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Panipat News: नो ड्यूज सर्टिफिकेट के लिए महीनों काट रहे लोग चक्कर
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समालखा। नो ड्यूज सर्टिफिकेट (एनडीसी) के लिए लोगों को नगरपालिका के चक्कर काटने पड़ रहे हैं लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। तत्काल सर्विस में भी दो दिन में एनडीसी देने का प्रावधान होने के बावजूद लोगों को एक से डेढ़ महीने तक भटकना पड़़ रहा है। अधिकारियों को कहने पर कोई असर नहीं हो रहा। चेयरमैन अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि वो कई बार अधिकारियों को कह चुके हैं उन पर असर नहीं होता।
उल्लेखनीय है कि रजिस्ट्री करवाने सहित लोन, नक्शा पास करवाने आदि के लिए नो ड्यूज सर्टिफिकेट (एनडीसी) की आवश्यकता होती है। इसके बिना रजिस्ट्री नहीं होती और नगरपालिका द्वारा अपने क्षेत्र के अंतर्गत नो ड्यूज सर्टिफिकेट जारी किया जाता है लेकिन एनडीसी के लिए लोगों को धक्के खाने पड़ रहे हैं और अधिकारियों के आगे दुखड़ा सुनाने के बावजूद उनकी सुनवाई नहीं होती है। लेकिन नो-ड्यूज नहीं मिलता है। साधारण आवेदन के साथ ही तत्काल सर्विस में भी यही हालत हैं।
बॉक्स
क्या है तत्काल सर्विस-
एनडीसी के लिए दो तरह से आवेदन किया जाता है। इसमें एक साधारण आवेदन है और राइट टू सर्विस एक्ट के अंतर्गत आवेदन को एक निश्चित समय में पूरा करना होता है। दूसरी तत्काल सर्विस है। इसमें एक हजार रुपये की अतिरिक्त शुल्क देना होता है सरकार के खाते में जाता है। तत्काल सर्विस में अधिकारी को दो दिन में एनडीसी देनी होती है। दो दिनों में एनडीसी नहीं देने पर संबंधित अधिकारी पर जुर्माने का प्रावधान है।
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तत्काल सर्विस में लग रहा एक से डेढ़ महीने का समय-
समालखा निवासी संदीप ने बताया कि उसने तत्काल में दो आवेदन किए थे। इसमें एक आवेदन को 11 दिन व दूसरे को 45 दिन का समय हो चुका है। नारायण दत्त पाठक ने बताया कि उसने करीब सवा महीने पहले तत्काल में आवेदन किया था नगरपालिका में नीचे से ऊपर के कमरों के चक्कर काटकर थक चुके हैं। अधिकारी मौके पर नहीं मिलते और कभी मीटिंग तो कभी फील्ड की बात कहकर उन्हें टरका देते है। रजिस्टरी नहीं होने से उन्हे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने जिला प्रशासन से तत्काल सर्विस के आवेदन को निर्धारित समय में नहीं करने वाले अधिकारी पर जुर्माना लगाने तथा रिकार्ड की जांच करने की मांग की है।
वर्जन-
इस बारे में नगरपालिका चेयरमैन अशोक कुच्छल ने कहा कि वो भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के कई बार प्रयास कर चुके हैं। लेकिन अधिकारी, कर्मी मान नहीं रहें हैं। इसको लेकर वो डीसी, पालिका आयुक्त से मिलेंगे और कार्रवाई करने की मांग करेंगे।
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उल्लेखनीय है कि रजिस्ट्री करवाने सहित लोन, नक्शा पास करवाने आदि के लिए नो ड्यूज सर्टिफिकेट (एनडीसी) की आवश्यकता होती है। इसके बिना रजिस्ट्री नहीं होती और नगरपालिका द्वारा अपने क्षेत्र के अंतर्गत नो ड्यूज सर्टिफिकेट जारी किया जाता है लेकिन एनडीसी के लिए लोगों को धक्के खाने पड़ रहे हैं और अधिकारियों के आगे दुखड़ा सुनाने के बावजूद उनकी सुनवाई नहीं होती है। लेकिन नो-ड्यूज नहीं मिलता है। साधारण आवेदन के साथ ही तत्काल सर्विस में भी यही हालत हैं।
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क्या है तत्काल सर्विस-
एनडीसी के लिए दो तरह से आवेदन किया जाता है। इसमें एक साधारण आवेदन है और राइट टू सर्विस एक्ट के अंतर्गत आवेदन को एक निश्चित समय में पूरा करना होता है। दूसरी तत्काल सर्विस है। इसमें एक हजार रुपये की अतिरिक्त शुल्क देना होता है सरकार के खाते में जाता है। तत्काल सर्विस में अधिकारी को दो दिन में एनडीसी देनी होती है। दो दिनों में एनडीसी नहीं देने पर संबंधित अधिकारी पर जुर्माने का प्रावधान है।
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तत्काल सर्विस में लग रहा एक से डेढ़ महीने का समय-
समालखा निवासी संदीप ने बताया कि उसने तत्काल में दो आवेदन किए थे। इसमें एक आवेदन को 11 दिन व दूसरे को 45 दिन का समय हो चुका है। नारायण दत्त पाठक ने बताया कि उसने करीब सवा महीने पहले तत्काल में आवेदन किया था नगरपालिका में नीचे से ऊपर के कमरों के चक्कर काटकर थक चुके हैं। अधिकारी मौके पर नहीं मिलते और कभी मीटिंग तो कभी फील्ड की बात कहकर उन्हें टरका देते है। रजिस्टरी नहीं होने से उन्हे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने जिला प्रशासन से तत्काल सर्विस के आवेदन को निर्धारित समय में नहीं करने वाले अधिकारी पर जुर्माना लगाने तथा रिकार्ड की जांच करने की मांग की है।
वर्जन-
इस बारे में नगरपालिका चेयरमैन अशोक कुच्छल ने कहा कि वो भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के कई बार प्रयास कर चुके हैं। लेकिन अधिकारी, कर्मी मान नहीं रहें हैं। इसको लेकर वो डीसी, पालिका आयुक्त से मिलेंगे और कार्रवाई करने की मांग करेंगे।