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Panipat News: पट्टीकल्याणा ने खेल, शिक्षा और देश सेवा में बनाई पहचान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 08 Jul 2026 02:54 AM IST
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Pattikalyana has made a mark in sports, education, and service to the nation.
कुलदीप राठी
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समालखा। समालखा खंड का ऐतिहासिक गांव पट्टीकल्याणा खेल, शिक्षा, राजनीति और देश सेवा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखता है। आजादी की लड़ाई से लेकर 1962 के भारत-चीन युद्ध तक गांव के वीरों ने देश के लिए योगदान दिया। युद्ध में गांव के पांच जवानों ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए बलिदान दिया।
खेलों में पट्टीकल्याणा को खिलाड़ियों की खान कहा जाता है। वॉलीबॉल और कुश्ती में यहां के युवाओं ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाया है। अमित छौक्कर ने भारतीय वॉलीबॉल टीम में जगह बनाकर देश का प्रतिनिधित्व किया। इसके अलावा रोशन लाल, ऋषिपाल, जूनियर रोशन, रमेश, प्रदीप कुमार और कोच सुमित और राहुल जैसे खिलाड़ियों ने नेशनल लेवल पर शानदार प्रदर्शन कर गांव का नाम रोशन किया।
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गांव में युवाओं को तैयार करने के लिए वॉलीबॉल नर्सरी भी संचालित की जा रही है। कुश्ती में भी गांव के दो अखाड़ों में लड़के-लड़कियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। अंकित ने ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप में रजत, जबकि शुभम ने स्वर्ण और रजत पदक जीते हैं। पि्रंस और प्रदीप कुमार खेलों में राष्ट्रीय स्तर पर चमक बिखेर चुके हैं।
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राजनीति और प्रशासन में भी गांव का योगदान उल्लेखनीय रहा है। दिवंगत कटार सिंह छौक्कर हरियाणा सरकार में वित्त मंत्री रहे। संजय छौक्कर हरियाणा युवा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष रहे। बिमला और घनश्याम ने सिविल सेवा परीक्षा पास की, वहीं जगदीप गुजरात यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर रहे। सैन्य सेवा में कुलदीप सिंह ब्रिगेडियर पद तक पहुंचे। बैंकिंग सेक्टर में भी गांव के राजकुमार छौक्कर हैदराबाद में एक प्रतिष्ठित बैंक में डिप्टी जनरल मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। संवाद




रामपाल ने बताया कि हमारे गांव के रग-रग में देश सेवा और खेल बसे हैं। चाहे 1962 की जंग हो या खेल का मैदान, पट्टीकल्याणा के युवाओं ने हमेशा आगे बढ़कर नेतृत्व किया है। आज की पीढ़ी भी इसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ा रही है।



प्रिंस ने बताया कि गांव में वॉलीबॉल की नर्सरी और कुश्ती के दो अखाड़े होने से बच्चों को सही दिशा मिल रही है। अमित, शुभम, सुमित कोच जैसे खिलाड़ियों ने साबित किया है कि अगर ग्रामीण आंचल में सही ट्रेनिंग मिले, तो हमारे बच्चे ओलंपिक तक जा सकते हैं।



कृष्ण ने बताया कि गांव से आईएएस अधिकारी, वाइस चांसलर और बैंक के डीजीएम जैसे पदों पर लोगों का पहुंचना यह दर्शाता है कि हमारे यहां शिक्षा को लेकर हमेशा से जागरूकता रही है। बेटियां भी अब शिक्षा और खेल में लड़कों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं।



नरेंद्र ने बताया कि 1962 के युद्ध में हमारे गांव के पांच वीरों ने जो बलिदान दिया था, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनकी याद में गांव में स्मारक और कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी माटी के वीरों के त्याग को याद रखें।



ईश्वर ने बताया कि समालखा खंड का पट्टीकल्याणा एक आदर्श गांव है। खेल और शिक्षा के क्षेत्र में इस गांव के ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए, पंचायत और प्रशासन का यह लगातार प्रयास रहता है कि यहां के खेल मैदानों और स्कूलों में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।




देवी सिंह ने बताया कि जब गांव के बच्चे देखते हैं कि उनके बीच से ही निकलकर कोई ब्रिगेडियर बना है, कोई वित्त मंत्री रहा है, और कोई देश के लिए खेल रहा है, तो उनका आत्मविश्वास दोगुना हो जाता है। पट्टीकल्याणा की यही खूबी इसे दूसरे गांवों से अलग बनाती है।
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