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Panipat News: प्रॉपर्टी टैक्स में फर्जीवाड़ा करने वाले अफसरों के पुलिस ने किए बयान दर्ज
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पानीपत। मॉडल टाउन की संपत्ति को फ्रेंडस कॉलोनी में दिखाकर प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच में फर्जीवाड़े करने वाले अफसरों के बयान लेने पुलिस बुधवार को निगम कार्यालय पहुंची। अफसरों से पूरे मामले की तफ्तीश करते हुए बयान दर्ज किए। पुलिस ने एक्सईएन प्रदीप कल्याण समेत डीएमसी से भी पूछताछ की। इसमें दोनों अधिकारियों ने बयान तो दिए, लेकिन एक्सईएन की ओर से अब तक आयुक्त की ओर से भेजे गए नोटिस का जवाब नहीं दिया है। पुलिस को भी अफसरों ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि जो उनसे गलती हुई है, उसे सुधार लिया गया है और निगम में संपत्ति की मलकियत का सबूत नहीं है।
खास बात यह है कि जो प्रॉपर्टी आईडी निगम अधिकारियों ने दलालों के साथ मिलकर बनाई थी। जिस पर फर्जी तरीके से एनडीसी भी जारी की गई थी, उस पर रजिस्ट्री तक हो चुकी है। इस मामले में आयुक्त ने भी कड़ा संज्ञान लेकर एक कर्मचारी को सस्पेंड किया था और एक्सईएन को कारण बताओं नोटिस देकर एक सप्ताह में जवाब मांगा था, जिसे नहीं दिया गया। अब अफसर अपने जवाबों में अधिकारियों समेत पुलिस को भी गुमराह करने पर लगे हैं।
बता दें कि इस फर्जीवाड़ा करने की एवज में पांच लाख रुपये रिश्वत के आरोप लगे थे। इसमें अफसरों ने पकड़े जाने पर कहा था कि इन फाइलों पर उनके फर्जी हस्ताक्षर हैं। मामले की शिकायत संपत्ति मालिक ने निगम को दी, जिसमें कहा कि उनकी संपत्ति की गलत तरीके से दो प्रॉपर्टी आईडी बनवाकर उनकी एनडीसी जारी की गई हैं। इस पर रजिस्टरी तक हुई, जबकि इस मामले की शिकायत वे पहले ही निगम को दे चुके थे। पूरा फर्जीवाड़ा अफसरों और दलालों ने दो दिन में ही कर दिया था।
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15 अक्तूबर को अमर उजाला ने इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया। इस पर 20 नवंबर को निगम आयुक्त ने एक्शन लेकर ग्रुप डी के लेवल-वन करने वाले कर्मचारी दीपक को सस्पेंड किया। वहीं लेवल-2 की जिम्मेदारी निभाने वाले एक्सईएन प्रदीप कल्याण को नोटिस जारी है, जिसमें स्पष्ट किया गया कि एक्सईएन को अपना स्पष्टीकरण देना होगा कि उनके आईडी से ये फर्जी आईडी कैसे बनी। इसमें कौन-कौन शामिल हैं। वहीं, जो प्रॉपर्टी आईडी बनाई गई है, जिसके आधार पर प्रॉपर्टी की एनडीसी जारी हुई, को भी रद्द किया जाएगा। इसके अलावा तहसीलदार को भी फर्जीवाड़े को लेकर पत्राचार किया जाएगा। जिस पर आईडी रद्द होने के बाद रजिस्टरी के भी रद्द होने की बात सामने आई है। उसी दिन से निगम अफसर इस मामले में लीपापोती करने पर जुटे हैं।
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खास बात यह है कि जो प्रॉपर्टी आईडी निगम अधिकारियों ने दलालों के साथ मिलकर बनाई थी। जिस पर फर्जी तरीके से एनडीसी भी जारी की गई थी, उस पर रजिस्ट्री तक हो चुकी है। इस मामले में आयुक्त ने भी कड़ा संज्ञान लेकर एक कर्मचारी को सस्पेंड किया था और एक्सईएन को कारण बताओं नोटिस देकर एक सप्ताह में जवाब मांगा था, जिसे नहीं दिया गया। अब अफसर अपने जवाबों में अधिकारियों समेत पुलिस को भी गुमराह करने पर लगे हैं।
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बता दें कि इस फर्जीवाड़ा करने की एवज में पांच लाख रुपये रिश्वत के आरोप लगे थे। इसमें अफसरों ने पकड़े जाने पर कहा था कि इन फाइलों पर उनके फर्जी हस्ताक्षर हैं। मामले की शिकायत संपत्ति मालिक ने निगम को दी, जिसमें कहा कि उनकी संपत्ति की गलत तरीके से दो प्रॉपर्टी आईडी बनवाकर उनकी एनडीसी जारी की गई हैं। इस पर रजिस्टरी तक हुई, जबकि इस मामले की शिकायत वे पहले ही निगम को दे चुके थे। पूरा फर्जीवाड़ा अफसरों और दलालों ने दो दिन में ही कर दिया था।
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15 अक्तूबर को अमर उजाला ने इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया। इस पर 20 नवंबर को निगम आयुक्त ने एक्शन लेकर ग्रुप डी के लेवल-वन करने वाले कर्मचारी दीपक को सस्पेंड किया। वहीं लेवल-2 की जिम्मेदारी निभाने वाले एक्सईएन प्रदीप कल्याण को नोटिस जारी है, जिसमें स्पष्ट किया गया कि एक्सईएन को अपना स्पष्टीकरण देना होगा कि उनके आईडी से ये फर्जी आईडी कैसे बनी। इसमें कौन-कौन शामिल हैं। वहीं, जो प्रॉपर्टी आईडी बनाई गई है, जिसके आधार पर प्रॉपर्टी की एनडीसी जारी हुई, को भी रद्द किया जाएगा। इसके अलावा तहसीलदार को भी फर्जीवाड़े को लेकर पत्राचार किया जाएगा। जिस पर आईडी रद्द होने के बाद रजिस्टरी के भी रद्द होने की बात सामने आई है। उसी दिन से निगम अफसर इस मामले में लीपापोती करने पर जुटे हैं।