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Panipat News: डॉक्टर बनने का था सपना, पिता के लिए वकील बन गईं प्रशांता
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डॉक्टर बनने का था सपना, पिता के लिए वकील बन गईं प्रशांता
- छह वर्षों से पानीपत की गांधी कॉलोनी में रहकर कर रहीं वकालत
संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। कहते हैं कि सपने हमेशा अपने नहीं होते, कभी-कभी अपनों के सपने ही जिंदगी की राह तय कर देते हैं। प्रशांता की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। प्रशांता करनाल की रहने वाली हैं लेकिन छह वर्षों से पानीपत की गांधी कॉलोनी में अपने मामा के घर रहकर वकालत कर रही हैं। खुद डॉक्टर बनने का सपना देखा था लेकिन आज वह एक जज्बे और जुनून के साथ वकालत के क्षेत्र में कार्यरत हैं क्योंकि उनके पिता का सपना था कि बेटी वकील बने।
प्रशांता ने बताया कि उसने ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा में मेडिकल विषय लेकर पढ़ाई की थी। उनका लक्ष्य था कि वे डॉक्टर बनें और लोगों की सेवा करें। नीट की परीक्षा भी दी। अंक कम आने के कारण एमबीबीएस नहीं मिल पाया। उन्हें बीडीएस में दाखिला तो मिल गया था लेकिन उनका मन केवल एमबीबीएस करने का था इसलिए उन्होंने फिर से नीट की तैयारी शुरू कर दी लेकिन इसी दौरान उनके जीवन की दिशा बदल गई।
पिता का सपना था कि उनकी बेटी वकालत के क्षेत्र में जाए। समाज के लिए न्याय की लड़ाई लड़े। बेटी ने अपने सपने को कुछ समय के लिए दरकिनार किया और पिता की इच्छा को प्राथमिकता दी। यही वह मोड़ था जिसने प्रशांता को डॉक्टर की जगह वकील बना दिका। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में प्रशांता ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से एलएलबी में दाखिला लिया। वहां से उन्होंने तीन साल की विधि की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद क्रिमिनल लॉ में एलएलएम भी किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पानीपत जिला कोर्ट में वकालत की विधिवत ट्रेनिंग ली।
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पापा की आंखों में देखा गर्व
प्रशांता ने बताया कि जब मैंने डॉक्टर बनने का सपना छोड़ा तो थोड़ी तकलीफ तो हुई लेकिन जब मैंने पापा की आंखों में गर्व देखा। लगा कि शायद इससे बेहतर निर्णय मैं नहीं ले सकती थी। आज मैं कोर्ट में हर केस को पूरी निष्ठा से लड़ती हूं और यही मेरे लिए सच्ची सेवा है। उन्होंने बताया कि पापा भी समाजसेवा से जुड़े रहे हैं। वे अब हरियाणा सफाई कर्मचारी आयोग में वाइस चेयरमैन हैं। प्रशांता का मानना है कि आज की लड़कियों को अपने सपनों के साथ-साथ परिवार की उम्मीदों और समाज की जरूरतों के बीच संतुलन बनाना आना चाहिए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। कहते हैं कि सपने हमेशा अपने नहीं होते, कभी-कभी अपनों के सपने ही जिंदगी की राह तय कर देते हैं। प्रशांता की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। प्रशांता करनाल की रहने वाली हैं लेकिन छह वर्षों से पानीपत की गांधी कॉलोनी में अपने मामा के घर रहकर वकालत कर रही हैं। खुद डॉक्टर बनने का सपना देखा था लेकिन आज वह एक जज्बे और जुनून के साथ वकालत के क्षेत्र में कार्यरत हैं क्योंकि उनके पिता का सपना था कि बेटी वकील बने।
प्रशांता ने बताया कि उसने ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा में मेडिकल विषय लेकर पढ़ाई की थी। उनका लक्ष्य था कि वे डॉक्टर बनें और लोगों की सेवा करें। नीट की परीक्षा भी दी। अंक कम आने के कारण एमबीबीएस नहीं मिल पाया। उन्हें बीडीएस में दाखिला तो मिल गया था लेकिन उनका मन केवल एमबीबीएस करने का था इसलिए उन्होंने फिर से नीट की तैयारी शुरू कर दी लेकिन इसी दौरान उनके जीवन की दिशा बदल गई।
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पिता का सपना था कि उनकी बेटी वकालत के क्षेत्र में जाए। समाज के लिए न्याय की लड़ाई लड़े। बेटी ने अपने सपने को कुछ समय के लिए दरकिनार किया और पिता की इच्छा को प्राथमिकता दी। यही वह मोड़ था जिसने प्रशांता को डॉक्टर की जगह वकील बना दिका। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में प्रशांता ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से एलएलबी में दाखिला लिया। वहां से उन्होंने तीन साल की विधि की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद क्रिमिनल लॉ में एलएलएम भी किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पानीपत जिला कोर्ट में वकालत की विधिवत ट्रेनिंग ली।
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पापा की आंखों में देखा गर्व
प्रशांता ने बताया कि जब मैंने डॉक्टर बनने का सपना छोड़ा तो थोड़ी तकलीफ तो हुई लेकिन जब मैंने पापा की आंखों में गर्व देखा। लगा कि शायद इससे बेहतर निर्णय मैं नहीं ले सकती थी। आज मैं कोर्ट में हर केस को पूरी निष्ठा से लड़ती हूं और यही मेरे लिए सच्ची सेवा है। उन्होंने बताया कि पापा भी समाजसेवा से जुड़े रहे हैं। वे अब हरियाणा सफाई कर्मचारी आयोग में वाइस चेयरमैन हैं। प्रशांता का मानना है कि आज की लड़कियों को अपने सपनों के साथ-साथ परिवार की उम्मीदों और समाज की जरूरतों के बीच संतुलन बनाना आना चाहिए।