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Panipat News: धान का भुगतान अटका, किसान का दशहरा मनेगा सूखा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 19 Oct 2026 07:43 PM IST
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Payment for paddy stuck; farmers to have a bleak Dussehra
जिले में इस बार करीब दो करोड़ रुपये का भुगतान अटका हुआ है
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किसानों का दशहरा सूखा मनेगा और दिवाली की भी चिंता बढ़ी
-4.35 करोड़ में से 2.86 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया
माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। जिले की अनाज मंडियों में धान की सरकारी व निजी खरीद तो तेजी से चल रही है, लेकिन मंडियों से उठान न होने के कारण किसानों का भुगतान पूरी तरह से अटक गया है। समय पर बैंक खातों में फसल का पैसा न पहुंचने से इस बार किसान का दशहरा सूखा और फीका मनेगा, वहीं आने वाले दिवाली पर्व को लेकर भी किसानों की चिंताएं बेहद गहरी हो गई हैं।

जिले की आठ प्रमुख मंडियों में अब तक 1.40 लाख मीट्रिक टन धान की आवक हो चुकी है। इसमें से 8,808.6 मीट्रिक टन पीआर धान की सरकारी खरीद (हैफेड और हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन ) की है। सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीदे गए धान में से अब तक मात्र 1,364.2 मीट्रिक टन फसल का ही उठान हो सका है। यानी लिफ्टिंग का प्रतिशत महज 15.48 प्रतिशत है। मंडियों में अभी भी 7,444.4 मीट्रिक टन पीआर धान खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ है। सरकारी एजेंसियों को लगभग 4.35 करोड़ रुपये का भुगतान करना है। इससे करीब 1.49 करोड़ का भुगतान किया है। 2.86 करोड़ रुपये बकाया हैं। नियम के मुताबिक मंडियों से गोदामों और मिलों तक धान का उठान न होने के चलते जे-फॉर्म और आई-फॉर्म का ऑनलाइन क्लीयरेंस अटक गया है।
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किसानों का छलका दर्द: त्योहार के समय खाली पड़ी जेब

मतलौडा गांव के किसान धर्मपाल ने बताया कि उन्होंने 10 दिन पहले मंडी में अपनी पीआर धान की फसल बेची थी। पोर्टल पर बिक्री दर्ज हो गई है, लेकिन अभी तक खाते में एक भी रुपया नहीं आया। त्योहार का समय है। घर की जरूरतें और बच्चों की खरीदारी रुक गई हैं। अगर यही हाल रहा तो दशहरे के बाद दिवाली भी बिना पैसों के ही मनानी पड़ेगी। सरकार को तुरंत लिफ्टिंग की व्यवस्था सुधारनी चाहिए।
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इसराना के किसान सतबीर सिंह ने बताया कि मंडी में फसल ले जाने के बाद सबसे बड़ी समस्या समय पर भुगतान की आ रही है। फसल बिकने के 72 घंटे में भुगतान का दावा कागजों में ही सीमित है। खेतों में अगली बोआई की तैयारी के लिए बीज और खाद खरीदना है। इसके लिए पैसे की सख्त जरूरत है।

मजबूरी में आढ़तियों से ब्याज पर पैसे लेने को मजबूर किसान

मंडियों में उठान की सुस्त रफ्तार और सरकारी भुगतान में हो रही देरी का सीधा असर किसानों के घरेलू बजट और आगामी रबी फसलों की तैयारियों पर पड़ रहा है। त्योहार और घर-परिवार के खर्चों को पूरा करने के लिए किसान अब मजबूरी में आढ़तियों और स्थानीय साहूकारों से ऊंचे ब्याज दर पर पैसे उधार लेने को विवश हैं। अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के जिला प्रधान धर्मबीर मलिक ने बताया कि एजेंसियों का उठान सुस्त है। राइस मिलर और ट्रांसपोर्टर के बीच तालमेल नहीं होने से उठान बहुत धीमा है। जब तक मंडी से माल नहीं उठेगा, तब तक अधिकारियों द्वारा ऑनलाइन बिल पास नहीं किए जाते।


वर्जन :

जिले की मंडियों में धान की आवक के साथ खरीद लगातार की जा रही है। उठान पिछले दिनों में तेज किया गया है। किसानों को धान का भुगतान उठान होते ही कराया जा रहा है।

डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ, उपायुक्त।
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