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Panipat News: न्यूजीलैंड से शुल्क-मुक्त व्यापार का रास्ता खुला, पानीपत के टेक्सटाइल निर्यात को मिलेगी रफ्तार
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शिपमेंट के माल को रवाना करते अधिकारी और निर्यात से जुड़े लोग। स्रोत : सोशल मीडिया
भारत-न्यूजीलैंड एफटीए के तहत पहली शिपमेंट रवाना, पहले भारतीय उत्पादों पर लगता था 10% तक आयात शुल्क
माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। अमेरिका में टैरिफ बढ़ने से निर्यात प्रभावित होने के बीच पानीपत के टेक्सटाइल उद्योग के लिए न्यूजीलैंड से नई उम्मीद जगी है। भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत पहली शिपमेंट रवाना की गई। समझौते के तहत न्यूजीलैंड ने मंगलवार से भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क समाप्त कर दिया है। इससे पानीपत के होम टेक्सटाइल, गारमेंट और अन्य उत्पादों को वहां के बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी।
भारत और न्यूजीलैंड के बीच समझौते पर 27 अप्रैल को नई दिल्ली में आधिकारिक हस्ताक्षर हुए थे। पहले भारतीय उत्पादों पर न्यूजीलैंड में 10 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगता था। शुल्क समाप्त होने से भारतीय सामान की कीमतों में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलने की उम्मीद है।
डीजीएफटी ने शिपमेंट को दिखाई झंडी
विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने सोमवार को टेक्सटाइल शिपमेंट को झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान विदेश व्यापार विकास अधिकारी डॉली कालरा, डीजीएफटी पानीपत के सेक्शन हेड ज्ञान प्रकाश, योगेंद्र मीणा, बिजेंद्र और चार्टर्ड अकाउंटेंट नीरज वधवा मौजूद रहे। हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रधान विनोद धमीजा ने इसे अच्छा प्रयास बताते हुए अन्य देशों के साथ भी ऐसे समझौते करने की जरूरत बताई।
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10 प्रतिशत ड्यूटी घटने से होगा फायदा
सीएम नीरज वधवा ने बताया कि अब भारतीय उत्पादों की लागत सीधे तौर पर कम हो जाएगी। इससे न्यूजीलैंड के बाजार में पानीपत का होम टेक्सटाइल, सूती चादरें, फर्निशिंग और अन्य उत्पाद कहीं अधिक सस्ते और प्रतिस्पर्धी दामों पर उपलब्ध होंगे।
वियतनाम, बांग्लादेश और चीन के उत्पादों को देंगे टक्कर
वैश्विक बाजार में टेक्सटाइल और विनिर्माण क्षेत्र में वियतनाम, बांग्लादेश और चीन भारत के प्रमुख प्रतिस्पर्धी रहे हैं। व्यापार समझौतों और कम आयात शुल्क के लाभ से वियतनाम और बांग्लादेश के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़त मिलती रही है। वहीं, बड़े पैमाने पर उत्पादन और कम कीमतों के कारण चीन के उत्पाद भी कड़ी चुनौती देते हैं। अब न्यूजीलैंड में भारतीय उत्पादों पर पहले लगने वाला 10 प्रतिशत तक का आयात शुल्क समाप्त होने से भारतीय टेक्सटाइल और एमएसएमई उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी। इससे भारतीय निर्यातकों को इन देशों के उत्पादों को टक्कर देने का बेहतर अवसर मिलेगा।
यह समझौता भारत की वैश्विक व्यापार यात्रा में एक मील का पत्थर है। इससे न केवल टेक्सटाइल बल्कि चमड़ा, फुटवियर, इंजीनियरिंग उत्पादों और एमएसएमई क्षेत्र की मांग बढ़ेगी। अंतरराष्ट्रीय व्यापार साझेदारी को मजबूत करने और निर्यात आधारित आर्थिक विकास की जरूरत पूरी होगी। इसके लिए निर्यातकों में जागरूकता लाई जाएगी।
डॉली कालरा,एफटीडीओ, डीजीएफटी।
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। अमेरिका में टैरिफ बढ़ने से निर्यात प्रभावित होने के बीच पानीपत के टेक्सटाइल उद्योग के लिए न्यूजीलैंड से नई उम्मीद जगी है। भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत पहली शिपमेंट रवाना की गई। समझौते के तहत न्यूजीलैंड ने मंगलवार से भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क समाप्त कर दिया है। इससे पानीपत के होम टेक्सटाइल, गारमेंट और अन्य उत्पादों को वहां के बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी।
भारत और न्यूजीलैंड के बीच समझौते पर 27 अप्रैल को नई दिल्ली में आधिकारिक हस्ताक्षर हुए थे। पहले भारतीय उत्पादों पर न्यूजीलैंड में 10 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगता था। शुल्क समाप्त होने से भारतीय सामान की कीमतों में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलने की उम्मीद है।
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डीजीएफटी ने शिपमेंट को दिखाई झंडी
विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने सोमवार को टेक्सटाइल शिपमेंट को झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान विदेश व्यापार विकास अधिकारी डॉली कालरा, डीजीएफटी पानीपत के सेक्शन हेड ज्ञान प्रकाश, योगेंद्र मीणा, बिजेंद्र और चार्टर्ड अकाउंटेंट नीरज वधवा मौजूद रहे। हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रधान विनोद धमीजा ने इसे अच्छा प्रयास बताते हुए अन्य देशों के साथ भी ऐसे समझौते करने की जरूरत बताई।
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10 प्रतिशत ड्यूटी घटने से होगा फायदा
सीएम नीरज वधवा ने बताया कि अब भारतीय उत्पादों की लागत सीधे तौर पर कम हो जाएगी। इससे न्यूजीलैंड के बाजार में पानीपत का होम टेक्सटाइल, सूती चादरें, फर्निशिंग और अन्य उत्पाद कहीं अधिक सस्ते और प्रतिस्पर्धी दामों पर उपलब्ध होंगे।
वियतनाम, बांग्लादेश और चीन के उत्पादों को देंगे टक्कर
वैश्विक बाजार में टेक्सटाइल और विनिर्माण क्षेत्र में वियतनाम, बांग्लादेश और चीन भारत के प्रमुख प्रतिस्पर्धी रहे हैं। व्यापार समझौतों और कम आयात शुल्क के लाभ से वियतनाम और बांग्लादेश के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़त मिलती रही है। वहीं, बड़े पैमाने पर उत्पादन और कम कीमतों के कारण चीन के उत्पाद भी कड़ी चुनौती देते हैं। अब न्यूजीलैंड में भारतीय उत्पादों पर पहले लगने वाला 10 प्रतिशत तक का आयात शुल्क समाप्त होने से भारतीय टेक्सटाइल और एमएसएमई उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी। इससे भारतीय निर्यातकों को इन देशों के उत्पादों को टक्कर देने का बेहतर अवसर मिलेगा।
यह समझौता भारत की वैश्विक व्यापार यात्रा में एक मील का पत्थर है। इससे न केवल टेक्सटाइल बल्कि चमड़ा, फुटवियर, इंजीनियरिंग उत्पादों और एमएसएमई क्षेत्र की मांग बढ़ेगी। अंतरराष्ट्रीय व्यापार साझेदारी को मजबूत करने और निर्यात आधारित आर्थिक विकास की जरूरत पूरी होगी। इसके लिए निर्यातकों में जागरूकता लाई जाएगी।
डॉली कालरा,एफटीडीओ, डीजीएफटी।
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