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14600 करोड़ में रिफाइनरी में लगेगा 60 किलोटन का पॉली बुटाडाइन रबर प्लांट, रबर उद्योग में आएगी क्रांति
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पानीपत रिफाइनरी में 14600 करोड़ रुपये से 60 किलो टन का पॉली बुटाडाइन प्लांट लगेगा। इसका प्रपोजल पास हो चुका है। जल्द इसका निर्माण कार्य भी शुरू होगा। प्रदूषण नियंत्रण को लेकर करोड़ों रुपये के संसाधन लगाए जाएंगे। 2025 तक इस प्लांट को तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
देश में बढ़ रही रबर की मांग और उत्पादन कम होने के कारण इस प्लांट को स्थापित करने का फैसला किया गया है। यहां बनने वाली रबर टायर व जूतों को बनाने में इस्तेमाल होगी। इस प्लांट को स्थापित करने से पहले बुधवार को डीसी सुशील सारवान एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी आसपास के ग्रामीणों के साथ जन सुनवाई करेंगे। लोगों से उनकी आपत्तियां व मांगें पूछी जाएगी। लोगों की समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया जाएगा।
जन सुनवाई में रिफाइनरी के तमाम बड़े अधिकारी भी पहुंचेंगे। इंडियन ऑयल का ये उत्तर भारत में पहला प्लांट होगा। कंपनी ने नेफ्था क्रैकर कांप्लेक्स में 60 किलो टन-प्रति-वर्ष (केटीपीए) पॉलीब्यूटाडाइन रबर बनाने की योजना की है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के साथ 16 मार्च को रिफाइनरी की मीटिंग हो चुकी है। यहां बनने वाली 80 प्रतिशत रबर टायर उद्योग में और बाकी फुटवियर व कन्वेयर जैसे उद्योगों में इस्तेमाल होगी।
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14600 करोड़ के इस प्रोजेक्ट से 10 हजार युवाओं को रोजगार मिलेगा। ये प्रोजेक्ट जिले के युवाओं के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। ग्रामीण भी इस प्लांट में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग कर रहे हैं।
पानीपत की सबसे बड़ी समस्या प्रदूषण है इसलिए इस नए प्लांट में प्रदूषण नियंत्रण पर काफी फोकस किया जा रहा है। ऑनलाइन मॉनीटरिंग सिस्टम जैसे अत्याधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे। आसपास के गांवों के लोगों का जन जीवन प्रभावित न हो। इसका भी ध्यान रखा जाएगा।
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देश में बढ़ रही रबर की मांग और उत्पादन कम होने के कारण इस प्लांट को स्थापित करने का फैसला किया गया है। यहां बनने वाली रबर टायर व जूतों को बनाने में इस्तेमाल होगी। इस प्लांट को स्थापित करने से पहले बुधवार को डीसी सुशील सारवान एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी आसपास के ग्रामीणों के साथ जन सुनवाई करेंगे। लोगों से उनकी आपत्तियां व मांगें पूछी जाएगी। लोगों की समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया जाएगा।
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जन सुनवाई में रिफाइनरी के तमाम बड़े अधिकारी भी पहुंचेंगे। इंडियन ऑयल का ये उत्तर भारत में पहला प्लांट होगा। कंपनी ने नेफ्था क्रैकर कांप्लेक्स में 60 किलो टन-प्रति-वर्ष (केटीपीए) पॉलीब्यूटाडाइन रबर बनाने की योजना की है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के साथ 16 मार्च को रिफाइनरी की मीटिंग हो चुकी है। यहां बनने वाली 80 प्रतिशत रबर टायर उद्योग में और बाकी फुटवियर व कन्वेयर जैसे उद्योगों में इस्तेमाल होगी।
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14600 करोड़ के इस प्रोजेक्ट से 10 हजार युवाओं को रोजगार मिलेगा। ये प्रोजेक्ट जिले के युवाओं के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। ग्रामीण भी इस प्लांट में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग कर रहे हैं।
पानीपत की सबसे बड़ी समस्या प्रदूषण है इसलिए इस नए प्लांट में प्रदूषण नियंत्रण पर काफी फोकस किया जा रहा है। ऑनलाइन मॉनीटरिंग सिस्टम जैसे अत्याधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे। आसपास के गांवों के लोगों का जन जीवन प्रभावित न हो। इसका भी ध्यान रखा जाएगा।