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पार्क की जगह मिले गंदगी के ढेर, धांधली का आरोप

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 20 Jul 2021 02:24 AM IST
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Piles of dirt found in the park, allegation of rigging
जमीन पर मिले लगे गंदगी के ढ़ेर, टूटे बैंच और ट्री गार्ड - फोटो : Panipat
पानीपत। एक और पार्क के निर्माण में धांधली का आरोप नगर निगम पर लग रहा है। निगम ने वार्ड नंबर-4 स्थित रमेश नगर में 23 लाख रुपये खर्च कर पार्क कागजों पर बना दिया लेकिन मौके पर पार्क की जगह गंदगी के ढेर मिले। इस पार्क को बनवाने के लिए स्थानीय लोगों ने छह वर्ष संघर्ष किया। इसके बाद निगम ने चार वर्ष पहले पार्क में निर्माण के लिए 23 लाख का टेंडर लगाया, लेकिन पार्क नहीं बन सका जबकि आरटीआई में मिले जवाब में नगर निगम ने पार्क का निर्माण पूरा बताया है।
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जब पार्क नह
ीं बना तो लोगों ने प्रदर्शन कर धरना दिया, अधिकारियों और नेताओं को फरियाद तक लगाई, लेकिन पार्क का काम चालू नहीं हो पाया। अब चार साल तक भी काम बंद रहने के बाद वार्ड के लोगों ने इसकी जानकारी के लिए निगम में आरटीआई लगाई तो जवाब आया कि पार्क का काम तो 100 प्रतिशत पूरा हो चुका है। जिससे सभी हैरान हो गए और स्थानीय लोगों ने निगम पर भ्रष्टाचार व धांधली के आरोप लगाए हैं।
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ये था पूरा मामला-
वार्ड नंबर 4 के अंतर्गत आने वाले रमेश नगर में करीब 300 गज जमीन पर एक सरकारी स्कूल हुआ करता था। इस स्कूल के कंडम होने की स्थिति में शिक्षा विभाग ने इसे करीब नौ साल पहले ध्वस्त करवा दिया था। इसके बाद 2013 से लेकर 2018 तक वार्ड के लोगों ने निगम से यहां पार्क बनवाने की गुहार लगाई। यहां 23 लाख रुपये से पार्क का टेंडर लगा और जनवरी 2018 में इसके लिए हरगुन एसोसिएट कंपनी को वर्क आर्डर जारी किया गया। हालांकि चार साल बाद भी यहां पार्क नहीं बनाया जा सका। अब 2021 में वार्ड निवासी एवं आरटीआई एक्टिविस्ट अंशू नारंग ने निगम से इसकी जानकारी ली तो निगम ने जवाब दिया कि पार्क तो 100 प्रतिशत बन चुका है।
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निगम बोला- शिक्षा विभाग ने नहीं दी एनओसी
निगम अधिकारियों ने बताया कि उस समय शिक्षा विभाग ने इस पर आपत्ति लगाई थी। इस जमीन पर स्कूल होता था, जिसे ध्वस्त करवाया गया था। शिक्षा विभाग ने लिखित में निगम से पत्राचार किया था कि ये जमीन उनकी है। इसके लिए शिक्षा विभाग ने ही करीब 34 लाख रुपये का टेंडर लगाने की बात कही थी। जिसके चलते शिक्षा विभाग ने एनओसी तक नहीं दी और पार्क का निर्माण नहीं हो सका। अब कागजों की बात की जाए तो हो सकता है कि इस पार्क के निर्माण की जगह कोई दूसरा पार्क बना दिया हो।
शिकायकर्ता ने कहा- मालिक शिक्षा विभाग है ही नहीं
वार्ड निवासी एवच आरटीआई एक्टिविस्ट अंशू नांरग ने बताया कि जब उन्होंने इस जमीन के कागजातों की जांच कराई तो पता चला कि जमीन का मालिक शिक्षा विभाग नहीं बल्कि नगर निगम है। अब निगम को अपनी जमीन के लिए शिक्षा विभाग से अनुमति लेने की आवश्यकता ही नहीं है।
टाइलें तक रखवाई थी, जो उठवा दी थी- पार्षद
ये काम मेरे कार्यकाल से पहले का है। पहले मामला मेरे संज्ञान में जरूर था, पार्क निर्माण के लिए टाइलें तक रखवाई गईं थीं, लेकिन बाद में उन टाइलों को भी उठवा लिया गया था। इसके बाद निगम ने निर्माण क्यों नहीं किया इसकी जानकारी मेरे पास नहीं है। इस पर निगम से सवाल जरूर किया जाएगा।
रविंद्र नागपाल, पार्षद, वार्ड नंबर 4
कोई दूसरा काम करवा दिया होगा- एक्सईएन
शिक्षा विभाग से एनओसी लेनी जरूरी थी, जिसे विभाग ने लिखित में देने मना कर दिया था। जिस कारण पार्क नहीं बनाया जा सका। हो सकता है इस टेंडर की जगह कोई दूसरा काम करवा दिया हो, इसकी जानकारी मुझे नहीं है।

- प्रदीप कल्याण, एक्सईएन ग्रामीण डिविजन, नगर निगम, पानीपत।
करवाएंगे जांच- एक्सईएन
ये मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। आपसे ही मामला संज्ञान में आया है। अगर ऐसा कुछ प्रकरण हुआ है तो इसकी तुरंत जांच करवाई जाएगी। संबंधित सभी दस्तावेजों की जांच करने के बाद ही कुछ बताया जा सकता है।
नवीन सहरावत, एक्सईएन शहरी डिविजन, नगर निगम पानीपत।
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