़े हैं। स्मॉग का प्रकोप लगातार जारी है। यह नेत्र रोगियों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहा है। आंखों की पुतलियों पर महीन कण चिपक रहे हैं। इससे आंखों में लाली व खारिस की परेशानी हो रही है। मोतियाबिंद के रोगियों को भयंकर संक्रमण हो रहा है। स्मॉग के कारण आंखों में जलन, लालपन, पानी आना और खुजली आम हो गई है।
जिला नागरिक अस्पताल में नेत्र रोग संबंधी ओपीडी 200 के पार पहुंच गई है। यह आमतौर पर 80-90 के बीच रहती थी। प्रदूषण की वजह से कार्नियल रोगों में काफी तेजी से इजाफा हुआ है। मोतियाबिंद के साथ साथ ग्लूकोमा, रेटिना और मैक्युलर डिजनरेशन तक के मामले देखने को मिल रहे हैं। यह एक ऐसा रोग है जो मरीज की केंद्रीय दृष्टि को प्रभावित करता है। हवा की गुणवत्ता खराब होने व मौसम में बदलाव के कारण अब स्केबीज के रोगी भी बढ़ने लगे हैं। चमडी रोग संबंधी ओपीडी 300 से अधिक है। चमड़ी रोगियों में बच्चाें की संख्या अधिक है।
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महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. लिपिका बंसल का कहना है कि प्रदूषण का स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। यह गर्भवतियों के लिए बेहद खतरनाक है। इसमें उच्च रक्तचाप की समस्या बनती है। उच्च रक्तचाप प्री मैच्योर डिलीवरी का बड़ा कारण है।
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आमतौर पर प्रतिदिन दो से तीन प्री मैच्योर डिलीवरी होती थी। अब यह प्रतिदिन का आंकड़ा पांच से अधिक है। जिला नागरिक अस्पताल में डिलीवरी का आंकड़ा भी एक हजार पार हो चुका है। महिला रोग विशेषज्ञ गर्भवतियों को सुबह शाम की सैर से बचने की सलाह दे रही हैं। शुक्रवार को शहर का एक्यूआई 169 दर्ज किया गया है। यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। हवा की गुणवत्ता खराब होने से नेत्र व चमड़ी के रोगी भी बढ़े हैं। स्मॉग का प्रकोप लगातार जारी है। यह नेत्र रोगियों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहा है। आंखों की पुतलियों पर महीन कण चिपक रहे हैं। इससे आंखों में लाली व खारिस की परेशानी हो रही है। मोतियाबिंद के रोगियों को भयंकर संक्रमण हो रहा है। स्मॉग के कारण आंखों में जलन, लालपन, पानी आना और खुजली आम हो गई है।
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जिला नागरिक अस्पताल में नेत्र रोग संबंधी ओपीडी 200 के पार पहुंच गई है। यह आमतौर पर 80-90 के बीच रहती थी। प्रदूषण की वजह से कार्नियल रोगों में काफी तेजी से इजाफा हुआ है। मोतियाबिंद के साथ साथ ग्लूकोमा, रेटिना और मैक्युलर डिजनरेशन तक के मामले देखने को मिल रहे हैं। यह एक ऐसा रोग है जो मरीज की केंद्रीय दृष्टि को प्रभावित करता है। हवा की गुणवत्ता खराब होने व मौसम में बदलाव के कारण अब स्केबीज के रोगी भी बढ़ने लगे हैं। चमडी रोग संबंधी ओपीडी 300 से अधिक है। चमड़ी रोगियों में बच्चाें की संख्या अधिक है।
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महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. लिपिका बंसल का कहना है कि प्रदूषण का स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। यह गर्भवतियों के लिए बेहद खतरनाक है। इसमें उच्च रक्तचाप की समस्या बनती है। उच्च रक्तचाप प्री मैच्योर डिलीवरी का बड़ा कारण है।