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केवल कागजाें में ही उगे पौधे
अमर उजाला ब्यूरो/पानीपत
Updated Thu, 04 Jun 2015 11:08 PM IST
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शहर का पर्यावरण संतुलन बनाए रखने लिए वन विभाग द्वारा जिलेभर में पिछले पांच वर्षों में करीब 30 से 35 लाख पौधे लगवाए हैं। लेकिन आज तक उन पौधों की हरियाणी शहर में दिखाई नहीं दी है। विभाग द्वारा लगवाए गए पौधे कागजी हैं। जिनकी हरियाली भी फाइलों तक ही सीमित है। विभाग द्वारा पेश किए गए आंकड़ों व धरातल पर किए गए कार्यों में बहुत अंतर है।
वन विभाग द्वारा पांच वर्षों में करीब 15 करोड़ करोड़ रुपये के खर्च से शहर की कॉलोनियों, संस्थाओं, गांव की पंचायती जमीन, व सड़क व नहर किनारे करीब 30 से 35 लाख पौधे लगाने का दावा किया है। विभाग द्वारा शहर की प्रमुख सड़कों व कॉलोनियों में भी पौधरोपण करवाया गया है। लेकिन आज तक शहर में उन पौधों की हरियाली दिखाई नहीं दी है। शहर में बढ़ते उद्योगों व मोटर वाहनों से शहर के तापमान में भी लगातार वृद्धि हो रही है। वहीं, लोग अपने स्वार्थ के लिए दिन रात पेड़ों की कटाई भी कर रहे हैं। लेकिन उस मुकाबले में पौधरोपण नहीं हो रहा है। जिससे शहर के तापमान का संतुलन भी बिगड़ रहा है। यदि समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में इसके घातक परिणाम सामने होंगे।
कागजों में ही लगा दिए 8.32 लाख पौधे
वन विभाग द्वारा वर्ष 2014-15 में जिलेभर में 8.32 लाख पौधे लगाए हैं। जिसमें 12 गांव की पंचायती जमीन पर करीब साढे़ तीन लाख पौधे लगाए हैं तथा 5500 पौधे शहर की ग्रीन बेल्ट में लगाए गए हैं। विभाग द्वारा नहर व सड़कों किनारे के साथ साथ खाली पड़ी जमीन में भी करीब पांच लाख पौधे लगाए थे। जिस पर करीब साढे़ तीन करोड़ रुपये खर्च हुए थे। लेकिन विभाग की अनदेखी के चलते ज्यादतर पौधे सिंचाई व सुरक्षा के अभाव में नष्ट हो गए।
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एक पौधे का खर्च 40 रुपये फिर भी नहीं परवाह
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक एक पौधे पर विभाग करीब 40 रुपये खर्च आता है। लेकिन उसके बाद भी विभाग हजारों की संख्या में पौधे लगाकर उनकी सिंचाई करना व सुरक्षा प्रदान करना भूल जाता है। जिससे हर वर्ष करोड़ों रुपये यू हीं बर्बाद हा जाते हैं।
इस वर्ष भी 12 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य
वन विभाग द्वारा वर्ष 2015-16 में 12 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। जिसके लिए विभाग को करीब पौने पांच करोड़ रुपये के बजट की आवश्यकता है। क्या इस बार भी विभाग अपने लक्ष्य को धारातल पर पूरा करेगा या फिर कागजों में यह तो समय ही बताएगा।
संस्थाओं में वितरित हो जाते हैं 50 प्रतिशत से अधिक पौधे
वन विभाग पौधा रोपण के लक्ष्य को पूरा करने के लिए 50 प्रतिशत से अधिक पौधे, स्कूल, कॉलेज, सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं को वितरित कर देते हैं। जिसमें से करीब 80 प्रतिशत पौधे नष्ट हो जाते हैं तथा विभाग द्वारा रोपित पौधे भी सिंचाई व सुरक्षा के अभाव में नष्ट हो जाते हैं।
आठ नर्सरियों में तैयार होते हैं पौधे
वन विभाग की बिंझौल, ब्राह्मणमाजरा, खुखराना, मतलौडा, उरलाना, छाज पुर, पट्टीकल्याणा और भापरा की नर्सरी में पौधे तैयार किए जाते हैं। जिनमें सफेदा, कीकर, जमोया, जामुन, आंवला, बैकन और अलफस के पौधे शामिल हैं।
पानी में जहर घोल रहे डाई हाउस
शहर में सैकड़ों की संख्या में चल रहे डाई हाउस से निकलने वाला जहरीला पानी शहर के भूमिगत जल में भी जहर घोल रहा है। वहीं कंस्ट्रक्शन साइट व भट्टों की चिमनियों से निकलने वाला धूआं वायु को दूषित कर रहा है। जिसका सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो भविष्य में इसके घातक परिणाम होंगे।
विभाग द्वारा प्रतिवर्ष पौधा रोपण के लक्ष्य को प्रति वर्ष बढ़ाया जा रहा है। पिछले वर्ष 8.32 लाख पौधे रोपित किए गए हैं तथा इस बार 12 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। शहर में जगह की कमी के चलते ग्रामीण क्षेत्र व सड़क व नहर किनारे खाली पड़ी जमीन में अधिक अधिक पौधा रोपण करवाया जा रहा है।
जय कुमार, डीएफओ, वन विभाग।
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वन विभाग द्वारा पांच वर्षों में करीब 15 करोड़ करोड़ रुपये के खर्च से शहर की कॉलोनियों, संस्थाओं, गांव की पंचायती जमीन, व सड़क व नहर किनारे करीब 30 से 35 लाख पौधे लगाने का दावा किया है। विभाग द्वारा शहर की प्रमुख सड़कों व कॉलोनियों में भी पौधरोपण करवाया गया है। लेकिन आज तक शहर में उन पौधों की हरियाली दिखाई नहीं दी है। शहर में बढ़ते उद्योगों व मोटर वाहनों से शहर के तापमान में भी लगातार वृद्धि हो रही है। वहीं, लोग अपने स्वार्थ के लिए दिन रात पेड़ों की कटाई भी कर रहे हैं। लेकिन उस मुकाबले में पौधरोपण नहीं हो रहा है। जिससे शहर के तापमान का संतुलन भी बिगड़ रहा है। यदि समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में इसके घातक परिणाम सामने होंगे।
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कागजों में ही लगा दिए 8.32 लाख पौधे
वन विभाग द्वारा वर्ष 2014-15 में जिलेभर में 8.32 लाख पौधे लगाए हैं। जिसमें 12 गांव की पंचायती जमीन पर करीब साढे़ तीन लाख पौधे लगाए हैं तथा 5500 पौधे शहर की ग्रीन बेल्ट में लगाए गए हैं। विभाग द्वारा नहर व सड़कों किनारे के साथ साथ खाली पड़ी जमीन में भी करीब पांच लाख पौधे लगाए थे। जिस पर करीब साढे़ तीन करोड़ रुपये खर्च हुए थे। लेकिन विभाग की अनदेखी के चलते ज्यादतर पौधे सिंचाई व सुरक्षा के अभाव में नष्ट हो गए।
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एक पौधे का खर्च 40 रुपये फिर भी नहीं परवाह
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक एक पौधे पर विभाग करीब 40 रुपये खर्च आता है। लेकिन उसके बाद भी विभाग हजारों की संख्या में पौधे लगाकर उनकी सिंचाई करना व सुरक्षा प्रदान करना भूल जाता है। जिससे हर वर्ष करोड़ों रुपये यू हीं बर्बाद हा जाते हैं।
इस वर्ष भी 12 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य
वन विभाग द्वारा वर्ष 2015-16 में 12 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। जिसके लिए विभाग को करीब पौने पांच करोड़ रुपये के बजट की आवश्यकता है। क्या इस बार भी विभाग अपने लक्ष्य को धारातल पर पूरा करेगा या फिर कागजों में यह तो समय ही बताएगा।
संस्थाओं में वितरित हो जाते हैं 50 प्रतिशत से अधिक पौधे
वन विभाग पौधा रोपण के लक्ष्य को पूरा करने के लिए 50 प्रतिशत से अधिक पौधे, स्कूल, कॉलेज, सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं को वितरित कर देते हैं। जिसमें से करीब 80 प्रतिशत पौधे नष्ट हो जाते हैं तथा विभाग द्वारा रोपित पौधे भी सिंचाई व सुरक्षा के अभाव में नष्ट हो जाते हैं।
आठ नर्सरियों में तैयार होते हैं पौधे
वन विभाग की बिंझौल, ब्राह्मणमाजरा, खुखराना, मतलौडा, उरलाना, छाज पुर, पट्टीकल्याणा और भापरा की नर्सरी में पौधे तैयार किए जाते हैं। जिनमें सफेदा, कीकर, जमोया, जामुन, आंवला, बैकन और अलफस के पौधे शामिल हैं।
पानी में जहर घोल रहे डाई हाउस
शहर में सैकड़ों की संख्या में चल रहे डाई हाउस से निकलने वाला जहरीला पानी शहर के भूमिगत जल में भी जहर घोल रहा है। वहीं कंस्ट्रक्शन साइट व भट्टों की चिमनियों से निकलने वाला धूआं वायु को दूषित कर रहा है। जिसका सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो भविष्य में इसके घातक परिणाम होंगे।
विभाग द्वारा प्रतिवर्ष पौधा रोपण के लक्ष्य को प्रति वर्ष बढ़ाया जा रहा है। पिछले वर्ष 8.32 लाख पौधे रोपित किए गए हैं तथा इस बार 12 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। शहर में जगह की कमी के चलते ग्रामीण क्षेत्र व सड़क व नहर किनारे खाली पड़ी जमीन में अधिक अधिक पौधा रोपण करवाया जा रहा है।
जय कुमार, डीएफओ, वन विभाग।