{"_id":"60145c6f8ebc3e5685795c04","slug":"pradarsan-panipat-news-knl59304932","type":"story","status":"publish","title_hn":"लंगर हटाने पर किसानों को आया गुस्सा, फ्री किया पानीपत और डाहर टोल, कहा टिकैत के आंसू नहीं जाएंगे व्यर्थ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लंगर हटाने पर किसानों को आया गुस्सा, फ्री किया पानीपत और डाहर टोल, कहा टिकैत के आंसू नहीं जाएंगे व्यर्थ
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pradarsan
- फोटो : Panipat
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जिले के दोनों टोल से लंगर हटाने पर जिले के किसानों में रोष है। शुक्रवार की सुबह 11बजकर 18 मिनट पर पानीपत टोल पर सैकड़ों की संख्या में इकट्ठे होकर किसानों ने पानीपत टोल को फ्री करा दिया। वहीं जब टोल को फ्री कराने के बाद किसानों को ध्यान दिया कि वाहन चालकों का टोल तो नहीं, लेकिन फास्टैग से टोल की कटौती हो रही तो किसानों ने जीएम ऑफिस के बाहर जाकर टोल पर फास्टैग को भी फ्री करने की अपील की जिसके बाद टोल द्वारा फास्टैग को भी फ्री करवा दिया गया था।
- किसानों से नहीं देखे गए टिकैत के आंसू, कहा फिर से करेंगे आंदोलन शुरू
गाजीपुर बोर्डर पर छलके टिकैत के आंसुओं ने किसान आंदोलन में यू-टर्न ले लिया है जिसमें जिले के किसानों का कहना है कि सभी बोर्डर से हम सरकार की बात का पालन करके वापिस आ गए थे,लेकिन गाजीपुर में टिकैत के डटे रहने से किसानों में एक बार फिर एकजुट होने की शक्ति आ गई। अब जिले के किसानों का कहना है कि वह फिर से पूर्ण तरीके से आंदोलन को शुरू कर दिया गया है।
लंगर को बंद कराने को लेकर जिले के किसान गुस्साए है और उन्होंने शुक्रवार की सुबह ही लंगर का सामान लाकर लंगर को शुरू कर दिया है। किसानों का कहना है कि अब यह लंगर तभी हटेगा जब किसानों के तीन कानून वापिस ले लिए जाएंगे और सरकार को अब लंगर हटाना भी नहीं चाहिए। किसानों का कहना है कि लंगर बंद कराने से वीरवार को दिल्ली से पंजाब व पंजाब से दिल्ली जाने वाले किसान भूखे गए।
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आंदोलन के दौरान किसान धूप में चक्कर खाकर गिर गया जिसके बाद किसान पर तुरंत शॉल उढा दी गइ जिसके बाद किसान को कुछ समय बाद होश आया। किसानों का कहना है कि किसान आंदोलन में वह कई दिनों से भूखा था जिसके बाद वह बेहोश हो गया था।
किसान आंदोलन में सुबह 11 बजे किसानों के प्रधान कुलदीप बलाना व अन्य तीन ब्लाक के किसान यूनियन प्रधान ने मिलकर बैठक ली जिसमें उनका मुख्य उद्देश्य है कि वह इस बार किसान आंदोलन में किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान नहीं देंगे और अपने आंदोलन को शांति से करेंगे। वहीं इस बार नई रणनीति बनाई गई कि सभी किसान एक साथ रहेंगे जिसमें उपद्रवी नहीं आ पाए और किसी भी तरह से किसानों का नाम बदनाम ना कर सकें। इससे पहले भी किसानों का नाम बदनाम करवाने के लिए सरकार या उपद्रवी कई बार कोशिश कर चुके है। किसान प्रधान कुलदीप बलाना का कहना है कि पहले भी सरकार व उपद्रवी किसानों में फूट डालने की कोशिश कर चुके है,लेकिन इस बार उनकी यह चाल सफल नहीं हो पाऐगी। जिसमें मुख्य रूप से किसान प्रधान कुलदीप बलाना तीन अन्य ब्लॉक के प्रधान, जितेंद्र जागलान,जयकरण ,जसमत टोला ,सतनाम बांगड,ओमप्रकाश जाटल आदी मौजूद रहे।
राकेश टिकैत के गाजीपुर वाले कांड के बाद शुक्रवार को पहले से भी ज्यादा संख्या में किसान पानीपत टोल पर इकट्ठे हुए है जिसमें किसानों में पहले से रोष भी तीन गुना ज्यादा है किसानों का कहना है सरकार को लाल किले वाले पूरे मामले की जांच करानी चाहिए जिसके बाद ही हम किसानों को कुछ बोलें जो भी इस मामले में कसूरवार है उसको जेल में डाले सरकार।
पानीपत टोल पर दिन भर एकता बनाए रखने की एनाउंसमेंट की गई। जिसमें किसानों को बताया व समझाया कि सभी किसानों को अब एकजुटता बना कर रखनी है और टोल पर भी एक साथ रहने की अपील की ताकि पानीपत टोल पर भी लाल किले की तरह काम कोई ओर करके जाए और नाम हमारा आ जाए।
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- किसानों से नहीं देखे गए टिकैत के आंसू, कहा फिर से करेंगे आंदोलन शुरू
गाजीपुर बोर्डर पर छलके टिकैत के आंसुओं ने किसान आंदोलन में यू-टर्न ले लिया है जिसमें जिले के किसानों का कहना है कि सभी बोर्डर से हम सरकार की बात का पालन करके वापिस आ गए थे,लेकिन गाजीपुर में टिकैत के डटे रहने से किसानों में एक बार फिर एकजुट होने की शक्ति आ गई। अब जिले के किसानों का कहना है कि वह फिर से पूर्ण तरीके से आंदोलन को शुरू कर दिया गया है।
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लंगर को बंद कराने को लेकर जिले के किसान गुस्साए है और उन्होंने शुक्रवार की सुबह ही लंगर का सामान लाकर लंगर को शुरू कर दिया है। किसानों का कहना है कि अब यह लंगर तभी हटेगा जब किसानों के तीन कानून वापिस ले लिए जाएंगे और सरकार को अब लंगर हटाना भी नहीं चाहिए। किसानों का कहना है कि लंगर बंद कराने से वीरवार को दिल्ली से पंजाब व पंजाब से दिल्ली जाने वाले किसान भूखे गए।
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आंदोलन के दौरान किसान धूप में चक्कर खाकर गिर गया जिसके बाद किसान पर तुरंत शॉल उढा दी गइ जिसके बाद किसान को कुछ समय बाद होश आया। किसानों का कहना है कि किसान आंदोलन में वह कई दिनों से भूखा था जिसके बाद वह बेहोश हो गया था।
किसान आंदोलन में सुबह 11 बजे किसानों के प्रधान कुलदीप बलाना व अन्य तीन ब्लाक के किसान यूनियन प्रधान ने मिलकर बैठक ली जिसमें उनका मुख्य उद्देश्य है कि वह इस बार किसान आंदोलन में किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान नहीं देंगे और अपने आंदोलन को शांति से करेंगे। वहीं इस बार नई रणनीति बनाई गई कि सभी किसान एक साथ रहेंगे जिसमें उपद्रवी नहीं आ पाए और किसी भी तरह से किसानों का नाम बदनाम ना कर सकें। इससे पहले भी किसानों का नाम बदनाम करवाने के लिए सरकार या उपद्रवी कई बार कोशिश कर चुके है। किसान प्रधान कुलदीप बलाना का कहना है कि पहले भी सरकार व उपद्रवी किसानों में फूट डालने की कोशिश कर चुके है,लेकिन इस बार उनकी यह चाल सफल नहीं हो पाऐगी। जिसमें मुख्य रूप से किसान प्रधान कुलदीप बलाना तीन अन्य ब्लॉक के प्रधान, जितेंद्र जागलान,जयकरण ,जसमत टोला ,सतनाम बांगड,ओमप्रकाश जाटल आदी मौजूद रहे।
राकेश टिकैत के गाजीपुर वाले कांड के बाद शुक्रवार को पहले से भी ज्यादा संख्या में किसान पानीपत टोल पर इकट्ठे हुए है जिसमें किसानों में पहले से रोष भी तीन गुना ज्यादा है किसानों का कहना है सरकार को लाल किले वाले पूरे मामले की जांच करानी चाहिए जिसके बाद ही हम किसानों को कुछ बोलें जो भी इस मामले में कसूरवार है उसको जेल में डाले सरकार।
पानीपत टोल पर दिन भर एकता बनाए रखने की एनाउंसमेंट की गई। जिसमें किसानों को बताया व समझाया कि सभी किसानों को अब एकजुटता बना कर रखनी है और टोल पर भी एक साथ रहने की अपील की ताकि पानीपत टोल पर भी लाल किले की तरह काम कोई ओर करके जाए और नाम हमारा आ जाए।