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Panipat News: एलिवेटेड हाईवे के नीचे पार्किंग का ठेका 31.31 लाख में
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पानीपत। व्यापारियों के विरोध और आंदोलन के तेवरों के बीच प्रशासन ने एलिवेटेड हाईवे के नीचे चार जोन की पार्किंग का ठेका शुक्रवार को कर दिया। यह पार्किंग 31.31 लाख में जिला सचिवालय की पार्किंग चलाने वाले ठेकेदार संदीप देशवाल ने ली है। पार्किंग एक अगस्त से शुरू होगी। यह न्यूनतम मूल्य आठ लाख से करीब चार गुना अधिक रेट में गई। इसमें करीब 97 बार बाेली लगी और 59 बोलीदाता शामिल हुए। इसके लिए एक कमेटी काम करेगी।
प्रशासन ने ठेकेदार को नियमानुसार काम न करने पर ठेका निरस्त करने की हिदायत साफ रूप से दी है। इधर व्यापारी प्रशासन के इस कदम से खफा दिखे और शुक्रवार को होने वाली दूसरे दौर की बैठक में नहीं पहुंचे। व्यापारियों ने पार्किंग के खिलाफ आंदोलन का फैसला कर लिया है। व्यापारियों ने पार्किंग शुल्क को गुंंडा टैक्स करार दिया है।
एलिवेटेड हाईवे के नीचे पार्किंग की बोली शुक्रवार को दोपहर बाद करीब साढ़े तीन बजे शुरू हुई। इसकी अध्यक्षता सीटीएम राजेश सोनी, जिला परिषद सीईओ विवेक चौधरी और एसडीएम पानीपत वीरेंद्र ढुल ने संयुक्त रूप से की। इसमें 59 बोलीदाता शामिल हुए। रेडक्रॉस के अधिकारियों ने बोली के नियम व शर्तों के बारे में बताया। इसके बाद बोली प्रक्रिया शुरू हुई। इसमें आठ लाख से बोली शुरू की तो ठेकेदारों में कंपटीशन शुरू हो गया। 97 बार इसकी बोली लगी और आखिरी बोली 31.31 लाख रुपये में संदीप देशवाल ने दी। प्रशासन ने किसी अन्य बोलीदाता के आगे न आने पर उनको ठेका दे दिया। ठेकेदार एक अगस्त को पार्किंग संभालेगा। इसकी कार्रवाई प्रशासन करता रहेगा।
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नाराज व्यापारियों ने अपनी अलग बैठक की
व्यापारी प्रशासन के बुलावे पर जिला सचिवालय में शुक्रवार को होने वाली बैठक में नहीं पहुंचे। संयुक्त व्यापार मंडल समिति के बैनर तले अपनी अलग से बैठक की। व्यापारियों ने कहा कि एलिवेटेड हाईवे के नीचे पार्किंग शुरू करना गलत है। इसके विरोध में संस्थाओं, समाजसेवियों और शहर के लोगों से एकजुट होने की अपील की है। व्यापारियों का कहना है कि शहर पार्किंग टेंडर के दुष्परिणाम पहले भुगत चुके हैं। जीटी रोड पर पहले से ही टोल टैक्स लगा है। अब शहर में पार्किंग के लिए वसूली शुरू हो जाएगी। शहरवासियों की दोनों हाथों जेब खाली की जा रही है। शहर के लोग बिना पुल के इस्तेमाल के टोल देते आए हैं और अब पार्किंग का शुल्क भी देना होगा। व्यापारियों ने कहा कि प्रशासन ने उनकी कोई बात नहीं सुनी और पार्किंग का टेंडर करने के एकतरफा आदेश कर दिए। यह व्यापारियों व शहरवासियों की अनदेखी है। इस मौके पर इंद्रजीत कथूरिया, विशाल वर्मा, अशोक सलूजा और सुरेश बवेजा मौजूद रहे।
टैक्सी स्टैंड पर पांच रुपये का मासिक पास
एलिवेटेड हाईवे के नीचे कई जगह टैक्सी स्टैंड बनाया गया है। यहां प्रति गाड़ी प्रति माह पांच रुपये का पास बनाया जाएगा। पार्किंग के अन्य जोन में दोपहिया के 10 और कार के लिए 20 रुपये निर्धारित किए हैं।
सर्विस लेन पर बाइक या गाड़ी खड़ी करने का बहाना नहीं चलेगा
प्रशासन ने जीटी रोड की सर्विस लेने को खाली करने का प्रयास किया था। यातायात पुलिस ने यहां खड़ी होने वाली गाड़ी व बाइकों पर कार्रवाई शुरू की थी। उनको एलिवेटेड हाईवे के नीचे पार्किंग में बाइक या गाड़ी खड़ी करने की सलाह दी गई थी। उनका पार्किंंग में सुरक्षा के मापदंड पूरे न होने पर चोरी होने की बात कही थी। प्रशासन का कहना है कि अब सर्विस लेन को खाली कराया जाएगा। इस पर ऑटो चलाई जाएंगी। प्रशासन का दावा है कि ऑटो को अलग लेन मिलने पर जीटी रोड पर जाम कम होगा।
शहर व जिले में लगाया जाएगा पैसा
सीटीएम राजेश सोनी ने बताया कि एलिवेटेड हाईवे के नीचे पार्किंग का ठेका 31.31 लाख में दिया गया है। यह ठेका फिलहाल तीन महीने के लिए दिया गया। ठेकेदार को एक महीने की राशि अग्रिम देनी होगी। प्रशासन की तरफ से ठेकेदार को हर संभव सहयोग मिलेगा। ठेकेदार निर्धारित रेट से अधिक वसूली करता मिला तो उसका ठेका रद्द कर एक लाख रुपये जुर्माना लगाया जाएगा। प्रशासन एक कमेटी बनाकर इसकी देखरेख करेगा।
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प्रशासन ने ठेकेदार को नियमानुसार काम न करने पर ठेका निरस्त करने की हिदायत साफ रूप से दी है। इधर व्यापारी प्रशासन के इस कदम से खफा दिखे और शुक्रवार को होने वाली दूसरे दौर की बैठक में नहीं पहुंचे। व्यापारियों ने पार्किंग के खिलाफ आंदोलन का फैसला कर लिया है। व्यापारियों ने पार्किंग शुल्क को गुंंडा टैक्स करार दिया है।
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एलिवेटेड हाईवे के नीचे पार्किंग की बोली शुक्रवार को दोपहर बाद करीब साढ़े तीन बजे शुरू हुई। इसकी अध्यक्षता सीटीएम राजेश सोनी, जिला परिषद सीईओ विवेक चौधरी और एसडीएम पानीपत वीरेंद्र ढुल ने संयुक्त रूप से की। इसमें 59 बोलीदाता शामिल हुए। रेडक्रॉस के अधिकारियों ने बोली के नियम व शर्तों के बारे में बताया। इसके बाद बोली प्रक्रिया शुरू हुई। इसमें आठ लाख से बोली शुरू की तो ठेकेदारों में कंपटीशन शुरू हो गया। 97 बार इसकी बोली लगी और आखिरी बोली 31.31 लाख रुपये में संदीप देशवाल ने दी। प्रशासन ने किसी अन्य बोलीदाता के आगे न आने पर उनको ठेका दे दिया। ठेकेदार एक अगस्त को पार्किंग संभालेगा। इसकी कार्रवाई प्रशासन करता रहेगा।
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नाराज व्यापारियों ने अपनी अलग बैठक की
व्यापारी प्रशासन के बुलावे पर जिला सचिवालय में शुक्रवार को होने वाली बैठक में नहीं पहुंचे। संयुक्त व्यापार मंडल समिति के बैनर तले अपनी अलग से बैठक की। व्यापारियों ने कहा कि एलिवेटेड हाईवे के नीचे पार्किंग शुरू करना गलत है। इसके विरोध में संस्थाओं, समाजसेवियों और शहर के लोगों से एकजुट होने की अपील की है। व्यापारियों का कहना है कि शहर पार्किंग टेंडर के दुष्परिणाम पहले भुगत चुके हैं। जीटी रोड पर पहले से ही टोल टैक्स लगा है। अब शहर में पार्किंग के लिए वसूली शुरू हो जाएगी। शहरवासियों की दोनों हाथों जेब खाली की जा रही है। शहर के लोग बिना पुल के इस्तेमाल के टोल देते आए हैं और अब पार्किंग का शुल्क भी देना होगा। व्यापारियों ने कहा कि प्रशासन ने उनकी कोई बात नहीं सुनी और पार्किंग का टेंडर करने के एकतरफा आदेश कर दिए। यह व्यापारियों व शहरवासियों की अनदेखी है। इस मौके पर इंद्रजीत कथूरिया, विशाल वर्मा, अशोक सलूजा और सुरेश बवेजा मौजूद रहे।
टैक्सी स्टैंड पर पांच रुपये का मासिक पास
एलिवेटेड हाईवे के नीचे कई जगह टैक्सी स्टैंड बनाया गया है। यहां प्रति गाड़ी प्रति माह पांच रुपये का पास बनाया जाएगा। पार्किंग के अन्य जोन में दोपहिया के 10 और कार के लिए 20 रुपये निर्धारित किए हैं।
सर्विस लेन पर बाइक या गाड़ी खड़ी करने का बहाना नहीं चलेगा
प्रशासन ने जीटी रोड की सर्विस लेने को खाली करने का प्रयास किया था। यातायात पुलिस ने यहां खड़ी होने वाली गाड़ी व बाइकों पर कार्रवाई शुरू की थी। उनको एलिवेटेड हाईवे के नीचे पार्किंग में बाइक या गाड़ी खड़ी करने की सलाह दी गई थी। उनका पार्किंंग में सुरक्षा के मापदंड पूरे न होने पर चोरी होने की बात कही थी। प्रशासन का कहना है कि अब सर्विस लेन को खाली कराया जाएगा। इस पर ऑटो चलाई जाएंगी। प्रशासन का दावा है कि ऑटो को अलग लेन मिलने पर जीटी रोड पर जाम कम होगा।
शहर व जिले में लगाया जाएगा पैसा
सीटीएम राजेश सोनी ने बताया कि एलिवेटेड हाईवे के नीचे पार्किंग का ठेका 31.31 लाख में दिया गया है। यह ठेका फिलहाल तीन महीने के लिए दिया गया। ठेकेदार को एक महीने की राशि अग्रिम देनी होगी। प्रशासन की तरफ से ठेकेदार को हर संभव सहयोग मिलेगा। ठेकेदार निर्धारित रेट से अधिक वसूली करता मिला तो उसका ठेका रद्द कर एक लाख रुपये जुर्माना लगाया जाएगा। प्रशासन एक कमेटी बनाकर इसकी देखरेख करेगा।